15 मौतों के बाद पूरे ग्वालियर में मातम, घायलों से मिलने आ रहें Scindia के लिए प्रशासन ने बिछा दिया Green carpet
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत के बाद ट्रॉमा सेंटर में सफाई, मरम्मत और ग्रीन कार्पेट की तैयारियों पर सवाल उठे. घायलों के इलाज में देरी के आरोपों के बीच प्रशासनिक जवाबदेही पर चर्चा.
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मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है. हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत की खबर के बीच कई घायल अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं. एक तरफ परिजन अपनों को खोने के गम में डूबे हैं, तो दूसरी तरफ घायलों के इलाज और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इसी बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने की सूचना के बाद अस्पताल परिसर में सफाई और मरम्मत की गतिविधियां तेज होने का मामला चर्चा में है.
सिंधिया के दौरे की सूचना और ग्रीन कार्पेट की तैयारी
जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अस्पताल पहुंचने की सूचना मिलते ही परिसर में साफ-सफाई तेज कर दी गई. झाड़ू लगाई जाने लगी और ग्रीन कार्पेट बिछाने की तैयारी भी शुरू हो गई. इतना ही नहीं, परिसर में टूटी टाइल्स और गड्ढों को सीमेंट-रेत के मसाले से दुरुस्त करने की कवायद भी नजर आई. इन तैयारियों ने व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस अस्पताल में हादसे के घायल भर्ती हैं और उनके परिजन इलाज की स्थिति जानने के लिए परेशान हैं, वहां वीआईपी दौरे से पहले परिसर को व्यवस्थित करने की तेजी चर्चा का विषय बन गई है. सवाल यह है कि अस्पताल परिसर की बदहाली को दूर करने के लिए ऐसी सक्रियता पहले क्यों नहीं दिखाई दी ? क्या सफाई और मरम्मत की यह कवायद सामान्य व्यवस्था का हिस्सा थी या VIP दौरे को ध्यान में रखकर इसे तेज किया गया ? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए.
घायलों का इलाज या VIP स्वागत, प्राथमिकता पर सवाल
हादसे के बाद सबसे अहम जरूरत घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने और उनके परिजनों को सही जानकारी देने की है. ऐसे में ग्रीन कार्पेट बिछाने और परिसर को चमकाने की तैयारियों ने प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर बहस छेड़ दी है. हालांकि, परिसर में सफाई और मरम्मत की गतिविधियां अपने आप में किसी लापरवाही का प्रमाण नहीं हैं, लेकिन उनका समय जरूर सवाल खड़े करता है. जब अस्पताल में गंभीर रूप से घायल मरीजों का इलाज चल रहा हो, तब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि संसाधनों और कर्मचारियों का पूरा ध्यान मरीजों की देखभाल पर बना रहे. आम दिनों में अस्पताल की साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर कितनी निगरानी रहती है, यह भी इस पूरे मामले का अहम सवाल है. वीआईपी के दौरे पर व्यवस्थाएं तुरंत दुरुस्त होती दिखें, लेकिन आम मरीजों को उन्हीं सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़े, तो ऐसी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है.
परिजनों ने उठाए इलाज में देरी के आरोप
हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में कथित देरी को लेकर भी सवाल उठाए हैं. एक परिजन के मुताबिक, यदि हादसा रात करीब दो बजे हुआ था, तो घायल को सुबह चार बजे अस्पताल क्यों लाया गया? परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज मिल जाता, तो शायद उनके बच्चे की जान बच सकती थी.कुछ परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मरीज के इलाज की जानकारी दी जाती रही, जबकि बाद में उसकी मौत की खबर मिली। उनके मुताबिक, सच्चाई सामने आने तक काफी देर हो चुकी थी। अधिकारियों द्वारा कागजात पर हस्ताक्षर कराने को लेकर भी परिजनों ने नाराजगी जताई है. इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और अस्पताल के रिकॉर्ड की पड़ताल जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घायलों को कब अस्पताल पहुंचाया गया, उपचार कब शुरू हुआ और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई.
मुख्यमंत्री ने दिए कार्रवाई और जांच के निर्देश
घटना के बाद मुख्यमंत्री ने लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीएसपी को तत्काल हटाने और तीन थाना प्रभारियों, एक यातायात निरीक्षक, एक प्रधान आरक्षक तथा तीन आरक्षकों को निलंबित करने के निर्देश दिए। साथ ही हादसे की विस्तृत जांच कर जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया. मुख्यमंत्री ने जनसुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की बात भी कही है.
ट्रक ने श्रद्धालुओं को रौंदा, 15 लोगों की मौत
जानकारी के अनुसार, डबरा की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक चीनोर से शीतला माता मंदिर की ओर उतरने वाली ढलान पर खड़ा था. आशंका जताई गई कि प्रेशर रिलीज होने के कारण ट्रक अचानक चल पड़ा और ढलान पर बेकाबू होकर श्रद्धालुओं को रौंदता हुआ मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार तक जा पहुंचा. हादसे के समय कई परिवार मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे. एक महिला ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ मंदिर के अंदर चली गई थी, जबकि उसका भाई गेट के पास खड़ा था. इसी दौरान ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचल दिया। कुछ ही पलों में मौके पर चीख-पुकार मच गई और कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं.
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