बॉलीवुड ने खोया अपनी धाकड़ आवाज, नाना पाटेकर 27 एकड़ में खेती कर कमाई का बड़ा हिस्सा कर देते थे दान

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दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे. गुरुवार की सुबह करीब 5:20 बजे गोवा के मणिपाल अस्पताल में उन्होंने 75 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली. सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार देने के साथ-साथ अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. अपनी बुलंद आवाज, बेबाक अंदाज और संजीदा अभिनय से बॉलीवुड पर दशकों तक राज करने वाले नाना पाटेकर के जाने से सिनेमा जगत और उनके लाखों प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है.
 

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नाना पाटेकर केवल एक महान कलाकार ही नहीं थे, बल्कि एक सच्चे 'धरती पुत्र' और किसानों के मसीहा भी थे. ग्लैमर और चकाचौंध की दुनिया से दूर, वे महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित खड़कवासला गांव में बने अपने 27 एकड़ के फार्महाउस पर साधारण जीवन बिताना पसंद करते थे. इस फार्महाउस पर बने सात कमरों वाले मकान में रहकर वे खुद गेहूं, चना और धान जैसी फसलों की खेती किया करते थे.
 

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खेती से होने वाली फसल को वे महाराष्ट्र के बाजारों में बेचते थे, लेकिन उससे मिलने वाला एक भी पैसा अपनी जेब में नहीं रखते थे. फसल की पूरी कमाई को वे सबसे पहले अपने खेत में काम करने वाले मजदूरों और जरूरतमंद किसानों के बीच बांट देते थे. बचपन में खुद तंगहाली का सामना करने के कारण, उनका स्वभाव बेहद सरल और संवेदनशील रहा. वे हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए सबसे आगे खड़े दिखाई दिए.
 

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उनकी संवेदनशीलता से जुड़ा एक बेहद चर्चित किस्सा है. एक बार वे करीब 1.5 करोड़ रुपये जोड़कर अपने लिए एक नई कार खरीदने की तैयारी कर रहे थे. उसी दिन टीवी पर जब उन्होंने सूखा और कर्ज से परेशान किसानों की आत्महत्या की खबरें देखीं, तो उनका दिल पसीज गया. उन्होंने तुरंत कार खरीदने का विचार त्याग दिया और उन सारे पैसों से पीड़ित किसान परिवारों की मदद करने पहुंच गए.

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किसानों के हक और उनकी बदहाली पर बात करते हुए नाना पाटेकर अक्सर भावुक हो जाते थे. इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने और संकटग्रस्त परिवारों का सहारा बनने के लिए उन्होंने साल 2015 में 'नाम फाउंडेशन' (NAAM Foundation) की नींव रखी. पुणे में मुख्यालय वाला यह एनजीओ महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों को वित्तीय मदद, पानी की व्यवस्था और कर्ज से मुक्ति दिलाने का काम लगातार करता आ रहा है.
 

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'नाम फाउंडेशन' के माध्यम से नाना पाटेकर ने न केवल आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को संभाला, बल्कि गरीब किसानों की बेटियों की शादियों में आर्थिक सहयोग दिया और कई गांवों में जल संरक्षण के बड़े प्रोजेक्ट्स चलाए. उन्होंने अपनी लोकप्रियता और संसाधनों का इस्तेमाल समाज के सबसे निचले तबके को ऊपर उठाने के लिए किया, जो आज के दौर में बहुत कम देखने को मिलता है.
 

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1 जनवरी 1951 को मुंबई में जन्मे नाना पाटेकर ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में जो जगह बनाई, वह तो अमर है ही; लेकिन एक किसान और समाजसेवक के रूप में उनका योगदान भी सदियों तक याद रखा जाएगा. 

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पर्दे पर अपनी दमदार डायलॉग डिलीवरी से लोगों को चौंकाने वाला यह महान इंसान, असल जिंदगी में अपनी सादगी और दरियादिली से लाखों दिलों पर हमेशा राज करता रहेगा.