सीएम मोहन के सामने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने की ACS संजय दुबे की तारीफ, अंग्रेजी में बोले- 'रिटायरमेंट के बाद बन सकते हैं अच्छे नेता'

इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ACS संजय दुबे के भाषण की जमकर तारीफ की. जानें क्यों चर्चा में आए थे संजय दुबे और सरकारी खरीद में गड़बड़ी पर क्या एक्शन हुआ.

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Kailash Vijayvargiya
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इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में हाल ही में आयोजित 'अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' के दौरान एक दिलचस्प वाकया देखने को मिला. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में शहरी विकास को गति देने के लिए 6 महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. इस कार्यक्रम के दौरान मंच से नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे की जमकर तारीफ हुई, जो इन दिनों अपने एक वायरल वीडियो को लेकर खासे चर्चा में हैं.

कैलाश विजयवर्गीय ने अंग्रेजी में की तारीफ 

कार्यक्रम के दौरान मंच पर बोलते हुए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एसीएस संजय दुबे के भाषण से प्रभावित होकर कहा कि

"मेरे ही ACS संजय दुबे जी, जिन्होंने इतना अच्छा भाषण दिया है कि मेरा भार हल्का कर दिया. And you may be a very good leader after retirement, because your speech was so excellent with confidence! I appreciate your speech." 

कॉन्क्लेव में इन बड़े प्रोजेक्ट्स पर बनी सहमति 

इस कॉन्क्लेव में प्रदेश के शहरी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए . इंदौर की जल प्रदाय और सीवरेज परियोजना के लिए बैंक ऑफ इंडिया के साथ समझौता हुआ. जबलपुर और ग्वालियर को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया. जबकि उज्जैन के मंदिर सर्किट को आधुनिक बनाने, रीवा की जल प्रदाय योजना और उपचारित अपशिष्ट जल (Treated Wastewater) के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी.

क्यों चर्चा में आए थे ACS संजय दुबे? 

नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे कुछ समय पहले अपने एक सख्त तेवर वाले वीडियो की वजह से सुर्खियों में आए थे. यह वीडियो अप्रैल माह में भोपाल के भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा शहरी विकास प्रशिक्षण संस्थान में हुई एक विभागीय बैठक का था.

  1. कचरा वाहनों की खरीद में मनमानी: बैठक में दुबे ने खुलासा किया था कि एक निकाय ने दो लाख रुपए में कचरा वाहन खरीदा, जबकि दूसरे निकाय ने इसी तरह के वाहन पर छह लाख रुपए खर्च कर दिए. यही नहीं, कुछ निकायों ने डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए तक के कचरा वाहन खरीद डाले, जबकि वहां पर्याप्त वाहन चलाने लायक वार्ड भी नहीं थे.
  2. GeM पोर्टल से करोड़ों की फिजूलखर्ची: बैठक में दिखाए गए आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने तीन साल में GeM पोर्टल के जरिए करीब 1,134 करोड़ रुपए खर्च किए. यदि सही औसत दरों पर खरीदारी की जाती, तो सरकार के करीब 250 करोड़ रुपए बचाए जा सकते थे.

वीडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई 

मामला सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे, जिसके बाद कड़ा एक्शन लिया गया:

  • कार्रवाई का ब्योरा: 8 संभागों के 62 मामलों में 146 अधिकारी-कर्मचारियों पर गाज गिरी.
  • सजा: 7 कर्मचारियों को सेवा से हटाया गया, 76 की वेतनवृद्धि रोकी गई, और 17 की पेंशन से कटौती की गई.
  • वसूली व जांच: सरकारी नुकसान की भरपाई के लिए 38 लोगों से वसूली की गई, 5 को चेतावनी दी गई और 22 लोग जांच में दोषमुक्त पाए गए.

फिलहाल, इस प्रशासनिक और खरीद गड़बड़ी के मामले को लोकायुक्त ने भी अपनी जांच के दायरे में ले लिया है, जिससे महकमे में हड़कंप मचा हुआ है.