रुबियो नहीं आएंगे दिल्ली, मुंबई-जामनगर पहुंचेंगे अमेरिकी विदेश मंत्री, राहुल गांधी ने कसा तंज, मस्क-अंबानी विवाद के बीच दौरे पर नजर !
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक उज्बेकिस्तान और भारत के दौरे पर रहेंगे. भारत में वह मुंबई और गुजरात के जामनगर जाएंगे, लेकिन उनके कार्यक्रम में दिल्ली शामिल नहीं है. इसी को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. दूसरी ओर, रुबियो के जामनगर दौरे को रिलायंस इंडस्ट्रीज से जोड़कर भी देखा जा रहा है. ये यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब एलन मस्क और रिलायंस के बीच भारतीय सैटेलाइट इंटरनेट बाजार को लेकर बयानबाजी तेज है.
पहले समरकंद, फिर मुंबई और जामनगर जाएंगे रुबियो
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक उज्बेकिस्तान और भारत की यात्रा करेंगे. दौरे के पहले चरण में वो समरकंद में मध्य एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे. इसके बाद वह भारत आएंगे, जहां मुंबई और जामनगर उनके कार्यक्रम का हिस्सा हैं.
भारत यात्रा के दौरान रुबियो भारतीय अधिकारियों और कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे. इन बैठकों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा करने और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर बात होगी. दोनों देशों के बीच निवेश और आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाना भी इस यात्रा के एजेंडे में शामिल है.
मई के बाद ये रुबियो की दूसरी भारत यात्रा होगी. इससे पहले वह नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मेजबानी में हुई क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे.
रुबियो के दिल्ली न आने पर राहुल गांधी का तंज
रुबियो के कार्यक्रम में दिल्ली का जिक्र नहीं होने पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाए.
राहुल गांधी ने तंज कसते हुए लिखा कि मिस्टर रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है. उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर हो क्या रहा है. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से इस मामले को स्पष्ट करने को कहा और कटाक्ष करते हुए लिखा कि अगर वह चाहें तो राहुल गांधी खुद भी उन्हें समझा सकते हैं.
राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद रुबियो के मुंबई कार्यक्रम और वहां होने वाली बैठकों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. अमेरिकी विदेश विभाग ने यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना बताया है. हालांकि, दिल्ली को कार्यक्रम में शामिल नहीं किए जाने को लेकर उठे राजनीतिक सवालों के बीच विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है. विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि ये कोई पहली बार नहीं है इसके पहले भी कई बार भारत के दौरे पर आने वाले नेताओं को दिल्ली के अलावा दूसरे शहरों में होस्ट किया जाता रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि उदाहरण के लिए, प्रधानमंत्री ने वडोदरा में स्पेन के प्रधानमंत्री की मेजबानी की थी। उन्होंने अहमदाबाद में चांसलर मेर्ट्ज़ की मेजबानी की। वाराणसी में उन्होंने मॉरीशस के प्रधानमंत्री की मेजबानी की। इसके अलावा, विदेश मंत्री ने गोवा में SCO विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की। उन्होंने गुजरात के केवड़िया में बोत्सवाना के विदेश मंत्री की मेजबानी की। साथ ही, विदेश मंत्री ने अमृतसर में 'हार्ट ऑफ एशिया' सम्मेलन की भी मेजबानी की और ये तो बस कुछ उदाहरण हैं,
जामनगर में रिलायंस से जुड़ी मुलाकात पर क्यों है नजर?
रुबियो के दौरे का एक अहम पड़ाव गुजरात का जामनगर है. यहां रिलायंस इंडस्ट्रीज का विशाल तेल रिफाइनिंग परिसर स्थित है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स माना जाता है. इसकी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन है.
रुबियो के जामनगर दौरे को भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग के लिहाज से अहम माना जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च में टेक्सास के ब्राउन्सविल में नई तेल रिफाइनरी स्थापित करने की योजना का ऐलान किया था, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेश की बात कही गई थी. इस प्रस्तावित परियोजना को लेकर करीब 300 अरब डॉलर की लागत का दावा किया गया था.
ऐसे में रुबियो की यात्रा के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर नजर रहेगी. हालांकि, जामनगर दौरे के संदर्भ में किसी खास कारोबारी समझौते या रिलायंस के अधिकारियों के साथ बैठक के नतीजे को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा.
एलन मस्क और अंबानी के बीच क्यों बढ़ा विवाद?
रुबियो की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच भारतीय सैटेलाइट इंटरनेट बाजार को लेकर विवाद चर्चा में है. मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है. इसी बीच भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा और नियामकीय प्रक्रिया को लेकर बयानबाजी तेज हुई है.
मस्क ने सोशल मीडिया पर मुकेश अंबानी को निशाना बनाते हुए तंज कसा था. उन्होंने 'प्राइम मिनिस्टर अंबानी' कहकर सवाल उठाया कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं और क्या वह अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं. इन टिप्पणियों के बाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं, बाजार में प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों पर बहस शुरू हो गई.
भारत सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि सैटेलाइट सेवाओं के लिए सभी कंपनियों को निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा. रिलायंस की जियो सैटेलाइट सेवाओं को भी मंजूरी का इंतजार है. इसलिए बाजार में प्रतिस्पर्धा और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को लेकर किसी एक कंपनी के लिए अलग नियम होने का दावा कंपनी ने खारिज किया है.
रिलायंस ने मस्क के आरोपों पर क्या कहा?
एलन मस्क की टिप्पणियों के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 16 अक्टूबर को बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की. कंपनी ने कहा कि भारतीय बाजार में उसकी तरक्की ऐसे माहौल में हुई है, जहां निवेश और नई तकनीकों का स्वागत किया जाता है. रिलायंस के मुताबिक, निवेश भारतीय हो या विदेशी, यदि उससे लोगों की जिंदगी बेहतर होती है तो उसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.
कंपनी ने साथ ही कहा कि खुले बाजार की बुनियाद कानून का पालन करना है. भारत सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि हर आवेदक के लिए एक जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है, चाहे वह भारतीय हो या विदेशी. रिलायंस ने यह भी बताया कि जियो की अपनी सैटेलाइट सेवाओं को अभी मंजूरी मिलने का इंतजार है.
रिलायंस ने प्रतिस्पर्धा को लेकर कहा कि उसे कभी इससे डर नहीं लगा और प्रतिस्पर्धा ही यह साबित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि ग्राहकों को बेहतर सेवा कौन दे रहा है.
भारत-अमेरिका रिश्तों के लिए क्यों अहम है यह दौरा?
मार्को रुबियो की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के रिश्तों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग की अहमियत लगातार बढ़ रही है. मुंबई में कारोबारी प्रतिनिधियों से मुलाकात और जामनगर का दौरा इस बात का संकेत है कि ऊर्जा और आर्थिक सहयोग इस यात्रा के प्रमुख विषयों में शामिल हैं.
