क्यों शहीद टीआई दिलीप पुरी के पार्थिव शरीर को दफनाया गया, क्या है इसके पीछे की वजह ?
देवास में शहीद हुए खातेगांव TI दिलीप पुरी का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव बारमंडल (धार) पहुंचा. गोस्वामी समाज की परंपरा से दी गई अंतिम विदाई. जानिए केस से जुड़ी ताजा अपडेट्स.
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धार / देवास: माटी का एक और लाल फर्ज की बलिबेदी पर कुर्बान हो गया. मध्य प्रदेश के देवास जिले में अवैध शराब के तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान शहीद हुए खातेगांव थाना प्रभारी (TI) दिलीप पुरी का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव बारमंडल (धार) पहुंचा, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा फट पड़ा. मां की ममता, पिता का बुढ़ापा, पत्नी का सुहाग और बच्चों के सिर से साया छिनने के इस गम ने पूरे गांव को आंसुओं में डुबो दिया.
"दिलीप, उठो ना..." गूंजती सिसकियां और पसरा मातम
जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा, तो माहौल बेहद गमगीन हो गया. अपनों के आंसू और हवाओं में गूंजती सिसकियां हर किसी का दिल चीर रही थीं. हर कोई बस यही कह रहा था— "दिलीप, उठो ना... देखो तुम्हारे अपने तुम्हें पुकार रहे हैं." लेकिन वे खामोश थे. अंतिम विदाई के दौरान पूरे इलाके के लोगों के साथ-साथ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की भारी फौज मौजूद रही. शहीद दिलीप पुरी के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और राजकीय सम्मान के साथ नम आंखों से विदाई दी गई.
क्यों दफनाया गया टीआई दिलीप पुरी का पार्थिव शरीर ?
अंतिम विदाई की इन गमगीन और हृदयविदारक पलों के बीच, उनके अंतिम संस्कार की विधि ने सभी को भावुक कर दिया. आपको बता दें कि शहीद दिलीप पुरी गोस्वामी समाज से ताल्लुक रखते थे और इस समाज की प्राचीन धार्मिक परंपरा के अनुसार, दिवंगत आत्मा की शांति के लिए शव को पूरे विधि-विधान, धार्मिक मंत्रोच्चार और वैदिक अनुष्ठानों के साथ जमीन में दफनाया जाता है. इसी सनातन और समाज की पारंपरिक पद्धति के तहत, नम आंखों और भारी दिलों के साथ उन्हें भू-समाधि दी गई.
क्या था पूरा मामला?
रविवार और सोमवार की दरमियानी रात इंदौर-बैतूल हाईवे पर अवैध शराब से भरा एक आयशर ट्रक बेखौफ गुजर रहा था. खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को जैसे ही इसकी भनक लगी, वे अपनी टीम के साथ फौरन मौके पर पहुंच गए.
उन्होंने तस्करों के वाहन को रोकने और ड्राइवर को नीचे उतरने का आदेश दिया. लेकिन खाकी के खौफ से डरे अपराधियों ने कानून का सम्मान करने के बजाय मौत का रास्ता चुना. ड्राइवर ने बेरहमी से ट्रक को डिवाइडर पर चढ़ा दिया और ड्यूटी निभा रहे उस जांबाज अधिकारी के ऊपर से गुजार कर फरार हो गया. अस्पताल में दो घंटे तक डॉक्टरों ने सीपीआर देकर सांसें वापस लाने की पूरी जंघोज़हद की, लेकिन वे जंग हार गए.
परिवार का बिखर गया संबल
दिलीप पुरी के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. उनकी बेटी इंदौर में डॉक्टर बनने की पढ़ाई कर रही है, छोटा भाई प्राइवेट नौकरी संभालता है, और बुजुर्ग पिता खेतों में मेहनत करते हैं. इस पूरे परिवार का मुख्य संबल हमेशा के लिए छिन गया है.
प्रशासन और सरकार का एक्शन: ट्रक मालिक गिरफ्तार
इस दर्दनाक हादसे के बाद सरकार ने परिवार के आंसुओं को पोछने और न्याय दिलाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं:
- आर्थिक सहायता और अनुकंपा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और उनकी पत्नी को सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने का ऐलान किया है.
- SIT जांच और गिरफ्तारियां: घटना की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया जा चुका है. पुलिस की कार्रवाई तेज करते हुए आयशर ट्रक के मालिक केरम सिंह को गिरफ्त में ले लिया गया है.
- मुख्य आरोपी की तलाश: मुख्य आरोपी की तलाश में पुलिस की टीमें आलीराजपुर से लेकर गुजरात तक खाक छान रही हैं. पुलिस का दावा है कि आरोपियों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.
खाकी की मर्यादा और कर्तव्य के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले अमर शहीद टीआई दिलीप पुरी का यह बलिदान मध्य प्रदेश पुलिस और पूरा देश कभी नहीं भूलेगा.
