'फोन मेरा, सिम मेरा, तो आवाज बंद क्यों?', मोबाइल बिलिंग साइकिल और इनकमिंग कॉल को लेकर राघव चड्ढा के तीखे सवाल

Raghav Chadha telecom issue: राज्यसभा में राघव चड्ढा ने मोबाइल रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल बंद करने और 28 दिन की बिलिंग साइकिल पर टेलीकॉम कंपनियों को घेरा. उन्होंने कहा कि यह करोड़ों प्रीपेड यूजर्स के ‘राइट टू कम्युनिकेशन’ का उल्लंघन है. संसद में उन्होंने सरकार से इनकमिंग कॉल की गारंटी, नंबर री-अलॉटमेंट पर 3 साल का ग्रेस पीरियड और सस्ते इनकमिंग प्लान लागू करने की मांग की.

Raghav Chadha telecom issue
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'अगर आप एक महीने का रिचार्ज कराना भूल जाएं, तो आपकी आवाज बंद कर दी जाती है. फोन मेरा है, सिम कार्ड मेरा है, नंबर मेरा है... तो रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल बंद करना सरासर मनमानी है.' यह तीखे सवाल आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में उठाए. उन्होंने देश के 125 करोड़ मोबाइल यूजर्स, खासकर 90% प्रीपेड ग्राहकों की ओर से टेलीकॉम कंपनियों की लूट और चालाकी पर करारा प्रहार किया.

इनकमिंग बंद करना संचार के अधिकार का हनन

राघव चड्ढा ने सदन में पुरजोर तरीके से तर्क दिया कि मोबाइल रिचार्ज खत्म होने पर आउटगोइंग कॉल बंद करना तो समझ आता है, लेकिन इनकमिंग कॉल और एसएमएस की सुविधा को पूरी तरह ठप कर देना गलत है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में मोबाइल नंबर महज बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि एक अनिवार्य 'डिजिटल पहचान' बन चुका है. यूपीआई पेमेंट, बैंकिंग ओटीपी, ट्रेन टिकट की बुकिंग, पैन-आधार ऑथेंटिकेशन और यहां तक कि अस्पतालों या बुजुर्ग माता-पिता के जरूरी फोन कॉल भी इसी इनकमिंग सुविधा पर निर्भर हैं. 

चड्ढा ने स्पष्ट किया कि इनकमिंग रोकना केवल एक सेवा को बंद करना नहीं है, बल्कि यह नागरिक के 'राइट टू कम्युनिकेशन' (संचार के अधिकार) का सीधा हनन है. उन्होंने सवाल उठाया कि जैसे बैंक खाता या वोटर आईडी एक ट्रांजेक्शन न करने पर बंद नहीं होते, वैसे ही मोबाइल नंबर को डीएक्टिवेट करना डिजिटल युग में एक बड़ी बाधा है.

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28 दिन का महीना: कंपनियों की 'क्लेवर स्ट्रेटजी' का पर्दाफाश

टेलीकॉम कंपनियों के '28 दिन के महीने' वाले गणित पर निशाना साधते हुए राघव चड्ढा ने इसे एक सोची-समझी चालाकी करार दिया. उन्होंने गणित समझाते हुए कहा कि साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन कंपनियां 28 दिन की बिलिंग साइकिल चलाती हैं, जिसकी वजह से एक आम उपभोक्ता को साल में 12 के बजाय 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है.

 कंपनियां ग्राहकों को 30 दिन की सुविधा का अहसास कराकर असल में केवल 28 दिन की डीलिंग करती हैं, जिससे उन्हें साल के अंत में एक अतिरिक्त महीने का पूरा मुनाफा मिलता है. चड्ढा ने मांग की कि जब बिजली, पानी, गैस का बिल, बैंक की ईएमआई और मकान का किराया 30 या 31 दिन के कैलेंडर मंथ के हिसाब से तय होता है, तो मोबाइल बिलिंग को भी इसी अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप बदला जाना चाहिए ताकि जनता पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम हो सके.

राघव चड्ढा की सरकार से 3 बड़ी मांगें

सांसद ने मोबाइल यूजर्स को राहत देने के लिए सरकार के सामने तीन स्पष्ट प्रस्ताव रखे:

इनकमिंग की गारंटी: पिछले रिचार्ज की तारीख से कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल और एसएमएस की सुविधा अनिवार्य रूप से चालू रहे.

नंबर अलॉटमेंट पर रोक: किसी का नंबर बंद करके दूसरे को देने से पहले कम से कम 3 साल का ग्रेस पीरियड दिया जाए.

सस्ता इनकमिंग प्लान: कंपनियां सिर्फ इनकमिंग के लिए बेहद सस्ते प्लान लाएं, जैसे ₹10 में 180 दिन की सुविधा.

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