Charchit Chehra: कौन हैं एन चंद्रशेखरन, जिनके टाटा ग्रुप के तीसरे टर्म पर मंडरा रहा संकट? नोएल टाटा ने रखीं ये 4 बड़ी शर्तें
Charchit Chehra N Chandrasekaran: टाटा ग्रुप के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर संकट की खबरों से कॉर्पोरेट जगत में हलचल है. नोएल टाटा द्वारा रखी गई चार शर्तों और टाटा संस के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच जानें कौन हैं एन चंद्रशेखरन, कैसे किसान परिवार से निकलकर बने टाटा ग्रुप के चेयरमैन, और क्या है पूरा विवाद.

भारत के कॉर्पोरेट जगत में अगर किसी की कहानी को गांव से ग्लोबल बोर्डरूम तक का सफर कहा जाए, तो वो कहानी है नटराजन चंद्रशेखरन या एन चंद्रशेखरन की. ये वही हैं जिन्हें बिजनेस सर्कल में प्यार से चंद्रा कहा जाता है. रतन टाटा के करीबियों में से एक गिने जाते थे चंद्रा लेकिन 2017 में टाटा ग्रुप के 150 साल के जिस इतिहास को साइड कर रतन टाटा ने जिन्हें गैर पारसी होते हुए भी टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनवाया था वो उनकी 30 साल की कड़ी मेहनत का नतीजा था.
लेकिन चंद्रा को लेकर जो अब जो खबर आ रही है वो उनके लिए अच्छी मालूम नहीं होती. क्योंकि जो 2027 में होना था वो रतन टाटा के सौतेले भाई ने 2026 में ही करने का फैसला ले लिया है. इसलिए चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में आज जानेंगे क्या है पूरा मामला, क्यों रतन टाटा के करीबी चंद्रा को चेयरमैन पद से हटाना चाहते हैं रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा और कैसे एक किसान परिवार से आने वाला लड़का बना टाटा ग्रुप में इतना बड़ा नाम...
एन चंद्रशेखरन ही क्यों चुने गए थे उत्तराधिकारी?
साल 2017 में साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के तीन महीने के अंदर ही टाटा समूह ने जब नटराजन चंद्रशेखरन को अपना उत्तराधिकारी चुन लिया तो सभी हैरत में थे. हैरानी की एक बड़ी वजह यह थी कि चंद्रशेखरन न तो टाटा परिवार के सदस्य थे और न ही पारसी. चंद्रशेखरन को जब टाटा समूह का चेयरमैन बनाया गया तो उस समय वो टीसीएस यानी Tata Consultancy Service के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे.
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रतन टाटा का करीबी होना और लीडरशिप क्वलिटी चंद्रशेखरन को चुने जाने की बड़ी वजह थी. रतन टाटा ने टाटा ग्रुप में नमक से लेकर हवाई जहाज तक कई क्षेत्रों में क्रांति की थी. उस समय रतन टाटा को चंद्रशेखरन का साथ मिला और यहीं से वो रतन टाटा के राइट हैंड की तरह बन गए. रतन टाटा शायद उनकी काबिलियत जानते थे इसलिए साइरस मिस्त्री के बाद चंद्रशेखरन को गैर पारसी होते हुए भी टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनाए जाने की वकालत कर रहे थे.
अचानक चंद्रशेखरन का क्यों हो रहा बवाल?
टाटा ग्रुप में चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन अपने दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं, तीसरा टर्म 2027 में खत्म होना है लेकिन उससे पहले ही बवाल हो रहा है. खबरों की मानें तो इसके पीछे वजह बताए जा रहे हैं रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा, जिन्होंने चंद्रशेखरन के तीसरे टर्म को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है, जिसे फरवरी 2027 तक चंद्रशेखरन के 65 साल के पूरे होने मंजूरी पिछले साल ही मिली थी. नोएल के इस फैसले के पीछे भी बड़ी वजह बताई जा रही है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, मीटिंग में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा ग्रुप के कुछ नए वेंचर्स में हो रहे नुकसान को लेकर चिंता जताई, जिससे गहरी चर्चा हुई. दूसरे डायरेक्टर्स ने चंद्रशेखरन के बने रहने का सपोर्ट किया, और कहा कि नुकसान ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स से जुड़े थे, जिन्हें आमतौर पर रिटर्न देने में समय लगता है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रशेखरन ने अपनी लेटेस्ट एनुअल रिपोर्ट में कहा कि पिछले पांच सालों में, टाटा ग्रुप ने रेवेन्यू लगभग दोगुना और नेट प्रॉफिट और मार्केट कैपिटलाइजेशन तीन गुना से ज्यादा किया, जबकि फ्यूचर फिट बनने के लिए 5.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए. टाटा संस की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, FY25 में रेवेन्यू 24 परसेंट बढ़कर 5.92 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि नेट प्रॉफिट 17 परसेंट गिरकर 28,898 करोड़ रुपये हो गया.
