मैथ में सिर्फ 51 नंबर लाने वाला पवन कुमार चंदना कैसे बन गए देश के सबसे बड़े रॉकेट मैन?

प्रधानमंत्री मोदी ने विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों से बात की और उनसे कहा, "आपने न केवल अंतरिक्ष में एक नया पेड़ लगाया है, बल्कि अगली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए जमीन पर भी नई जड़ों को मजबूत किया है."

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स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापक
स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापक
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क्या आप सोच सकते हैं कि स्कूल के दिनों में मैथ्स के पेपर में सिर्फ 51 नंबर लाने वाला कोई लड़का आगे चलकर देश का बड़ा रॉकेट साइंटिस्ट बन सकता है. आमतौर पर जब हम किसी अंतरिक्ष वैज्ञानिक या रॉकेट बनाने वाले इंसान की कल्पना करते हैं तो हमारे दिमाग में एक ऐसा चेहरा आता है जो बचपन से ही अपनी क्लास का टॉपर रहा हो, जिसे नंबरों से प्यार हो और जिसके रिपोर्ट कार्ड में हमेशा 100 में से 100 नंबर चमकते हों. लेकिन सफलता का कोई तय फॉर्मूला नहीं होता और इसी बात को सच साबित कर दिखाया है एक भारतीय युवा ने जिनका नाम है पवन कुमार चंदना.