'क्रिश्चियन पिता, हिंदू मां और मुस्लिम सरनेम'! जानिए कौन हैं दीया मिर्जा, जिनके पटाखे ना जलाने की अपील पर गरमाई मुंबई की सियासत

Dia Mirza Controversy: बॉलीवुड अभिनेत्री और पर्यावरणविद् दीया मिर्जा की दिवाली पर पटाखे न जलाने की अपील को लेकर मुंबई में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. BMC के प्रदूषण मुक्त दिवाली अभियान के तहत जारी उनका वीडियो बीजेपी नेताओं की आपत्ति के बाद सोशल मीडिया से हटा दिया गया. मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने BMC को वीडियो दोबारा अपलोड करने का निर्देश दिया.

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Dia Mirza Controversy
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बॉलीवुड अभिनेत्री और पर्यावरणविद् दीया मिर्जा एक बार फिर बड़े राजनीतिक और धार्मिक विवाद के केंद्र में आ गई हैं. मामला मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने की अपील से जुड़ा है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा चलाए गए प्रदूषण मुक्त दिवाली अभियान के तहत दीया मिर्जा ने एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से पटाखे न जलाने की अपील की थी. हालांकि, इस वीडियो के सामने आते ही मुंबई की राजनीति में भारी भूचाल आ गया और यह मुद्दा हिंदू बनाम मुसलमान के महाविवाद में तब्दील हो गया. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.

बीजेपी नेताओं का विरोध और वीडियो हटाने पर विवाद

मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम और अन्य नेताओं ने दीया मिर्जा के इस संदेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे हिंदू विरोधी करार दिया और दावा किया कि त्योहार मनाने के तरीके पर उन्हें किसी से सबक लेने की जरूरत नहीं है. राजनीतिक दबाव और विरोध के चलते बीएमसी ने अन्य हस्तियों (जैसे माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे) के वीडियो तो रखे, लेकिन विवाद बढ़ता देख दीया मिर्जा का वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल से डिलीट कर दिया. आलोचकों और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि केवल 'मिर्जा' सरनेम होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.

दीया मिर्जा की पारिवारिक पृष्ठभूमि और ट्रोलर्स को जवाब

ट्रोलर्स और आलोचकों द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच दीया मिर्जा की पारिवारिक पृष्ठभूमि की भी चर्चा तेज हो गई है. दीया के बायोलॉजिकल पिता (जन्म देने वाले पिता) जर्मन ईसाई थे, उनकी मां बंगाली हिंदू हैं, और उनकी परवरिश उनके सौतेले पिता (अहमद मिर्जा) ने एक मुस्लिम परिवार में की है. इससे पहले भी सीएए-एनआरसी विवाद के दौरान दीया स्पष्ट कर चुकी हैं कि उनके आधिकारिक दस्तावेजों में धर्म का कॉलम खाली रहता है, और उनका परिवार सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है. इसके बावजूद सरनेम के आधार पर उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया.

बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त रुख और बीएमसी को फटकार

इस पूरे मामले में उस वक्त एक बड़ा मोड़ आया जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया. जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की बेंच ने बीएमसी प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे गंभीर मामलों को कुछ नेताओं द्वारा जानबूझकर सांप्रदायिक रंग देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों से ऐसी छोटी मानसिकता की उम्मीद नहीं की जा सकती. हाईकोर्ट ने बीएमसी को आदेश दिया कि वह बिना किसी देरी के दीया मिर्जा के हटाए गए वीडियो को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर तुरंत दोबारा अपलोड करें.

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