45 घंटे बाद हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, लेकिन निजी कंपनी के लाइसेंस पर अब क्या होगा?

गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के विरोध में हरियाणा में चल रही बिजली कर्मचारियों की 45 घंटे की हड़ताल खत्म हो गई है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ हुई बैठक में सरकार ने लाइसेंस रद्द कराने के लिए समीक्षा का भरोसा दिया है.

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हरियाणा में बिजली कर्मचारियों ने 45 घंटे बाद हड़ताल खत्म कर दी है. गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के विरोध में कर्मचारी हड़ताल पर थे. शुक्रवार को पंचकूला में यूनियन कर्मचारियों की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ बैठक हुई. इसके बाद सरकार ने निजी कंपनी का लाइसेंस रद्द कराने के लिए कार्रवाई का भरोसा दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस फैसले के खिलाफ है और कर्मचारियों के साथ खड़ी है.

सरकार के आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ बैठक के बाद बिजली कर्मचारी यूनियन ने हड़ताल वापस लेने का ऐलान किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) को पत्र लिखकर इस फैसले की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं.

मुख्यमंत्री ने बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत कार्रवाई का भरोसा भी दिया. उन्होंने कहा कि सरकार हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के पक्ष में नहीं है. कर्मचारी यूनियन के नेता देवेंद्र हुड्डा ने बताया कि बाकी मांगों पर चर्चा के लिए 3 नवंबर को सरकार के साथ फिर बैठक होगी.

मुख्यमंत्री ने बिजली सप्लाई बहाल करने के दिए निर्देश

हड़ताल के कारण प्रदेश के कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई. इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को बिजली सप्लाई जल्द बहाल करने के निर्देश दिए. उन्होंने प्रभावित जिलों से इसकी रिपोर्ट भी मांगी है.

गुरुवार से शुरू हुई हड़ताल का असर प्रदेश के करीब 15 जिलों में देखने को मिला. शुक्रवार को भी कई जगह बिजली संकट बना रहा. अंबाला, हिसार, कुरुक्षेत्र, फरीदाबाद, सोनीपत और गुरुग्राम में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. हड़ताल के कारण कुरुक्षेत्र और कैथल बार एसोसिएशन ने कामकाज भी बंद रखा. 

गुरुग्राम-नूंह में निजी कंपनी को 25 साल के लिए मिला लाइसेंस

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल की मुख्य वजह गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देना है. हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने 19 अक्टूबर 2026 को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को दोनों जिलों में 25 साल के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस दिया था.

इस लाइसेंस के तहत कंपनी सरकारी बिजली वितरण निगमों के समानांतर बिजली सप्लाई कर सकती है. कर्मचारी संगठनों को आशंका है कि इससे सरकारी बिजली निगमों की कमाई पर असर पड़ेगा. साथ ही कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है.

मुख्यमंत्री बोले- सरकार फैसले के खिलाफ

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जब HERC ने गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को लाइसेंस देने का आदेश दिया था, तब भी ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने इस फैसले का विरोध किया था. सरकार कर्मचारियों की चिंताओं को समझती है और उनके साथ है.

मुख्यमंत्री ने बताया कि HERC बिजली अधिनियम के तहत काम करने वाला आयोग है. बिजली वितरण का लाइसेंस देने की प्रक्रिया उसके अधिकार क्षेत्र में आती है. ऐसे में सरकार ने बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत आयोग को फैसले की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा, धारा 94 के तहत रिव्यू पिटीशन दायर करने की भी बात कही गई है.

सरकार की ओर से जारी पत्र में भी निजी कंपनी को लाइसेंस देने से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं. इसमें कंपनी की वित्तीय क्षमता, तकनीकी तैयारी और सभी उपभोक्ताओं तक बिजली सेवा पहुंचाने की क्षमता पर चिंता जताई गई है. सरकार ने यह आशंका भी जताई है कि दो कंपनियों के बिजली वितरण से सरकारी निगमों की कमाई, बिजली खरीद समझौतों और मौजूदा ढांचे पर असर पड़ सकता है. इससे सरकारी बिजली निगम और उसके उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका भी है.

सरकार सीधे क्यों नहीं रद्द कर सकती लाइसेंस?

बिजली वितरण का लाइसेंस देने का अधिकार HERC के पास है. यह आयोग बिजली अधिनियम, 2003 के तहत गठित एक स्वायत्त संस्था है. इसलिए सरकार केवल अपने आदेश से निजी कंपनी का लाइसेंस सीधे रद्द नहीं कर सकती.

सरकार आयोग के फैसले को चुनौती देने के लिए कानूनी रास्ता अपना सकती है. इसके तहत बिजली क्षेत्र के अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में अपील कर आदेश पर रोक लगाने की मांग की जा सकती है. वहीं, बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत सरकार जनहित से जुड़े नीतिगत मामलों में आयोग को निर्देश दे सकती है. हालांकि, ऐसे निर्देश से लाइसेंस अपने आप रद्द नहीं हो जाता.

फिलहाल सरकार ने निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले का विरोध करते हुए आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया है. कर्मचारियों ने भी आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल खत्म कर दी है. अब 3 नवंबर को होने वाली बैठक में उनकी बाकी मांगों पर चर्चा होगी.

सरकार सीधे लाइसेंस क्यों नहीं कर सकती रद्द?

हरियाणा में बिजली वितरण का लाइसेंस देने का अधिकार HERC के पास है. यह आयोग सरकार से अलग होकर काम करता है. इसलिए राज्य सरकार अपने स्तर पर निजी कंपनी का लाइसेंस सीधे रद्द नहीं कर सकती.

अगर सरकार आयोग के फैसले से सहमत नहीं है, तो वह इसे कानूनी रूप से चुनौती दे सकती है. इसके लिए बिजली क्षेत्र के अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में अपील की जा सकती है. सरकार आयोग से फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग भी कर सकती है.

बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत सरकार जनहित से जुड़े मामलों में आयोग को निर्देश दे सकती है. हालांकि, इन निर्देशों से निजी कंपनी का लाइसेंस अपने आप रद्द नहीं होता. इसके लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया जरूरी है. फिलहाल सरकार ने लाइसेंस देने के फैसले पर अपना विरोध जताया है और इसे रद्द कराने के लिए कदम उठाने का भरोसा दिया है. सरकार के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म कर दी है. अब 3 नवंबर को होने वाली बैठक में उनकी बाकी मांगों पर चर्चा होगी.

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