एयरपोर्ट पर ₹10 की चाय और ₹20 का समोसा! राघव चड्ढा ने संसद में उठाई 'महंगे खाने' से आजादी की मांग, सरकार को दिया ये खास सुझाव
Raghav Chadha News: राघव चड्ढा ने संसद में एयरपोर्ट पर मिलने वाले महंगे खाने का मुद्दा उठाते हुए सरकार से यात्रियों को सस्ती सुविधाएं देने की मांग की. उन्होंने उड़ान यात्री कैफे योजना की सराहना करते हुए कहा कि ₹10 की चाय और ₹20 का समोसा अच्छी पहल है, लेकिन यह सुविधा अभी केवल कुछ ही एयरपोर्ट्स तक सीमित है. विस्तार से जानिए पूरी बात.

हवाई अड्डों पर पानी की एक बोतल से लेकर कॉफी के आसमान छूते दामों ने हमेशा आम मुसाफिरों की जेब पर बोझ डाला है. अब इस मुद्दे की गूंज देश की संसद में सुनाई दी है. आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक बार फिर आम नागरिकों की आवाज बुलंद करते हुए सरकार से हवाई अड्डों पर खाने-पीने की चीजों को किफायती बनाने की मांग की है. अरविंद केजरीवाल की रिहाई के बाद पहली बार संसद में सक्रिय नजर आए राघव चड्ढा ने 'उड़ान यात्री कैफे' योजना की सराहना तो की, लेकिन इसकी जमीनी खामियों को गिनाते हुए सरकार को कुछ कड़वी हकीकत से रूबरू कराया.
'उड़ान यात्री कैफे' का स्वागत, लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और
सोमवार, 9 मार्च को संसद में बोलते हुए राघव चड्ढा ने सरकार द्वारा शुरू किए गए 'उड़ान यात्री कैफे' की तारीफ की. उन्होंने कहा कि ₹10 की चाय और ₹20 का समोसा जैसी सस्ती चीजें मिलना एक अच्छी शुरुआत है, जिसका वे स्वागत करते हैं. हालांकि, उन्होंने तुरंत इसकी जमीनी हकीकत पर सवाल उठाते हुए मुख्य समस्याएं गिनाईं. उन्होंने बताया कि देश में 150 से ज्यादा एयरपोर्ट्स हैं, लेकिन यह सुविधा अभी तक सिर्फ 10 से 12 एयरपोर्ट्स तक ही सीमित है. ऐसे में इसका लाभ देश के अधिकांश यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है.
लोकेशन की समस्या: चेक-इन के बाद वाले एरिया में हो कैफे
सांसद राघव चड्ढा ने एक बहुत ही व्यावहारिक मुद्दा उठाया कि ये सस्ते कैफे वर्तमान में चेक-इन और सिक्योरिटी से पहले बनाए गए हैं. उन्होंने तर्क दिया कि चेक-इन से पहले तो यात्री बाहर का खाना भी खा सकता है या अपने साथ ला सकता है. असली जरूरत तो सिक्योरिटी क्लियर होने के बाद डिपार्चर होल्ड एरिया और बोर्डिंग जोन में होती है, जहां यात्री को अपनी फ्लाइट के लिए घंटों लंबा इंतजार करना पड़ता है. वहां पर ये किफायती कैफे न होने के कारण यात्रियों को मजबूरन महंगा खाना खरीदना पड़ता है.
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लंबी लाइनें और छोटा मेन्यू यात्रियों की बड़ी परेशानी
राघव चड्ढा ने सदन को बताया कि पीक आवर्स के दौरान इन सस्ते काउंटर्स पर इतनी लंबी लाइन होती है कि यात्री का नंबर आने से पहले फ्लाइट छूटने का डर रहता है. इसके अलावा, वहां उपलब्ध खाने के विकल्प यानी मेन्यू भी बहुत छोटा है. उन्होंने सरकार से अपील की कि इन काउंटर्स की संख्या बढ़ाई जाए और मेन्यू में और बेहतर फूड ऑप्शंस जोड़े जाएं ताकि यात्रियों को लंबी लाइनों में न खड़ा होना पड़े और उन्हें अपनी पसंद का खाना मिल सके.
'हवाई यात्रा अब सिर्फ अमीरों का शौक नहीं'
सांसद ने सदन में जोर देते हुए कहा कि आज के दौर में हवाई यात्रा अब सिर्फ अमीरों का शौक नहीं रह गई है, बल्कि यह एक आम आदमी की जरूरत बन चुकी है. ऐसे में सुविधाओं का सस्ता और अफोर्डेबल होना बेहद जरूरी है. उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि हर छोटे-बड़े एयरपोर्ट पर इन कैफे की शुरुआत की जाए ताकि एक आम इंसान बिना अपनी जेब खाली किए सम्मान के साथ एयरपोर्ट पर पानी पी सके और नाश्ता कर सके. अब देखना यह होगा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय इन सुझावों पर कितनी जल्दी अमल करता है.
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