पुतिन, मोदी और जिनपिंग के विमानों में कौन सबसे ताकतवर? यहां समझिए पूरा अंतर

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब विदेश दौरे पर जाते हैं तो उनके विमान पर भी पूरी दुनिया की नजर रहती है. उनके लिए इस्तेमाल होने वाला विमान सामान्य यात्री विमान जैसा दिखाई देता है, लेकिन अंदर से इसकी व्यवस्था बेहद खास होती है. चीन राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए मुख्य रूप से Boeing 747-8 विमान का इस्तेमाल करता है. कई जगहों पर शी जिनपिंग के विमान को Boeing 787-8 बताया जाता है, लेकिन राष्ट्रपति स्तर की यात्राओं के लिए इस्तेमाल होने वाला विमान Boeing 747-8 है. यह मूल रूप से Air China का विमान है. इसका रजिस्ट्रेशन नंबर B-2479 है. इसे 2014 में Air China को सौंपा गया था. करीब 2016 के आसपास इसे राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया.

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सामान्य विमान जैसा दिखता है, अंदर है खास इंतजाम
शी जिनपिंग का विमान बाहर से किसी सामान्य Boeing 747 की तरह दिखाई देता है. लेकिन इसका इंटीरियर आम यात्री विमान से बिल्कुल अलग है. इसमें राष्ट्रपति के लिए निजी सूट, कार्यालय, बैठक कक्ष और सुरक्षित संचार की व्यवस्था होती है. विमान में सुरक्षा अधिकारियों और जरूरी स्टाफ के लिए भी अलग व्यवस्था रहती है. कॉन्फ्रेंस रूम, बेडरूम, मेडिकल सुविधा और गैली जैसी सुविधाएं इसे एक तरह का उड़ता हुआ कमांड सेंटर बनाती हैं. अमेरिका के मॉडल से चीन का तरीका अलग है. अमेरिका के पास राष्ट्रपति के लिए स्थायी रूप से समर्पित Air Force One विमान है. चीन जरूरत के अनुसार राष्ट्रीय एयरलाइन के विमान को विशेष सुरक्षा और संचार सुविधाओं से तैयार करके इस्तेमाल करता है.

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Boeing 747-8 कितना ताकतवर है?
Boeing 747-8 एक विशाल चौड़े धड़ वाला विमान है. इसमें चार इंजन लगे होते हैं. विमान में General Electric GEnx-2B67 इंजन इस्तेमाल किए जाते हैं. हर इंजन करीब 66,500 पाउंड थ्रस्ट पैदा कर सकता है. इसका अधिकतम टेकऑफ वजन लगभग 4,47,700 किलोग्राम है. यह बिना ईंधन भरे 14,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय कर सकता है. इसकी क्रूज स्पीड करीब Mach 0.855 यानी लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास है. विमान करीब 43,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. हालांकि राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल होने वाले विमान में सामान्य यात्री क्षमता को काफी कम रखा जाता है. इसमें सिर्फ राष्ट्रपति, सुरक्षा अधिकारी, सरकारी अधिकारी और जरूरी स्टाफ यात्रा करते हैं.

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787-8 से क्यों होता है कन्फ्यूजन?
Boeing 787-8 भी लंबी दूरी का आधुनिक विमान है. इसकी लंबाई करीब 57 मीटर और पंखों का फैलाव लगभग 60 मीटर है. इसकी रेंज करीब 13,600 किलोमीटर बताई जाती है. 787-8 में कार्बन फाइबर कंपोजिट का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हुआ है. इससे विमान का वजन कम रखने और ईंधन दक्षता बढ़ाने में मदद मिलती है. लेकिन शी जिनपिंग की राष्ट्रपति स्तर की विदेश यात्राओं में Boeing 747-8 का इस्तेमाल प्रमुख रूप से देखा गया है. 747-8 में चार इंजन हैं, जिससे लंबी दूरी की उड़ानों में अतिरिक्त इंजन रिडंडेंसी मिलती है.

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राष्ट्रपति के विमान में सुरक्षा कितनी मजबूत?
ऐसे विमानों की सबसे अहम खासियत उनकी सुरक्षा और संचार व्यवस्था होती है. शी जिनपिंग के विमान में भी बेहद सुरक्षित संचार प्रणाली होने की बात सामने आती रही है. एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के जरिए राष्ट्रपति जमीन पर मौजूद सरकारी और सैन्य अधिकारियों से सुरक्षित संपर्क कर सकते हैं. सैटेलाइट कम्युनिकेशन के जरिए लंबी दूरी पर भी संपर्क बनाए रखने की क्षमता होती है. विमान में खतरे का पता लगाने वाले सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा व्यवस्था भी बताई जाती है. मिसाइल डिफेंस और जैमिंग जैसी क्षमताओं को लेकर भी रिपोर्टें सामने आती रही हैं. इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स यानी EMP से इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की सुरक्षा के लिए विशेष शील्डिंग का भी जिक्र किया जाता है. उड़ान से पहले विमान की सुरक्षा जांच बेहद सावधानी से की जाती है. क्रू और स्टाफ का चयन भी सख्त प्रक्रिया के तहत किया जाता है. यही वजह है कि इस तरह का विमान सिर्फ राष्ट्रपति को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का साधन नहीं रहता. इसे जरूरत पड़ने पर मोबाइल कमांड सेंटर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है.
 

