Daljeet Sihag Sisai Controversy: पवन के भाइयों ने दलजीत पर लगाया चंदा हड़पने और अकेले फायदा उठाने का आरोप, जानें पूरा मामला

Daljeet Sihag Sisai Controversy: जाट आरक्षण आंदोलन मामले में बरी हुए दलजीत सिहाग सिसाई पर पवन उर्फ पोना के भाइयों ने चंदे के लाखों रुपये हड़पने, पवन की पैरवी के लिए आर्थिक मदद नहीं देने और करीब 2 करोड़ रुपये का फार्महाउस बनवाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. जानिए क्या है पूरा विवाद और परिजनों ने दलजीत के दावों पर क्या जवाब दिया.

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Daljeet Sihag Sisai Controversy
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हरियाणा में साल 2016 के बहुचर्चित जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में उम्रकैद की सजा से बरी हुए आरोपियों के बीच अब आपसी बयानबाजी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में बरी हुए दलजीत सिहाग सिसाई के एक हालिया बयान के बाद, दूसरे सह-आरोपी पवन उर्फ पोना के भाइयों और करीबियों का गुस्सा फूट पड़ा है. दलजीत सिहाग ने एक इंटरव्यू में यह दावा किया था कि जेल में रहने के दौरान समाज ने कोई मदद नहीं की, और उन्होंने खुद ही पवन की पैरवी कराई तथा उसके लिए पैसे भरे.

पवन के भाई और परिजनों के दलजीत सिहाग पर गंभीर आरोप

दलजीत के इस दावे के बाद पवन उर्फ पोना के भाई ने मीडिया के सामने आकर तीखा पलटवार किया और कई गंभीर आरोप लगाए:

चंदे के पैसों का दुरुपयोग: परिजनों का आरोप है कि 2016 और 2019 में सिसाई गांव में हुई पंचायतों के दौरान चंदे के रूप में लाखों रुपये एकत्र किए गए थे, जो दलजीत, सुरेंद्र ढांडा और पवन तीनों के लिए थे. लेकिन वह सारा चंदा दलजीत ने अकेले अपने पास रख लिया और पवन को एक भी रुपया नहीं दिया.

फार्महाउस बनवाने के आरोप: परिजनों ने यह भी सनसनीखेज आरोप लगाया कि जब वे जेल के अंदर थे, तब दलजीत सिहाग ने चंदे के पैसों और बाहर मिलने वाले फंड से लगभग 2 करोड़ रुपये का शानदार फार्महाउस तैयार करवा लिया, जबकि पवन के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है.

व्यक्तिगत मदद से इनकार: पवन के भाई का कहना है कि पिछले 11 वर्षों से वे खुद पवन की पैरवी कर रहे हैं और उनके पास जेल में भेजी गई ट्रांजैक्शन की एक-एक रसीद व रिकॉर्ड मौजूद है, जिसमें साबित होता है कि दलजीत की तरफ से कोई वित्तीय मदद नहीं दी गई.

समाज के सहयोग और पवन की संघर्षपूर्ण दास्तान

परिजनों ने स्पष्ट किया कि समाज ने हमेशा पवन और इस लड़ाई का पूरा साथ दिया है, और समाज के बिना यह संघर्ष संभव नहीं था. उन्होंने समाज से माफी मांगते हुए कहा कि दलजीत का यह कहना गलत है कि समाज ने मदद नहीं की.

गौरतलब है कि पवन उर्फ पोना के सिर से माता-पिता का साया बहुत पहले उठ चुका था, और उनके बड़े भाई मोनू ने ही उन्हें संभाला था, जिनकी बाद में मौत हो गई. पिछले 11 वर्षों से पवन लगातार जेल की सलाखों के पीछे है और उसे एक बार भी पैरोल या फरलो नहीं मिली. हालांकि जाट आरक्षण से जुड़े मामलों में उसे बरी किया जा चुका है, लेकिन अन्य मामूली वजहों से अभी उसे जेल से बाहर आने में कुछ वक्त लग सकता है. इस तीखे विवाद के बाद अब हरियाणा की राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है.

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