Haryana Electricity Strike: बिना लाइसेंस रद्द हुए कर्मचारी कैसे मान गए और क्यों खत्म की हड़ताल? रविंद्र घणगस ने बताई अंदर की कहानी

Haryana Electricity Strike: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल खत्म हो गई है, लेकिन इलेवन पावर के लाइसेंस को लेकर विवाद अभी चर्चा में है. आखिर लाइसेंस रद्द हुए बिना कर्मचारी आंदोलन वापस लेने पर क्यों राजी हुए? मुख्यमंत्री नायब सैनी के साथ बैठक में क्या तय हुआ और सरकार ने कौन-सा कानूनी रास्ता अपनाने का भरोसा दिया? जानिए पूरी कहानी.

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हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म
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Haryana Bijli Karamchari Hartal: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल और इलेवन पावर (Eleven Power) के लाइसेंस को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद थम गया है. हड़ताल वापस लेने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे थे कि बिना लाइसेंस रद्द हुए कर्मचारियों ने आंदोलन क्यों समाप्त कर दिया. 'हरियाणा तक' के साथ खास बातचीत में पावर इंजीनियर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी रविंद्र घणगस ने मीटिंग के अंदर की पूरी कहानी साझा की और बताया कि सरकार के किस आश्वासन और कानूनी प्रावधान के तहत यह फैसला लिया गया है.

हड़ताल वापसी और सरकार के साथ हुई अहम बैठक का सच

रविंद्र घणगस ने बताया कि बिजली कर्मचारियों ने 15 अक्टूबर को ही अनिश्चितकालीन हड़ताल का नोटिस दे दिया था, क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि एचईआरसी (HERC) नियमों के खिलाफ जाकर निजी कंपनियों को लाइसेंस जारी कर सकता है. दशहरे से ठीक पहले लाइसेंस जारी होने के बाद पूरे प्रदेश में कर्मचारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सैनी और ऊर्जा मंत्री के साथ हुई बैठक में सरकार ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 108 के तहत एचईआरसी को आधिकारिक निर्देश जारी करने का फैसला लिया, जिसके बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल को विराम दिया.

कानूनी प्रावधान और एचईआरसी पर सरकार के निर्देश का प्रभाव

जब सवाल किया गया कि बिना लाइसेंस रद्द हुए केवल आश्वासन पर हड़ताल क्यों वापस ली गई, तो जनरल सेक्रेटरी ने स्पष्ट किया कि एचईआरसी एक संवैधानिक संस्था है जिसे सरकार सीधे तौर पर तुरंत प्रभाव से रद्द नहीं कर सकती, लेकिन इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के तहत सरकार की नीतिगत निर्देश (Policy Direction) एचईआरसी पर प्रभावी होते हैं. मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री द्वारा इस पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद यह तय माना जा रहा है कि एचईआरसी को सरकार के निर्देशों की पालना करनी होगी और लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

निजीकरण के खिलाफ लंबी लड़ाई और आगे की रणनीति

बातचीत के दौरान यह भी सामने आया कि यह सिर्फ एक जिले या कंपनी का मुद्दा नहीं था, बल्कि पूरे देश में पावर सेक्टर के प्राइवेटाइजेशन के खिलाफ एक बड़ी जंग थी. कर्मचारियों की एकजुटता का ही नतीजा रहा कि हरियाणा में 95 प्रतिशत तक हड़ताल सफल रही, जिससे सरकार को भी गंभीरता से विचार करना पड़ा. एसोसिएशन ने मांग की है कि सरकार प्राइवेट प्लेयर की एंट्री कराने के बजाय सरकारी विभागों और रिक्त पड़ी हजारों पोस्ट को भरकर इन्हें और अधिक रिसोर्सफुल बनाए, ताकि जनता को सस्ती और सुलभ बिजली मिलती रहे.

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