Pinaka Rocket: 300 KM रेंज वाला रॉकेट भारत की ताकत कैसे बढ़ाएगा? जानिए DRDO का प्लान
पिनाका रॉकेट की रेंज 300 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना पर चर्चा है. जानिए DRDO के लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट, 120 KM वेरिएंट के परीक्षण और भारतीय सेना की बढ़ती आर्टिलरी क्षमता के बारे में.
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न्यूज़ हाइलाइट्स
पिनाका रॉकेट की रेंज बढ़ाने की तैयारी
पिनाका की ताकत बढ़ाएगी नई तकनीक
DRDO ने फिर किया कमाल
भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता को और मजबूत करने के लिए स्वदेशी पिनाका रॉकेट सिस्टम को लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम बनाने पर काम किया जा रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है. दिसंबर 2025 में इसके 120 किलोमीटर रेंज वाले संस्करण का सफल परीक्षण किया गया था. इसके बाद जुलाई 2026 में भी इस रॉकेट का एक और सफल परीक्षण हुआ.
रिपोर्टों के मुताबिक, पिनाका परिवार की मारक क्षमता को भविष्य में 300 किलोमीटर तक बढ़ाने की संभावना पर भी काम किया जा रहा है. यदि इस क्षमता का विकास और परीक्षण सफल रहता है, तो भारतीय सेना को लंबी दूरी पर लक्ष्य भेदने के लिए एक और स्वदेशी विकल्प मिल सकता है. हालांकि, 300 किलोमीटर रेंज वाले संस्करण की अंतिम तकनीकी विशेषताओं और सेना में शामिल किए जाने की समयसीमा को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी है.
पिनाका रॉकेट सिस्टम क्या है?
पिनाका भारत का स्वदेशी मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है, जिसे DRDO ने विकसित किया है. इसका इस्तेमाल कम समय में बड़ी संख्या में रॉकेट दागकर दुश्मन के निर्धारित क्षेत्र में मौजूद सैन्य ठिकानों और अन्य सामरिक लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है. पिनाका की एक प्रमुख विशेषता इसकी तेज फायरिंग क्षमता है. एक लॉन्चर से 12 रॉकेट लगभग 44 सेकंड में दागे जा सकते हैं. इस क्षमता के कारण यह सिस्टम युद्धक्षेत्र में तेजी से फायरिंग करने और उसके बाद अपनी स्थिति बदलने में उपयोगी साबित होता है. पिनाका के अलग-अलग संस्करणों की रेंज अलग-अलग है. इसके पुराने रॉकेट लगभग 37 किलोमीटर तक मार कर सकते थे, जबकि उन्नत संस्करण की रेंज 45 किलोमीटर तक पहुंची. गाइडेड रॉकेट संस्करणों के जरिए इसकी सटीकता और मारक क्षमता को और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया गया है.
120 किलोमीटर रेंज वाले पिनाका का सफल परीक्षण
DRDO ने 29 दिसंबर 2025 को पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट के 120 किलोमीटर रेंज वाले संस्करण का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया था. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान रॉकेट ने निर्धारित उड़ान गतिविधियों को पूरा किया और लक्ष्य पर सटीक प्रहार किया. इसके बाद 8 जुलाई 2026 को इसी लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का एक और सफल परीक्षण किया गया. इस बार रॉकेट को 60 किलोमीटर की निर्धारित न्यूनतम दूरी पर लक्ष्य भेदने के लिए जांचा गया. इस परीक्षण में भी रॉकेट ने अपनी निर्धारित उड़ान गतिविधियों को पूरा करते हुए लक्ष्य पर सटीक प्रहार किया. इन परीक्षणों की एक अहम बात यह है कि लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट को मौजूदा पिनाका लॉन्चर से दागा गया. इससे एक ही लॉन्चर प्लेटफॉर्म से अलग-अलग रेंज वाले रॉकेट इस्तेमाल करने की संभावनाएं मजबूत होती हैं.
300 किलोमीटर रेंज की योजना क्यों अहम है?
