Manisha Bhiwani Death Case: मृतका मनीषा के पिता को बड़ी राहत, कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दोबारा जांच के दिए आदेश
Manisha Bhiwani Death Case: मनीषा डेथ मामले में पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने 31 अक्टूबर 2026 को CBI की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी और 18 वर्षीय मनीषा की मौत के मामले में दोबारा जांच के आदेश दिए. मनीषा के पिता संजय ने जांच, दवा खरीद और CCTV फुटेज को लेकर सवाल उठाए हैं. अदालत के फैसले से परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है.
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भिवानी के बहुचर्चित और संवेदनशील मनीषा डेथ मामले में एक बार फिर से कानूनी प्रक्रिया के जरिए मृतका के परिवार को न्याय की नई उम्मीद जगी है. अदालत ने इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से पेश की गई क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है. साथ ही, अदालत ने मनीषा के पिता द्वारा दायर की गई याचिका को स्वीकार करते हुए इस पूरे मामले की नए सिरे से जांच (Re-investigation) के आदेश दिए हैं. इस फैसले के बाद से स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में एक बार फिर से न्याय की आस जग गई है.
क्या है मनीषा डेथ केस?
भिवानी का मनीषा डेथ केस 18 वर्षीय युवती मनीषा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ा है. अगस्त 2025 में उनका शव खेत में मिला था. परिवार ने हत्या की आशंका जताई थी, जबकि सीबीआई ने इसे आत्महत्या बताया था. हालांकि, 31 अक्टूबर 2026 को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दोबारा जांच के आदेश दिए.
सीबीआई की जांच और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
मृतका के पिता संजय ने मीडिया से बातचीत करते हुए सीबीआई और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि सीबीआई ने अपनी जांच में हरियाणा पुलिस द्वारा दिए गए तथ्यों के विपरीत कोई नई बात सामने नहीं रखी और पुलिस की पुरानी रिपोर्ट को ही आगे बढ़ा दिया. पिता का कहना है कि शुरुआती दौर से ही मामले में लीपापोती की गई और बिना पुख्ता सबूतों के इसे आत्महत्या करार दे दिया गया.
पिता द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल और अनसुनी कड़ियां
परिवार का दावा है कि पुलिस और सीबीआई दोनों ही उनके द्वारा उठाए गए बुनियादी सवालों के जवाब देने में नाकाम रहे हैं:
गायब रहने के दो दिन: मनीषा 11 तारीख को मिसिंग हुई थी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 11 तारीख को ही मौत की बात कही जा रही है, ऐसे में सवाल उठता है कि वह दो दिन तक कहां रही और जिस व्यस्त रास्ते से शव मिलने की बात कही गई, वहां से दो दिन तक किसी ने उसे क्यों नहीं देखा?
दवाई और सुसाइड नोट पर संदेह: मृतका द्वारा कोई दवा खरीदे जाने का कोई पुख्ता सबूत दुकान या रजिस्टर में मौजूद नहीं है. इसके अलावा, जो सुसाइड नोट सामने आया है, उसकी हैंडराइटिंग और प्रामाणिकता पर भी परिवार ने कड़ा संदेह जताया है तथा इसे पुलिस अधिकारियों द्वारा तैयार किए जाने का आरोप लगाया है.
सीसीटीवी फुटेज में छेड़छाड़: कॉलेज के सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर (DVR) को लोहारू पुलिस ने लगभग 40 दिनों तक अपने पास सुरक्षित रखा और बाद में खाली मिलने की बात कही, जिससे सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका गहराती है.
नारको टेस्ट की मांग और आगे की लड़ाई
इस मामले में संदिग्ध माने जा रहे कुछ लोगों और अधिकारियों, जिनमें लोहारू के तत्कालीन डीएसपी, जांच अधिकारी (IO) शकुंतला, बीज भंडार वाले और कॉलेज प्रशासन के लोग शामिल हैं, उनके नारको टेस्ट की भी मांग उठाई जा रही है. पिता संजय ने स्पष्ट किया है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे कानूनी लड़ाई के साथ-साथ समाज को साथ लेकर सड़कों पर उतरकर भी संघर्ष करेंगे. अदालत के नए आदेश के बाद अब यह देखना अहम होगा कि नए सिरे से होने वाली इस जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं.