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Air Force One से कितनी अलग है चीन की व्यवस्था?
अमेरिकी राष्ट्रपति का Air Force One Boeing 747-200B पर आधारित VC-25A विमान है. अमेरिका नए Boeing 747-8 आधारित VC-25B विमानों को भी राष्ट्रपति के लिए तैयार कर रहा है. Air Force One में करीब 4,000 वर्ग फीट का स्पेस है. इसमें राष्ट्रपति का कार्यालय, कॉन्फ्रेंस रूम, मेडिकल सुविधा और मीडिया के लिए अलग जगह होती है. इस विमान की खास क्षमताओं में हवा में ही ईंधन भरने की क्षमता भी शामिल है. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, मिसाइल डिफेंस और EMP से सुरक्षा जैसी उन्नत व्यवस्थाएं हैं. विमान की संचार प्रणाली को भी बेहद सुरक्षित बनाया गया है. चीन का राष्ट्रपति विमान भी Boeing 747 परिवार से जुड़ा है, लेकिन इसका इस्तेमाल अमेरिकी Air Force One की तरह स्थायी रूप से समर्पित सैन्य विमान के रूप में नहीं होता. चीन का मॉडल ज्यादा लचीला है और विमान बाहर से एक सामान्य एयरलाइन विमान जैसा दिखाई देता है.

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पुतिन के विमान से भी है बड़ा अंतर
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए Ilyushin IL-96-300PU विमान का इस्तेमाल किया जाता है. इसे कई बार "Flying Kremlin" भी कहा जाता है. यह पूरी तरह रूसी तकनीक पर आधारित विमान है. इसकी रेंज करीब 11,000 से 13,000 किलोमीटर के बीच बताई जाती है. इसमें सुरक्षित संचार, डिफेंसिव काउंटरमेजर और कमांड सेंटर जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. इसमें चार इंजन हैं और राष्ट्रपति के लिए निजी तथा लक्जरी सुविधाएं भी मौजूद हैं. रूस की खासियत यह है कि वह राष्ट्रपति विमान के लिए घरेलू तकनीक पर ज्यादा निर्भर करता है.
 

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भारत का Air India One कहां खड़ा होता है?
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं के लिए Boeing 777-300ER विमानों का इस्तेमाल किया जाता है. इन्हें Air India One कहा जाता है और इनका संचालन भारतीय वायुसेना करती है. भारत के पास ऐसे दो विमान हैं. इनमें वीवीआईपी सूट, बैठक कक्ष, सुरक्षित संचार और सुरक्षा से जुड़ी आधुनिक व्यवस्थाएं हैं. Boeing 777-300ER एक ट्विन-इंजन विमान है और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए बनाया गया है. आकार के मामले में यह Boeing 747 से छोटा है, लेकिन लंबी दूरी और आधुनिक तकनीक के लिहाज से काफी सक्षम विमान है. इसमें भारतीय जरूरतों के अनुसार सुरक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है.

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चारों देशों का मॉडल अलग
शी जिनपिंग का विमान सुरक्षा, लंबी दूरी और कमांड क्षमता के लिहाज से बेहद सक्षम है. चीन ने यहां एक ऐसा मॉडल अपनाया है जिसमें एयरलाइन विमान को राष्ट्रपति की जरूरत के मुताबिक तैयार किया जाता है. अमेरिका का Air Force One पूरी तरह समर्पित और बेहद उन्नत राष्ट्रपति विमान व्यवस्था का उदाहरण है. रूस अपने घरेलू विमान और तकनीक पर जोर देता है. वहीं भारत ने Boeing 777-300ER के जरिए सुरक्षा, लंबी दूरी और संचालन क्षमता के बीच संतुलन बनाया है. आखिरकार राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का विमान सिर्फ यात्रा का साधन नहीं होता. इसमें देश की सुरक्षा व्यवस्था, संचार क्षमता और रणनीतिक जरूरतें भी जुड़ी होती हैं. यही वजह है कि दुनिया के बड़े नेताओं के विमान भी उनकी राष्ट्रीय ताकत और तकनीकी क्षमता की तस्वीर पेश करते हैं.