अजित पवार प्लेन क्रैश: एक नजर उस 'पवार फैमिली ट्री' पर, जिनके पत्नी-बेटे सब हैं राजनीति में
बारामती विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया, जिससे राज्य की राजनीति के एक शक्तिशाली और विवादास्पद अध्याय का अंत हो गया. इस दुखद घड़ी में अजित पवार के सियासी सफर के साथ-साथ पवार परिवार की गहरी जड़ों और 'चाणक्य' शरद पवार की विरासत की पूरी कहानी चर्चा में है.

महाराष्ट्र की राजनीति का वो पावर हाउस आज हमेशा के लिए खामोश हो गया जिसने चार दशकों तक राज्य की सत्ता की धुरी को अपने इर्द-गिर्द घुमाया. बारामती के रनवे पर हुए एक दर्दनाक विमान हादसे ने न केवल उपमुख्यमंत्री अजित पवार की जीवनलीला समाप्त कर दी बल्कि सूबे की सियासत के एक बेहद चर्चित अध्याय पर भी विराम लगा दिया.
अजित पवार सिर्फ एक राजनेता नहीं थे वे मराठा राजनीति के चाणक्य शरद पवार की विरासत का हिस्सा थे. ऐसे में जानते हैं शरद पवार के पूरे परिवार में कौन-कहां है?
पवार परिवार मूल रूप से सतारा का रहने वाला रहा है, लेकिन बाद में वे बारामती में आकर बस गए. इस परिवार की राजनीति में एंट्री किसान मजदूर पार्टी की विरासत से मानी जाती है. शरद पवार के पिता गोविंदराव पवार स्थानीय किसान संघ के अध्यक्ष थे जबकि उनकी मां शारदाबाई पवार लोकल बोर्ड की सदस्य रह चुकी थीं.
यह भी पढ़ें...
गोविंदराव और शारदाबाई के कुल 11 बच्चे थे सात बेटे और चार बेटियां. परिवार के ज्यादातर सदस्य अलग-अलग पेशों में रहे. सबसे बड़े भाई वसंतराव पवार वकील बना, अप्पासाहेब ने एग्रीकल्चर की पढ़ाई की, कोई इंजीनियर, कोई आर्किटेक्ट तो किसी ने खेती या कारोबार को चुना. शरद पवार ने हालांकि कम उम्र में ही राजनीति का रास्ता पकड़ लिया.

शरद पवार का सियासी सफर
12 दिसंबर 1940 को जन्मे शरद पवार पढ़ाई के दिनों से ही छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए थे. 1958 में उन्होंने कांग्रेस जॉइन की और 1962 में पुणे जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने. महज 27 साल की उम्र में वे बारामती से विधायक चुने गए और यहीं से उनका लंबा राजनीतिक सफर शुरू हुआ.
परिवार और राजनीति का ताना-बाना
शरद पवार के बड़े भाई अप्पासाहेब के बेटे राजेंद्र भी राजनीति में आना चाहते थे लेकिन अजित पवार के पहले से सक्रिय होने के चलते यह संभव नहीं हो सका. अनंतराव पवार के बेटे अजित पवार ने 90 के दशक में राजनीति में कदम रखा और पांचवीं बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने. एक समय ऐसा भी था जब शरद पवार के बाद अजित को एनसीपी की कमान संभालने का सबसे बड़ा दावेदार माना जाता था.
शरद पवार की पत्नी प्रतिभा पवार राजनीति से दूर रहीं, लेकिन पार्टी के अंदर उनका प्रभाव माना जाता है. खुद शरद पवार अपनी किताब में जिक्र करते हैं कि 2019 में अजित पवार की वापसी में प्रतिभा पवार की अहम भूमिका रही थी, जब अजित ने बीजेपी से समर्थन वापस लिया था.

नई पीढ़ी की एंट्री
शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले राजनीति में काफी सक्रिय हैं. वे कई बार बारामती से लोकसभा सांसद चुनी जा चुकी हैं और अब पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रही हैं. वहीं अजित पवार के बेटे पार्थ पवार भी राजनीति में हाथ आजमा चुके हैं. 2019 में मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. उसी समय परिवार के भीतर मतभेद भी सामने आए थे जब टिकट को लेकर रिश्तेदारों के बीच खुलकर नाराजगी दिखी थी.
ये भी पढ़ें: 6 बार डिप्टी सीएम और 7 बार विधायक, ऐसा रहा अजित पवार का सियासी सफर










