महाराष्ट्र की राजनीति का अधूरा अध्याय, क्या अजीत पवार की जगह अब उनकी पत्नी संभालेंगी विरासत?
Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज अजीत पवार का विमान हादसे में निधन हो गया जिससे उनके 'मुख्यमंत्री' बनने का सपना अधूरा रह गया.

महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है. अजीत पवार जिन्हें राज्य की राजनीति में 'दादा' के नाम से जाना जाता था, अब हमारे बीच नहीं रहे. 28 जनवरी की सुबह प्लेन क्रैश में उनका निधन हो गया. जिसके बाद इंडिया टुडे ग्रुप (Tak चैनल्स) के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने उनके साथ जुड़ी यादों और उनके राजनीतिक सफर के उन पहलुओं को साझा किया जो इतिहास के पन्नों में एक 'अधूरी हसरत' की तरह दर्ज हो गए.
2004 की वो चूक जब हाथ से फिसली CM की कुर्सी
मिलिंद खांडेकर के अनुसार, अजीत पवार के करियर की सबसे बड़ी 'टीस' साल 2004 का चुनाव था. उस वक्त एनसीपी (NCP) को कांग्रेस से ज्यादा सीटें मिली थीं. NCP को 71 सीटें तो कांग्रेस 69 सीटें, नियम के अनुसार मुख्यमंत्री पद एनसीपी का होना चाहिए था, लेकिन शरद पवार ने दूरगामी राजनीति के चलते उन्हें मुख्यमंत्री पद सौंपा गया. खांडेकर बताते हैं कि अजीत पवार इस फैसले से कभी सहमत नहीं थे. साल 2023 में जब उन्होंने बगावत की थी तब उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था, "मुझे 2004 में ही बगावत कर देनी चाहिए थी." उनका मानना था कि अगर तब एनसीपी का सीएम बनता तो पार्टी आज और भी बड़ी होती.
प्रशासनिक सूझबूझ और 'डिप्टी सीएम' का टैग
मिलिंद खांडेकर अजीत पवार को एक ऐसे नेता के तौर पर याद करते हैं जिनमें मुख्यमंत्री बनने की सारी काबिलियत थी.
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"उनके पास प्रशासन की गहरी समझ थी और बेहतरीन राजनीतिक पकड़ भी, लेकिन विडंबना देखिए कि वे हमेशा उपमुख्यमंत्री ही बनकर रह गए. चाहे 2014 की बात हो या उसके बाद का दौर हमेशा लगा कि अब दादा का नंबर आएगा, लेकिन वो नंबर कभी नहीं आया."
परिवार और शरद पवार की अगली चुनौती
अजीत पवार और शरद पवार के बीच भले ही राजनीतिक मतभेद रहे हों लेकिन शरद पवार उन्हें हमेशा अपने बेटे के समान मानते थे. अब अजीत पवार के असमय निधन के बाद 85 साल के शरद पवार के कंधे पर एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारियां आ गई हैं, जहां उन्हें न केवल बिखरते परिवार को एकजुट करना होगा, बल्कि अपनी रिटायरमेंट की योजनाओं को टालकर राजनीति में फिर से पूरी तरह एक्टिव होना पड़ेगा.
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल उनके उत्तराधिकारी को लेकर उठ रहा है कि क्या अजीत पवार की राजनीतिक विरासत को उनकी पत्नी आगे बढ़ाकर उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगी या पार्टी किसी नए नेतृत्व की ओर रुख करेगी. हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में इस पर कोई भी अंतिम फैसला लेना जल्दबाजी होगी.
एक अधूरा सपना
अजीत पवार के करियर को याद करते हुए मिलिंद खांडेकर कहते हैं कि उन्हें हमेशा एक ऐसे काबिल नेता के तौर पर याद किया जाएगा जो महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने का हकदार था, लेकिन नियति और राजनीतिक समीकरणों ने उन्हें हमेशा उस अंतिम पायदान से एक कदम पीछे रखा. महाराष्ट्र की राजनीति में यह शून्य लंबे समय तक महसूस किया जाएगा.
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