नोएल टाटा ने बताईं 4 शर्तें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक माना जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चार शर्तें बताई हैं, जिन्हें वो चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर विचार करने से पहले पूरा करना चाहते हैं. पहली शर्त यह है कि टाटा संस को अनलिस्टेड रहना चाहिए, जो कि अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल एंटिटीज़ पर लागू होने वाली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की जरूरतों के मुताबिक है, इस कैटेगरी में टाटा संस जैसे बड़े ग्रुप शामिल हैं.
दूसरी शर्त यह है कि कंपनी बिना कर्ज के काम करें. तीसरी शर्त का मकसद हाई-रिस्क वेंचर्स पर बहुत ज्यादा कैपिटल खर्च को रोकना है, जिससे कंपनी के फाइनेंशियल रिजर्व खत्म हो सकते हैं. चौथी शर्त एयर इंडिया और बिगबास्केट जैसे एक्विजिशन से होने वाले नुकसान को कम करने से जुड़ी है.
कौन हैं एन चंद्रशेखरन?
कॉर्पोरेट दुनिया की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बावजूद चंद्रशेखरन की पर्सनल लाइफ काफी सिंपल रही. उनकी पत्नी ललिता और बेटे प्रणव के साथ उनका पारिवारिक जीवन स्थिर और शांत माना जाता है. 1963 में तमिलनाडु के नमक्कल जिले के मोहनूर गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे चंद्रशेखरन का बचपन बिल्कुल आम था. सरकारी तमिल मीडियम स्कूल में पढ़ाई, घर में सादगी भरा माहौल और सीमित संसाधन, यही उनकी शुरुआती दुनिया थी. वो अपने दो भाइयों के साथ रोज करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाया करते थे.
पिता खेती करते थे और परिवार में डिसिप्लिंड को बहुत महत्व दिया जाता था, यही वैल्यूज आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की पहचान बने. पढ़ाई में टॉपर भले न रहे हों, लेकिन मेहनत और लगन में हमेशा आगे रहे. उन्होंने Coimbatore Institute of Technology से Applied Sciences में ग्रेजुएशन किया और फिर Regional Engineering College Tiruchirappalli जो आज की तारीख में NIT Trichy है, वहां से उन्होंने मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस की डिग्री हासिल की. उस दौर में कंप्यूटर साइंस कोई आम सबजेक्ट नहीं था, लेकिन चंद्रा को टेक्नोलॉजी में खास दिलचस्पी थी.
इंटर्न से लेकर चेयरमैन तक का सफर
1987 में उन्होंने Tata Consultancy Services यानी TCS में इंटर्न के तौर पर अपने करियर की शुरूआत की. यह वही कंपनी थी जिसने आगे चलकर उन्हें दुनिया के बड़े कॉर्पोरेट नेताओं में शामिल कर दिया. करीब दो दशकों तक उन्होंने अलग-अलग रोल्स में काम किया और अपने आप को साबित करके दिखाया. सितंबर 2007 में उन्हें TCS के बोर्ड में शामिल किया गया और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बनाया गया. सिर्फ दो साल बाद, अक्टूबर 2009 में, 46 साल की उम्र में वो TCS के CEO बने. यह अचीवमेंट इसलिए भी खास था क्योंकि वो टाटा ग्रुप के सबसे यंग CEOs में से एक थे. उनके नेतृत्व में TCS ने वर्ल्डवाइड अपनी पहचान बनाई और कंपनी का रेवेन्यू और प्रोफिट तेजी से बढ़ा.
2017 में टाटा ग्रुप साइरस मिस्त्री को पद से हटाने के बाद चंद्रशेखरन को चेयरमैन बनाया गया. टाटा समूह के 150 साल के इतिहास में ज्यादातर पारसी समुदाय से ही चेयरमैन रहे थे. ऐसे में एक गैर-पारसी, वो भी किसान परिवार से आए किसी शख्स का पूरे टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनाए जाना ऐतिहासिक बदलाव था, क्योंकि जिन्हें ये जिम्मेदारी दी गई वो 1987 में 30 साल पहले कभी इंटर्न के तौर पर कंपनी से जुड़े थे. फिलहाल चंद्रशेखरन 2027 तक अपने पद पर बने रहेंगे.
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