ग्वालियर हादसा: खौफनाक मंजर के बीच देवदूत बना मेडिकल छात्र, तड़पते घायलों को दिया CPR और फर्स्ट एड
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास धान से लदा ट्रक अनियंत्रित होकर श्रद्धालुओं पर पलट गया. हादसे में 16की मौत और 26 घायल हुए. इस त्रासदी के बीच एमबीबीएस छात्र रामनरेश कुशवाहा और उनके दोस्तों ने घायलों को फर्स्ट एड और सीपीआर देकर कई जानें बचाईं
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18 अक्टूबर की रात ग्वालियर के लिए कभी न भूलने वाला दर्द दे गई. शीतला माता मंदिर के पास धान की बोरियों से लदा एक बेकाबू ट्रक दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं पर कहर बनकर टूट पड़ा. इस भीषण हादसे में 16 लोगों की जान चली गई, जबकि दो पुलिसकर्मियों समेत 26 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. लेकिन इस मौत के तांडव और चीख-पुकार के बीच एक एमबीबीएस छात्र की बहादुरी और सूझबूझ ने कई जिंदगी बचाने का काम किया.
दर्शन करने पहुंचे थे, अचानक सुनाई दी तेज आवाज
शनिवार देर रात करीब 1:20 से 2:00 बजे के बीच, गजरा राजा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सेकंड ईयर के छात्र रामनरेश कुशवाहा अपने 4-5 दोस्तों के साथ शीतला माता मंदिर दर्शन करने पहुंचे थे. वे मंदिर पहुंचने ही वाले थे कि अचानक एक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी. जब वे तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े, तो सामने का मंजर दिल दहला देने वाला था. धान की बोरियों से लदा भारी-भरकम ट्रक श्रद्धालुओं की भीड़ को रौंदते हुए पलट चुका था और एंट्री गेट के पास रुक गया था.
चारों तरफ चीख-पुकार, ट्रक के नीचे दबे थे लोग
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई. कई लोग धान की भारी बोरियों और ट्रक के पहियों के नीचे दबे हुए तड़प रहे थे. कोई अपनों को ढूंढ रहा था तो कोई मदद की गुहार लगा रहा था. स्थिति यह थी कि भारी वजन के कारण नीचे दबे लोगों को तुरंत बाहर निकालना असंभव सा लग रहा था.
'मुझे नहीं निकाल सकते तो मार दो...'
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्रक के नीचे बुरी तरह फंसा एक शख्स असहनीय दर्द से तड़प रहा था. ट्रक को हटाने के लिए हाइड्रा मशीन का इंतजार किया जा रहा था. दर्द से बेहाल होकर उस व्यक्ति ने रोते हुए कहा, "अगर मुझे बाहर नहीं निकाल सकते तो मुझे मार दो.
उस शख्स की यह बात सुनकर रामनरेश सन्न रह गए. उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति के पास पहुंचकर उसे ढांढस बंधाया, हिम्मत दी और वहीं उसे दर्द कम करने का प्राथमिक उपचार देना शुरू किया.
एंबुलेंस के फर्स्ट एड बॉक्स से दी राहत, सीपीआर देकर बचाई सांसें
एक मेडिकल छात्र होने के नाते रामनरेश ने बिना वक्त गंवाए अपनी जिम्मेदारी संभाली. मौके पर पहले से मौजूद एंबुलेंस से उन्होंने फर्स्ट एड बॉक्स निकाला और घायलों की मरहम-पट्टी शुरू कर दी. जिन लोगों की सांसें उखड़ रही थीं, उन्हें तुरंत सीपीआर (CPR) और जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन सपोर्ट दिया. जब तक राहत और बचाव दल व हाइड्रा मशीन मौके पर नहीं पहुंची, रामनरेश और उनके दोस्त बिना रुके घायलों की जान बचाने में जुटे रहे.
बैरियर तोड़कर कैसे पहुंचा ट्रक? जांच शुरू
हादसे के बाद ग्वालियर कलेक्टर ने बताया कि नवरात्रि के मद्देनजर रास्ते पर पुलिस चेकपॉइंट और बैरियर लगाए गए थे. ऐसे में बेकाबू ट्रक बैरिकेड तोड़कर मंदिर तक कैसे पहुंचा, इसकी गंभीरता से जांच की जाएगी. इसके अलावा, आरटीओ (RTO) की टीम को ट्रक की तकनीकी जांच के निर्देश दिए गए हैं ताकि यह पता चल सके कि वाहन में कोई खराबी थी या ट्रक बाईं ओर मुड़ते वक्त कैसे अनियंत्रित हुआ.
इंसानियत की मिसाल बना मेडिकल छात्र
शीतला माता मंदिर के पास हुए इस दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दिया है. प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सड़क सुरक्षा पर कई सवाल उठ रहे हैं. लेकिन त्रासदी के इस काले दौर में रामनरेश कुशवाहा और उनके साथियों की त्वरित कार्रवाई, संवेदनशीलता और हिम्मत ने यह साबित कर दिया कि सही समय पर दिखाई गई इंसानियत किसी के लिए जिंदगी की नई किरण बन सकती है.
