एमपी अजब है, 9 करोड़ की लागत से बना पुल लेकिन पुल पर पहुंचने का रास्ता नहीं

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में 308 मीटर का 8.86 करोड़ की लागत से बना दूधी नदी का पुल 3 साल से वीरान है. एप्रोच रोड न होने से 40-50 गांव के लोग परेशान हैं. जानिए क्या है पूरी लापरवाही की कहानी.

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Narmadapuram Dudhi River Bridge
Narmadapuram Dudhi river bridge
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नर्मदापुरम/ नरसिंहपुर: सरकारी विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा अंतर हो सकता है, इसकी एक बानगी मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में साफ देखी जा सकती है. जिले के बनखेड़ी क्षेत्र के उमरोध गांव में दूधी नदी पर करीब 8 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से 308 मीटर लंबा पुल बनकर पूरी तरह तैयार है, लेकिन विडंबना यह है कि इसे मुख्य सड़क से जोड़ने वाली करीब एक किलोमीटर लंबी 'एप्रोच रोड' (Approach Road) तीन साल बीत जाने के बाद भी अधूरी पड़ी है. सवाल यह उठता है कि जब जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से करोड़ों रुपये खर्च करके पुल बना दिया गया, तो लोगों को उस पर चलने के लिए रास्ता क्यों नहीं दिया गया?

किनके बीच बेहतर कनेक्टिविटी का था प्लान? 

नर्मदापुरम और नरसिंहपुर जिले के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए दूधी नदी पर इस पुल का निर्माण किया गया था. उम्मीद जताई जा रही थी कि पुल के बनने से आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों का आवागमन सुगम हो जाएगा. किसानों को अपनी उपज लाने-ले जाने में आसानी होगी और आपातकालीन स्थिति में लोग स्वास्थ्य सेवाओं तक कम समय में पहुंच सकेंगे.

बरसात में कीचड़ और बाकी दिनों में जानलेवा गड्ढे 

हकीकत यह है कि पुल तैयार होने के बावजूद दोनों तरफ एप्रोच रोड न होने के कारण ग्रामीण आज भी बेहाल हैं. बरसात के दिनों में यह कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है, जबकि सूखे के दिनों में गहरे गड्ढे लोगों की मुश्किलें बढ़ा देते हैं. नर्मदापुरम और नरसिंहपुर के करीब 40 से 50 गांवों को इस प्रोजेक्ट से फायदा मिलना था, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती ने सब पर पानी फेर दिया.

विभागों की उदासीनता और अधिकारियों का बयान 

आखिर इस देरी की वजह क्या है? क्या विभागों के बीच तालमेल की कमी है या प्रशासनिक मंजूरी का अड़ंगा? इस पूरे मामले पर सेतु निर्माण विभाग के एसडीओ केशव रैदास का कहना है कि,

इस मामले की जानकारी शासन को भेजी जा चुकी है. शासन स्तर पर फैसला लिया जाएगा कि पुल की एप्रोच रोड का निर्माण किस विभाग से कराया जाना है."

यह बयान अपने आप में कई बड़े सवाल खड़े करता है. जब पुल तीन साल से बनकर खड़ा है, तब तक यह तय क्यों नहीं हो सका कि सड़क कौन बनाएगा? क्या सरकारी परियोजनाओं में तालमेल बिठाने के लिए भी वर्षों का इंतजार करना पड़ेगा?

फिलहाल दूधी नदी पर शानदार पुल खड़ा है, लेकिन उस तक पहुंचने का रास्ता नदारद है. देखना यह होगा कि शासन और संबंधित विभाग कब नींद से जागते हैं और कब इस एप्रोच रोड का निर्माण शुरू कर ग्रामीणों को राहत देते हैं.