लाखों की नौकरी छोड़ी, इंजीनियर की कुर्सी त्यागी! जानें कैसे राहुल साहू बने शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद के अनन्य शिष्य
Rahul Sahu disciple story: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा निवासी राहुल साहू की कहानी इन दिनों चर्चा में है, जिन्होंने लाखों की नौकरी और इंजीनियर की कुर्सी छोड़कर धर्म और सेवा का रास्ता चुना. कोरोना काल में जीवन के प्रति बदले नजरिए के बाद राहुल की मुलाकात स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से हुई और वे उनके अनन्य शिष्य बन गए. जानिए उनकी पूरी कहानी.

शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद की गौ प्रतिष्ठा यात्रा इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है. बनारस से शुरू हुई यह यात्रा जैसे-जैसे लखनऊ की ओर बढ़ रही है, इससे कई ऐसे युवा जुड़ रहे हैं जिन्होंने धर्म और सेवा के लिए अपने चमकते करियर को पीछे छोड़ दिया है. इन्हीं में से एक हैं मध्य प्रदेश के रहने वाले राहुल साहू, जो कभी एक सपोर्ट इंजीनियर के तौर पर कलेक्ट्रेट में तैनात थे, लेकिन आज वे शंकराचार्य के शिष्य के रूप में उनके काफिले का हिस्सा हैं.
कोरोना काल में बदला जीवन का नजरिया
राहुल साहू मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा तहसील के रहने वाले हैं. उन्होंने पॉलिटेक्निक की पढ़ाई की और करीब डेढ़ साल तक बालाघाट कलेक्ट्रेट में इंजीनियर के पद पर नौकरी की. राहुल बताते हैं कि 2020-21 के कोरोना काल के दौरान उन्होंने महसूस किया कि बड़े-बड़े पैसे वाले लोग भी बेबस थे. उन्हें अहसास हुआ कि भौतिक सुख-सुविधाएं और पैसा इंसान को स्थायी शांति नहीं दे सकते. इसी दौरान उनकी मुलाकात शंकराचार्य से हुई और उनका मन पूरी तरह ही बदल गया.
नौकरी छोड़ी, पर गृहस्थ धर्म नहीं
राहुल की कहानी में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब उनके माता-पिता उनके दीक्षा लेने के फैसले से घबरा गए और रोने लगे. राहुल ब्रह्मचारी बनना चाहते थे, लेकिन शंकराचार्य के मार्गदर्शन और माता-पिता की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्होंने गृहस्थ जीवन को अपनाया. राहुल का कहना है कि महाराज जी का मानना है कि आप घर पर रहकर भी भगवान की भक्ति और गुरु की सेवा कर सकते हैं. आज राहुल विवाहित हैं और अपनी पत्नी व परिवार के साथ खुश रहते हुए महाराज जी के गौ माता राष्ट्रमाता मिशन के लिए काम कर रहे हैं.
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शंकराचार्य पर लगे आरोपों पर क्या बोले राहुल?
पिछले दिनों शंकराचार्य पर लगे विभिन्न आरोपों और विवादों पर राहुल का कहना है कि उन्हें अपने गुरु पर पूर्ण विश्वास और श्रद्धा है. उन्होंने विरोधियों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया और कहा कि महाराज जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और धर्म के लिए समर्पित कर दिया है.
भविष्य का लक्ष्य: 'रामा गौधाम' की स्थापना
राहुल अब अपनी तहसील अमरवाड़ा में 'रामा गौधाम' बनाने के मिशन में जुटे हैं. उनका लक्ष्य हर विधानसभा क्षेत्र में गौ सेवा केंद्र स्थापित करना है. वर्तमान में वह लखनऊ में होने वाली बड़ी सभा की तैयारियों में व्यस्त हैं और यात्रा के दौरान लोगों को पत्रक बांटकर जागरूक कर रहे हैं.










