दिल्ली से खत्म होंगी झुग्गियां! डूसिब (DUSIB) ला रहा है नई मास्टर पॉलिसी; फ्लैट मिलने तक हर महीने ₹5000 किराए का प्रस्तावE

Delhi slum rehabilitation policy: देश की राजधानी नई दिल्ली को झुग्गी मुक्त बनाने के लिए Delhi Urban Shelter Improvement Board नई मास्टर नीति तैयार कर रहा है. इस योजना के तहत झुग्गी बस्तियों की जगह बहुमंजिला इमारतों में पक्के मकान बनाए जाएंगे. नीति का असर दिल्ली की करीब 675 झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों पर पड़ सकता है. डिटेल में जानिए पूरी बात.

Delhi slum rehabilitation plan
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देश की राजधानी को 'स्लम फ्री' यानी झुग्गी मुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार और दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) ने एक बड़ी तैयारी शुरू कर दी है. दिल्ली की पुरानी तस्वीर को बदलने के लिए एक नई मास्टर पॉलिसी पर काम चल रहा है, जिसके तहत लाखों झुग्गीवासियों को पक्की छत देने का लक्ष्य रखा गया है. इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अधिकारी गुजरात के सूरत, अहमदाबाद और मुंबई के सफल झुग्गी पुनर्वास मॉडल्स का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं. विशेष रूप से मुंबई के 'धारावी मॉडल' और पीपीपी (PPP) मोड पर चर्चा की जा रही है, ताकि दिल्ली की करीब 675 झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों को सम्मानजनक जीवन दिया जा सके. योजना के तहत झुग्गियों की जगह शानदार हाई-राइज बिल्डिंग्स खड़ी की जाएंगी.

सूरत, अहमदाबाद और मुंबई मॉडल की स्टडी

दिल्ली के अधिकारी देश के सबसे सफल स्लम रिहैबिलिटेशन मॉडल्स का विश्लेषण कर रहे हैं. इसमें गुजरात की सूरत और अहमदाबाद की पॉलिसियों को प्राथमिकता दी जा रही है. साथ ही, मुंबई की 'स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी' (SRA) पॉलिसी, जिसने एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी के कायाकल्प का खाका तैयार किया, उसे भी दिल्ली में लागू करने की संभावना तलाशी जा रही है.

प्राइवेट कंपनियां बनाएंगी हाई-राइज फ्लैट्स (PPP मॉडल)

सरकार इस बार पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल को बड़े विकल्प के तौर पर देख रही है. इसके तहत निजी एजेंसियों को झुग्गियों की जमीन पर ईडब्ल्यूएस (EWS) फ्लैट बनाने का जिम्मा दिया जाएगा. ये एजेंसियां न केवल फ्लैट्स बनाएंगी, बल्कि निर्माण कार्य चलने तक झुग्गीवासियों के लिए 'ट्रांजिट कैंप' (अस्थायी आवास) की व्यवस्था भी करेंगी.

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किराए के रूप में मिलेंगे ₹5000 महीना

पॉलिसी का सबसे अहम और राहत देने वाला प्रस्ताव यह है कि यदि कहीं ट्रांजिट कैंप बनाना संभव नहीं हुआ, तो सरकार झुग्गीवासियों को हर महीने ₹5000 से ज्यादा का किराया देने पर विचार कर रही है. यह राशि तब तक दी जाएगी जब तक कि फ्लैट बनकर तैयार नहीं हो जाते और परिवार वहां शिफ्ट नहीं हो जाते.

दिल्ली की 675 बस्तियों पर होगा असर

आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में फिलहाल करीब 675 झुग्गी बस्तियां हैं. जखीरा के पास स्थित 'राखी मार्केट जेजे कैंप' को दिल्ली की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती माना जाता है. इन बस्तियों को शिफ्ट करना एक बड़ी चुनौती है, जिसे जनता की भागीदारी से सुलझाने की कोशिश की जाएगी. मुंबई के धारावी मॉडल की तरह दिल्ली में भी लोगों को अपनी कोऑपरेटिव सोसायटी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है.

'हर सिर पर पक्की छत' का विजन

डूसिब के इस नए मास्टर प्लान का मुख्य उद्देश्य दिल्ली को आधुनिक और झुग्गी मुक्त शहर बनाना है. अधिकारियों का मानना है कि इस नई नीति से न केवल शहर की सूरत बदलेगी, बल्कि गरीब परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का मकान मिल सकेगा.

यहां देखें वीडियो


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