महाकाल के नाम पर 'बड़ा खेल': उज्जैन सम्मेलन में इनोवा की जगह दौड़े ई-रिक्शा और मोपेड, लाखों की धांधली !

उज्जैन में आयोजित महाकाल कॉन्फ्रेंस में लाखों रुपये के वाहन घोटाले का खुलासा हुआ है. इनोवा और ट्रैवलर के बिलों में ई-रिक्शा, मोपेड, बाइक और ट्रक के नंबर दर्ज कर 57 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया. पढ़िए एमपी तक का बड़ा खुलासा और सिस्टम पर खड़े सवाल.

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उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में इसी वर्ष अप्रैल 2026 में भारत की प्राचीन कालगणना, खगोलीय परंपरा और शहर को विश्व की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में स्थापित करने के लिए एक भव्य 'महाकाल कॉन्फ्रेंस' का आयोजन किया गया था. इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश से जाने-माने वैज्ञानिक, खगोलविद और शिक्षाविद पहुंचे थे. लेकिन अब इस आयोजन से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मध्य प्रदेश के सरकारी तंत्र और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सम्मेलन में आए मेहमानों की आवाजाही के लिए किराए पर ली गई गाड़ियों के बिलों में भारी फर्जीवाड़ा सामने आया है. 'एमपी तक' (MP Tak) की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि लग्जरी गाड़ियों (इनोवा और टेम्पो ट्रैवलर) के बिलों में ई-रिक्शा, मोपेड, बाइक और यहां तक कि ट्रक तक के रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज कर 57 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया.

ई-रिक्शा बना इनोवा, मोपेड बन गई 26-सीटर ट्रैवलर 

भोपाल की 'अदिति टूर एंड ट्रैवल्स' द्वारा दिए गए बिलों की पड़ताल करने पर चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आई हैं:

  • ई-रिक्शा बना इनोवा: बिल नंबर 3061 में इनोवा के नाम पर MP13-ZP4512 नंबर की गाड़ी बुक दिखाई गई. जब उज्जैन आरटीओ (RTO) के रिकॉर्ड से मिलान किया गया तो यह नंबर एक ई-रिक्शा का निकला. ई-रिक्शा चालक रितेश श्रीवास्तव ने खुद माना कि वह इसे सवारी के लिए चलाता है और उसने कभी किसी सरकारी काम के लिए गाड़ी नहीं दी.
  • मोपेड बनी ट्रैवलर: बिल नंबर 3054 में 29,242 रुपये के भुगतान के साथ UP65-ED1523 नंबर की गाड़ी को ट्रैवलर बताया गया, जिसने एक दिन में 186 किमी का सफर तय किया. हकीकत में यह उत्तर प्रदेश में रजिस्टर्ड एक मोपेड (स्कूटी) का नंबर है.
  • ट्रक और बाइक के नंबर पर बिल: 26-सीटर ट्रैवलर के नाम पर दर्ज नंबर DD01R9228 RTO रिकॉर्ड में ट्रक निकला, जबकि इनोवा क्रिस्टा के नाम पर दिखाई गई गाड़ी MP09VC6903 असल में एक मोटरसाइकिल (बाइक) का नंबर है.

मीटर का 'जादू': 1 दिन में तय कर ली 22 हजार किलोमीटर की दूरी! 

गाड़ियों के नंबरों में हेरफेर के अलावा मीटर रीडिंग में भी अजीबोगरीब उछाल देखा गया. एक टेम्पो ट्रैवलर के बिल में 3 अप्रैल को ओपनिंग रीडिंग 39,419 किमी और 4 अप्रैल को क्लोजिंग रीडिंग 39,616 किमी दर्ज थी. लेकिन ठीक अगले दिन, 5 अप्रैल को ओपनिंग रीडिंग सीधे 62,324 किमी पर पहुंच गई. यानी महज 24 घंटे में गाड़ी ने 22,708 किलोमीटर का सफर तय कर लिया! सवाल उठ रहा है कि क्या गाड़ी सड़कों पर चली थी या सिर्फ कागज और मीटर में ही हजारों किलोमीटर का सफर पूरा हो गया?

टूर ट्रैवल्स की सफाई: "मानवीय भूल, ड्राइवरों की गलती" 

इस फर्जीवाड़े पर जब 'अदिति टूर एंड ट्रैवल्स' के मालिक देवेंद्र सक्सेना से बात की गई तो उन्होंने इसे महज एक 'मानवीय भूल' करार दिया. उनका कहना है कि विभाग को भेजे गए सभी बिल सही हैं, बस ड्राइवरों की लापरवाही के कारण नंबर आगे-पीछे दर्ज हो गए, जिससे यह भ्रम पैदा हुआ है.

जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते विभाग

पूरे महाकाल कॉन्फ्रेंस आयोजन पर मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MAPCOST) ने कुल 6 करोड़ 29 लाख रुपये खर्च किए थे. इसमें से:

  1. टेंट, लाइट, साउंड व ब्रांडिंग (सुविधा एंटरप्राइजेज): ₹4.18 करोड़
  2. मेसर्स प्रो. इवेंट: ₹22.12 लाख
  3. वीर भारत न्यास (हैंडलिंग चार्ज): ₹12.82 लाख
  4. कैटरिंग खर्च: ₹1.32 करोड़

गाड़ियों के बिल में गड़बड़ी को लेकर जब राजनीति और मीडिया में हलचल शुरू हुई, तो संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने इसका ठीकरा दूसरे विभाग पर फोड़ते हुए कहा कि यह आयोजन जिस विभाग का था, वही इसके लिए जिम्मेदार है.

वहीं दूसरी ओर, MAPCOST के महानिदेशक (DG) अनिल कोठारी ने सफाई दी कि मैपकास्ट ने केवल कार्यक्रम का आयोजन करवाया था, गाड़ियों की व्यवस्था की जिम्मेदारी संस्कृति विभाग की थी. हालांकि, विवाद बढ़ता देख मैपकास्ट ने मामले की जांच के लिए 4 सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है.

राजनीतिक घमासान: कांग्रेस बोली- "महाकाल के नाम पर लूट" 

मामला उजागर होते ही मध्य प्रदेश की सियासत गरमा गई है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे "महाकाल के नाम पर सीधी लूट" करार दिया है.