कौन हैं IAS अफसर संजय दुबे ? जिनके खुलासे ने एमपी की सियासत में मचाया हड़कंप
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ IAS संजय दुबे का वीडियो वायरल, जिसमें उन्होंने नगरीय निकायों में कचरा गाड़ियों, डस्टबिन और बल्ब खरीदी में करोड़ों के भ्रष्टाचार का खुलासा किया है.
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भोपाल: क्या प्रशासनिक व्यवस्था के शीर्ष पर बैठा कोई बड़ा अधिकारी सिस्टम के भीतर पैर पसार चुके भ्रष्टाचार पर सीधे हमला बोल सकता है? मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों केवल एक ही नाम की चर्चा है संजय दुबे. 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में उन्होंने नगरीय निकायों में चल रही करोड़ों रुपये की कथित धांधली और भ्रष्टाचार का ऐसा कच्चा-चिट्ठा खोला है, जिसने पूरी व्यवस्था की नींव हिला दी है.
कचरा गाड़ियों से लेकर डस्टबिन और बल्बों में बड़ा खेल
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने अपने कड़क अंदाज में उजागर किया कि कैसे नगरीय निकायों में जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा था. उन्होंने खुलासा किया कि:
- कचरा गाड़ियां: तय और वाजिब दरों से कई गुना अधिक दामों पर खरीदी गईं.
- फिनायल और बल्ब टेंडर: फिनायल और लाइट/बल्बों की खरीदी में बड़े पैमाने पर टेंडर का खेल खेला गया.
संजय दुबे के इस सख्त और बेबाक रुख से न केवल भ्रष्ट तंत्र में हड़कंप मचा है, बल्कि मध्य प्रदेश के राजनीतिक हलकों में भी खलबली मच गई है. हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि आखिर कौन हैं यह अफसर, जो दबाव के बावजूद भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार करने से नहीं हिचकिचाते.
IIT दिल्ली, LSE और हार्वर्ड... जानिए कौन हैं IAS संजय दुबे?
28 सितंबर 1968 को जन्मे संजय दुबे केवल एक कड़क प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि देश के सबसे पढ़े-लिखे और मेधावी अधिकारियों में गिने जाते हैं:
- IIT दिल्ली: मैकेनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech और M.Tech.
- लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE): मास्टर्स डिग्री.
- हार्वर्ड यूनिवर्सिटी: पीएचडी (PhD).
1993 में प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उनके पास न सिर्फ तकनीकी दक्षता थी, बल्कि वैश्विक स्तर की प्रशासनिक सोच भी थी. वे ऊर्जा, नगरीय प्रशासन, सामान्य प्रशासन और गृह विभाग जैसे बेहद संवेदनशील मंत्रालयों में सचिव स्तर के पदों पर काम कर चुके हैं.
जनहित और इनोवेशन के लिए पहचाने जाते हैं संजय दुबे
संजय दुबे ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे ऐतिहासिक नवाचार किए हैं, जिन्होंने प्रशासनिक कार्यशैली की दिशा बदल दी:
- देश का पहला ग्रीन कॉरिडोर: इंदौर के संभागायुक्त रहते हुए उन्होंने गंभीर मरीजों और अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) के लिए 'ग्रीन कॉरिडोर' की शुरुआत की. इस व्यवस्था से अब तक सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा चुकी है.
- आहार अभियान: शादी और आयोजनों में बचने वाले भोजन को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए इस अभियान की शुरुआत की.
- विद्या धन योजना: गरीब व मेधावी बच्चों की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए इस योजना की नींव रखी.
- MP-CERT की स्थापना: डिजिटल दौर में साइबर खतरों से निपटने के लिए मध्य प्रदेश कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम की शुरुआत की, जिसने राज्य को साइबर सुरक्षा में अग्रणी बनाया.
उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें प्रधानमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड, राष्ट्रपति पुरस्कार और मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. राजनीतिक गलियारों में आमतौर पर अधिकारी बयानों से बचते हैं, लेकिन संजय दुबे के इस साहसिक कदम ने यह साबित कर दिया है कि निष्ठा और ईमानदारी के साथ सिस्टम को सुधारने की नीयत हो तो आवाज उठाना नामुमकिन नहीं है.