पिनाका की रेंज को 120 किलोमीटर से आगे बढ़ाकर 300 किलोमीटर तक ले जाने का विचार भारतीय सेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस दिशा में सफलता मिलने पर सेना को पारंपरिक रॉकेट आर्टिलरी और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के बीच एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है. लंबी दूरी तक मार करने वाले गाइडेड रॉकेट का संभावित लाभ यह होगा कि सेना अपने निर्धारित लक्ष्यों को ज्यादा दूरी से निशाना बना सकेगी. इससे युद्धक्षेत्र में तैनाती, लॉजिस्टिक्स और फायर सपोर्ट की रणनीति में बदलाव की गुंजाइश पैदा हो सकती है. हालांकि, किसी रॉकेट की वास्तविक उपयोगिता केवल उसकी रेंज पर निर्भर नहीं करती. उसकी सटीकता, विश्वसनीयता, लक्ष्य की पहचान, संचार व्यवस्था, उत्पादन लागत और परिचालन परीक्षण भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं.
पाकिस्तान सीमा के संदर्भ में क्या होगा असर?
भारत की पश्चिमी सीमा के संदर्भ में लंबी दूरी के रॉकेट सिस्टम का सामरिक महत्व हो सकता है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में कई महत्वपूर्ण शहरी और सैन्य क्षेत्र स्थित हैं. ऐसे में अधिक दूरी तक मार करने वाली स्वदेशी आर्टिलरी प्रणाली भारत की संभावित सैन्य क्षमताओं का दायरा बढ़ा सकती है. लेकिन 300 किलोमीटर की प्रस्तावित रेंज को सीधे इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि किसी खास शहर, एयरबेस या सैन्य ठिकाने पर हमला निश्चित रूप से संभव होगा. वास्तविक पहुंच लॉन्चर की तैनाती, रॉकेट के अंतिम डिजाइन, निर्धारित परिचालन सीमाओं और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगी. इसी तरह, लंबी दूरी का रॉकेट विकसित होने से किसी देश की पूरी वायु रक्षा व्यवस्था अप्रभावी हो जाएगी, ऐसा निष्कर्ष निकालना भी सही नहीं होगा. आधुनिक युद्ध में रॉकेट की क्षमता के साथ-साथ निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, वायु रक्षा और जवाबी कार्रवाई की क्षमता भी अहम भूमिका निभाती है.
मिसाइल और रॉकेट आर्टिलरी में क्या अंतर है?
ब्रह्मोस और प्रलय जैसी मिसाइल प्रणालियां अलग-अलग परिचालन जरूरतों के लिए विकसित की गई हैं. वहीं पिनाका मुख्य रूप से रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम है. इनकी लागत, मार्गदर्शन तकनीक, उड़ान प्रोफाइल और इस्तेमाल की रणनीति एक जैसी नहीं होती. लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेट की क्षमता बढ़ने से सेना को अलग-अलग दूरी और परिस्थितियों के लिए हथियारों का बेहतर संयोजन मिल सकता है. इसे एक व्यापक बहुस्तरीय मारक क्षमता के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है, न कि मिसाइलों का सीधा विकल्प.
स्वदेशी रक्षा तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
पिनाका परियोजना DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय रक्षा उद्योग के सहयोग का उदाहरण है. लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट को आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट ने हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी के सहयोग से विकसित किया है. इसमें DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं का भी योगदान रहा है. स्वदेशी रॉकेट प्रणालियों का विकास भारत की रक्षा जरूरतों के अनुरूप तकनीक तैयार करने, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता घटाने में मदद कर सकता है.
पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का विकास भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. 120 किलोमीटर रेंज वाले संस्करण के सफल परीक्षण से इस कार्यक्रम में हुई प्रगति सामने आई है, जबकि 300 किलोमीटर तक मारक क्षमता बढ़ाने की संभावना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है. हालांकि, 300 किलोमीटर रेंज वाले संस्करण की वास्तविक क्षमता, परीक्षण कार्यक्रम और सेना में शामिल किए जाने की स्थिति को आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर ही आंका जाना चाहिए. आने वाले समय में इसके विकास से जुड़े नए परीक्षण यह तय करेंगे कि पिनाका भारत की लंबी दूरी की पारंपरिक मारक क्षमता को किस स्तर तक मजबूत कर सकता है.
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