फ्रांस में हिंसा और आगजनी से मचा हड़कंप, राष्ट्रपति मैक्रों ने उपद्रवियों को दी सख्त चेतावनी
फ्रांस में महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के विरोध में प्रदर्शन हिंसक हो गया. पेरिस समेत कई शहरों में आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ के बीच राष्ट्रपति मैक्रों ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी.
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न्यूज़ हाइलाइट्स
फ्रांस में हिंसा और आगजनी की खबर
मजदूर संगठनों, छात्र यूनियनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने देशव्यापी विरोध मार्च का आह्वान किया था.
राष्ट्रपति मैक्रों ने उपद्रवियों को दी सख्त चेतावनी
फ्रांस में पहले शिक्षा व्यवस्था और बाद में महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है. राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े शहरों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं ने हालात तनावपूर्ण बना दिए हैं. सरकारी इमारतों, दुकानों और नगरपालिकाओं के कार्यालयों को निशाना बनाया गया, जबकि लिमोजेस शहर के 19वीं सदी के ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने से उसकी छत ढह गई. हिंसा के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश को संबोधित करते हुए उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है.
महंगाई और ईंधन की कीमतों के विरोध में प्रदर्शन
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को फ्रांस के मजदूर संगठनों, छात्र यूनियनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने देशव्यापी विरोध मार्च का आह्वान किया था. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों में वृद्धि और स्कूलों की खराब व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल थे. यह आंदोलन 2018 के चर्चित येलो वेस्ट आंदोलन की तर्ज पर शुरू हुआ था. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 5.5 लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए, जबकि आयोजकों ने यह संख्या 8 लाख से अधिक बताई. हालांकि, कई स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी. पेरिस के प्लेस डे ला रिपब्लिक के अलावा मार्सेली, ल्योन और बोर्डो जैसे शहरों में भी लूटपाट और आगजनी की घटनाएं सामने आईं. सड़कों पर खड़ी गाड़ियों, साइकिलों और कूड़ेदानों को आग के हवाले कर दिया गया.
मैक्रों ने दिया सख्त संदेश
हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार, 18 अक्टूबर को आपातकालीन बैठक की और देश को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों को अपने किए की कीमत चुकानी होगी. सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से नुकसान की भरपाई कराई जाएगी और लूटपाट करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा. मैक्रों ने हिंसा से प्रभावित दुकानदारों, व्यापारियों और कारोबारियों के प्रति समर्थन जताते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगी और मदद करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया जानकारी से जुड़ी कमियों की समीक्षा की जाएगी, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.
पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी तेज
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और हिंसा, लूटपाट तथा तोड़फोड़ में शामिल लोगों को एक नजर से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने राजनीतिक दलों, पेशेवर संगठनों और ट्रेड यूनियनों से हिंसा की निंदा करने और शांति बनाए रखने की अपील की. रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में अब तक 1,800 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें पेरिस क्षेत्र से 850 से ज्यादा गिरफ्तारियां शामिल हैं. इस बीच, दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने मैक्रों सरकार को थकी हुई और लाचार बताया, जबकि वामपंथी नेताओं ने सरकार पर युवाओं के असंतोष को दबाने का आरोप लगाया.
फ्रांस में जारी हिंसा ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. अब देखना होगा कि सरकार कानून-व्यवस्था बहाल करने और जनता की आर्थिक चिंताओं का समाधान निकालने के लिए क्या कदम उठाती है.
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