पंजाबी बाग से द्वारका तक हाहाकार, दिल्ली में सांस लेना हुआ मुहाल, AQI पहुंचा 450 के पार!
दिवाली से ठीक पहले दिल्ली में ग्रैप-3 लागू होने के बावजूद प्रदूषण बेकाबू है, जहां पंजाबी बाग (452 AQI) और द्वारका समेत कई इलाकों की हवा 'गंभीर' श्रेणी में बनी हुई है.
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Delhi Pollution on Diwali: त्योहारों की आहट के बीच राजधानी दिल्ली की आबोहवा एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है. रविवार की सुबह जब लोगों की आंख खुली, तो आसमान साफ दिखने के बजाय चारों तरफ जहरीले धुंध की एक भारी चादर लिपटी हुई थी. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB की ओर से सुबह 6 बजे जारी ताजा आंकड़े साफ बता रहे हैं कि शहर के ज्यादातर हिस्सों में सांस लेना भी किसी खतरे से खाली नहीं है.
प्रशासन की तरफ से ग्रैप-3 की पाबंदियां और तमाम कड़े नियम लागू किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद हवा के मिजाज में कोई सुधार नहीं दिख रहा है. दीपावली से ठीक पहले प्रदूषण का यह स्तर लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है.
इन इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब
अगर सबसे ज्यादा जहरीली हवा वाले इलाकों की बात करें, तो पंजाबी बाग में हालात सबसे बुरे रहे जहां AQI उछलकर 452 तक जा पहुंचा. इसके ठीक पीछे आरके पुरम में 449 और आईआईटी दिल्ली में AQI 446 दर्ज किया गया. पश्चिमी दिल्ली के द्वारका इलाके में भी स्थिति बेहद खराब रही और वहां का आंकड़ा 444 तक पहुंच गया. इसके अलावा मथुरा रोड में 425, सिरीफोर्ट में 423 और दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में भी AQI 423 दर्ज हुआ. पूसा में 415, चांदनी चौक में 417, बुराड़ी क्रॉसिंग पर 411 और एनएसयूटी जाफरपुर में AQI 409 रिकॉर्ड किया गया. ये सारे इलाके 400 के आंकड़े को पार कर चुके हैं और गंभीर श्रेणी में बने हुए हैं.
'बेहद खराब' हवा वाले इलाके
हालात उन जगहों पर भी अच्छे नहीं हैं जहां AQI 400 से थोड़ा नीचे दर्ज किया गया. नरेला में 399, आईटीओ पर 396 और मंदिर मार्ग में 393 का AQI मिला है. उत्तम नगर में लोग 373 की खराब हवा में सांस ले रहे हैं, जबकि बुराड़ी में यह 370, तालकटोरा गार्डन में 369 और आया नगर में भी 369 दर्ज किया गया. वसुंधरा एन्क्लेव का हाल 356, टिकरी कलां और बदरपुर दोनों जगह 349, कराला में 337 और लोधी रोड स्थित आईआईटीएफ में 333 तक बना हुआ है.
त्योहारों के इस सीजन में बाजारों में रौनक के बीच लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और दिल या सांस की बीमारी वाले मरीजों के लिए यह वक्त बेहद सावधानी बरतने का है, क्योंकि शहर की आबोहवा लगातार सेहत के लिए एक बड़ा संकट बनती जा रही है.
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