चोटी पकड़ी और मारने लगें... संतों ने खुद बताया संगम स्नान के दौरान पुलिस ने उनके साथ क्या-क्या किया

मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ जा रहे साधु-संतों ने पुलिस पर मारपीट और अपमान के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि प्रशासन इन दावों से इनकार कर रहा है. घटना के बाद कई संतों के घायल होने की बात सामने आई है, जिससे संत समाज में गहरा आक्रोश फैल गया है.

संतो ने खुद बताया उनके साथ क्या क्या हुआ
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मौनी अमावस्या के मौके पर संगम स्नान के लिए जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ जा रहे साधु-संतों और प्रशासन के बीच भारी विवाद खड़ा हो गया. शंकराचार्य के शिष्यों ने पुलिस और प्रशासन पर मारपीट, अपमान और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं. खुद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इस घटना में उनके तीन शिष्य अस्पताल में भर्ती हैं और एक दर्जन से ज्यादा संतों के साथ मारपीट की गई.

शंकराचार्य का आरोप है कि पुलिस चौकी में अफसरों ने साधु-संतों और बाल बटुकों के साथ मारपीट की, गालियां दीं और कई बुजुर्ग व बाल संत घायल हो गए. इस पूरे मामले को लेकर संत समाज में आक्रोश है. वहीं प्रशासन का दावा कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था और सोशल मीडिया पर जो इस तरह के वीडियोज सर्कुलेट हो रहे हैं वो AI जेनरेटेड हैं. 

संतों की जुबानी क्या हुआ?

इसी सच्चाई का पता लगाने के लिए हमारी टीम ने घटना के दौरान मौके पर मौजूद वैष्णवानंद ब्रह्मचारी से बातचीत की. वैष्णवानंद ब्रह्मचारी नेपाल से आए हुए संत हैं. उन्होंने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी वे शंकराचार्य के साथ संगम स्नान के लिए आए थे. उनके अनुसार जब संतों का काफिला आगे बढ़ रहा था तब पुलिस के ही जवान जो सुरक्षा में तैनात थे, उन्होंने बैरिकेडिंग की रस्सी खोली. संतों ने भी सहयोग करते हुए बैरिकेड हटाने में मदद की ताकि किसी को परेशानी न हो.

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वैष्णवानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि जैसे ही वे आगे बढ़े, प्रशासन के लोगों ने अचानक शंकराचार्य को वहीं रोक दिया और पालकी से उतरने के लिए कहने लगे. शंकराचार्य ने कहा कि वे सालों से पालकी से ही उस रास्ते से जाते रहे हैं और सिर्फ इतना अनुरोध किया कि प्रशासन की गाड़ियां जहां तक जाती हैं, वहीं तक उन्हें छोड़ दिया जाए. 

पुलिस ने कहा- इन्हें गिरफ्तार कर लो

इसी दौरान हालात बिगड़ गए. संतों का आरोप है कि पुलिस ने कहा,

'इन्हें गिरफ्तार कर लो.' इसके बाद पुलिसकर्मियों ने शंकराचार्य के रथ को खींचना शुरू कर दिया. वैष्णवानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि गुरुजी को बचाने के लिए उन्होंने अपने हाथ में मौजूद राजदंड आगे किया लेकिन पुलिस ने राजदंड हटा दिया और उनकी चुटिया पकड़ ली. इसके बाद उन्हें अंदर ले जाया गया, कपड़े उतरवाए गए और बेरहमी से पीटा गया. उन्होंने दावा किया कि उनके साथ मारपीट के बाद अन्य संतों और बटुकों को भी अंदर बुलाकर पीटा गया.

बटुकों के साथ भी बदसलूकी का आरोप

एक अन्य बटुक महाराज ने बताया कि उन्हें अंदर ले जाकर मारा तो नहीं गया, लेकिन लगातार अपमानित किया गया. उनके मुताबिक, पुलिस ने उनके हाथ में मौजूद दंड को फेंकने के लिए कहा, जबकि दंड उनके लिए भगवान के समान होता है. इतना ही नहीं, पुलिस ने उनके भेष-भूषा पर भी टिप्पणी की और कहा कि-ये सब उतारो, इसका कोई काम नहीं है. बटुक महाराज ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे यह तक कह दिया कि IAS बनो.

वहीं, एक और संत ने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम में उन्हें थप्पड़ मारे गए, लातों से पीटा गया और मानसिक रूप से भी अपमानित किया गया.

संत समाज में नाराजगी

इस घटना के बाद संत समाज में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. संतों का कहना है कि धार्मिक परंपराओं और साधु-संतों के सम्मान के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद दुखद है. अब सभी की नजरें प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच पर टिकी हैं कि आखिर मौनी अमावस्या जैसे पवित्र अवसर पर हालात कैसे बेकाबू हो गए.

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