दिल्ली में हेरिटेज साइट्स पर चलेगा MCD का बुलडोजर! हाईकोर्ट के आदेश के बाद 85 ऐतिहासिक स्थलों के सर्वे की तैयारी
Delhi Heritage Sites Survey: राजधानी दिल्ली में हेरिटेज साइट्स के संरक्षण को लेकर बड़ा प्रशासनिक एक्शन शुरू होने जा रहा है.MCD ने दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद ग्रेड-1 श्रेणी के 85 ऐतिहासिक स्थलों के आसपास अवैध निर्माण और अतिक्रमण का विस्तृत सर्वे कराने का फैसला लिया है. जानिए किन-किन धरोहर स्थलों पर चलेगा सर्वे.

राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक पहचान और विरासत को बचाने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने एक बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है. दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों के आसपास फैले अवैध निर्माण और अतिक्रमण के जाल को काटने के लिए अब बुलडोजर एक्शन की तैयारी की जा रही है. एमसीडी का यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के एक कड़े निर्देश के बाद आया है, जिसमें हेरिटेज संपत्तियों के संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही गई है.
हाईकोर्ट का सख्त रुख और सर्वे की रणनीति
दिल्ली की ऐतिहासिक विरासतों के पास हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. अदालत के आदेशानुसार, एमसीडी अब उन सभी निर्माणों की गहन जांच करेगी जो हेरिटेज साइट्स के दायरे में आते हैं. इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि क्या ये निर्माण तय नियमों और मंजूर किए गए बिल्डिंग प्लान के अनुसार हैं या नहीं. इस अभियान में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सर्वे टीम में केवल निगम के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी के अधिकारी भी शामिल रहेंगे. प्रत्येक ऐतिहासिक स्थल की एक अलग विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसकी कॉपी याचिकाकर्ताओं को भी सौंपी जाएगी.
पहले चरण में 'ग्रेड-1' के 85 ऐतिहासिक स्थल शामिल
एमसीडी ने साफ किया है कि इस विशेष सर्वे के पहले चरण में केवल 'ग्रेड-1' श्रेणी के धरोहर स्थलों को कवर किया जाएगा. दिल्ली में इस श्रेणी के तहत लगभग 85 से अधिक महत्वपूर्ण ढांचे आते हैं. ग्रेड-1 में वे इमारतें शामिल हैं जिनका राष्ट्रीय या ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है. इनमें प्रमुख रूप से दरियागंज में शाहजहानाबाद की दीवार का हिस्सा, चांदनी चौक का ऐतिहासिक टाउन हॉल, कंपनी बाग, मिर्जा गालिब का मकबरा, हस्तसाल गांव की मीनार, कोरोनेशन मेमोरियल और स्किनर फैमिली कब्रिस्तान जैसे स्थल शामिल हैं. ये स्थल अपनी अनूठी वास्तुकला और ऐतिहासिक विरासत के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं.
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RWA पर 40 लाख का जुर्माना
प्रशासनिक सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. डिफेंस कॉलोनी में स्थित ग्रेड-1 हेरिटेज 'गुमटी ऑफ शेख अली' पर अतिक्रमण को लेकर वहां की आरडब्ल्यूए (RWA) पर 40 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया है. यह इस बात का साफ संकेत है कि चाहे कोई रसूखदार संस्था हो या आम नागरिक, यदि ऐतिहासिक पहचान के साथ छेड़छाड़ की गई, तो अंजाम बहुत महंगा हो सकता है. दिल्ली सरकार ने 2010 में कुल 775 धरोहर स्थलों की सूची जारी की थी, जिनमें से अधिकांश पुरानी दिल्ली यानी सिटी ज़ोन में स्थित हैं.
12 जोनल विभागों को जिम्मेदारी, कोर्ट में पेश होगी रिपोर्ट
इस बड़े अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए एमसीडी के सभी 12 जोनल विभागों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है. सर्वे के दौरान प्रत्येक साइट की तस्वीरें ली जाएंगी और उन्हें सीधे कोर्ट में पेश किया जाएगा. यदि सर्वे के दौरान कहीं भी नियमों का उल्लंघन या अवैध निर्माण पाया जाता है, तो एमसीडी का बुलडोजर चलना तय है. अगर आप भी किसी ऐतिहासिक इमारत के करीब रहते हैं या वहां कोई निर्माण कार्य कर रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि वह नियमों के दायरे में हो, अन्यथा निगम की कार्रवाई की गाज गिर सकती है.










