मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: पत्नी को 'ना' कहने का अधिकार, केंद्र- असहमति साबित कर पाना मुश्किल!
याचिकाओं पर करीब 3 घंटे सुनवाई चली. CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच में मामले की सुनवाई हुई.
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तस्वीर: इंडिया टुडे.
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न्यूज़ हाइलाइट्स
केंद्र का तर्क- यह साबित करना मुश्किल और चुनौतीपूर्ण होगा कि सहमति थी या नहीं.
मामले में अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी.
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई. इसमें याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 63 के अपवाद 2 पर सवाल उठाए. अपवाद 2 पति को पत्नी के मामले में रेप के आरोप से बचाता है. मामले पर बहस के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि पत्नी को भी 'ना' कहने का अधिकार है. ये भी कहा गया कि भारत में वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की मांग करने वाली याचिका 'लोग VS पितृसत्ता' है.