Jantar Mantar Protest Rules: जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट किया तो होगी इतने साल की सजा? इतना जुर्माना!
दिल्ली के जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर दिल्ली पुलिस ने नियमों को बेहद सख्त कर दिया है, जिसके तहत धारा 163 का उल्लंघन करने पर 6 महीने से लेकर 5 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है.
ADVERTISEMENT

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के नियमों को लेकर दिल्ली पुलिस अब बेहद सख्त हो गई है. हाल ही में हुए हंगामे और गिरफ्तारियों के बाद यह साफ कर दिया गया है कि अगर कोई भी व्यक्ति या संगठन बिना अनुमति जंतर-मंतर पर भीड़ जुटाने, भाषणबाजी करने या प्रदर्शन करने की कोशिश करेगा, तो उसे आसानी से राहत या जमानत नहीं मिलेगी.
आइए जानते हैं कि दिल्ली पुलिस के नए और कड़े नियम क्या कहते हैं और कानून तोड़ने पर किस तरह की सजा का प्रावधान है:
जंतर-मंतर की स्थिति और धारा 163 (BNSS)
जंतर-मंतर अब उन चुनिंदा जगहों की सूची से बाहर हो चुका है जहां खुलेआम प्रदर्शन की अनुमति हुआ करती थी. अब दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में हमेशा निषेधाज्ञा यानी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू रखती है. इसका सीधा मतलब यह है कि यहां एक जगह पर 5 या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है. अगर कोई समूह बिना स्थानीय डीसीपी की लिखित एनओसी (NOC) के प्रदर्शन करता है, तो पुलिस तुरंत कार्रवाई करती है.
नियमों के उल्लंघन पर कौन-कौन सी धाराएं और सजा?
- सरकारी आदेश की अवहेलना (BNSS धारा 223 / पुरानी IPC 188): आदेश न मानने पर 1 से 6 महीने तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.
- गैरकानूनी सभा (BNSS धारा 189): भीड़ द्वारा हंगामा करने या हिंसक होने पर 6 महीने तक की कैद हो सकती है। अगर प्रदर्शनकारी घातक हथियारों के साथ मिले, तो यह सजा 2 साल तक बढ़ सकती है.
- पुलिस के काम में बाधा और झड़प (BNSS धारा 221): प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प होने, बैरिकेड्स तोड़ने या लोक सेवक पर हमला करने पर यह गैर-जमानती अपराध बन जाता है, जिसमें 3 से 5 साल तक की जेल हो सकती है.
- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान (PDPP Act): बसों, बैरिकेड्स या किसी भी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर 5 साल तक की कड़ी सजा और नुकसान की पूरी भरपाई आयोजकों से वसूली जाती है.
आयोजकों पर भविष्य के लिए भी संकट
आमतौर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने वालों को पुलिस हिरासत में लेकर किसी स्टेडियम या पुलिस लाइन ले जाती है और शाम को छोड़ देती है. लेकिन, मामला गंभीर होने पर मुख्य चेहरों और आयोजकों पर पक्की FIR दर्ज की जाती है, जिससे भविष्य में उस संगठन को दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति मिलने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
ये भी पढ़ें: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के बाद विदेश लौटे यूट्यूबर ध्रुव राठी, दिल्ली पुलिस को लेकर
