Charchit Chehra: मुकेश अंबानी ने क्यों किसी को उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया?

मुंबई में रिलायंस जियो के ऐतिहासिक IPO और लिस्टिंग के जश्न के बीच मुकेश अंबानी अपने बच्चों- आकाश, ईशा और अनंत- की सफलता देख भावुक हो उठे। अतीत के विवादों से सबक लेते हुए मुकेश अंबानी ने साम्राज्य का बंटवारा तो बच्चों में कर दिया है.

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मुकेश अंबानी इमोशनल मोमेंट
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मुंबई में NSE की बिल्डिंग में Jio IPO की लिस्टिंग की रस्म निभाने के लिए रिलायंस का टॉप मैनेजमेंट मौजूद था. मुकेश अंबानी, नीता अंबानी, आकाश अंबानी, ईशा अंबानी अपने-अपने परिवारों के साथ आए. मौका था अंबानीज का. फिर भी ये वन मैन शो बना अनंत अंबानी का. रिलायंस की जिस कंपनी जियो का आईपीओ लिस्ट हुआ उसकी कमान मुकेश अंबानी के बड़े बेटे आकाश अंबानी के हाथों में है. आकाश रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन और पैरेंट कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं.

जिंदगी में कितना भी कमा लो, कामयाबी हासिल कर लो. जिंदगी सफल तब होती है जब बच्चे भी सफलता के मुकाम तक पहुंचे, पिता की विरासत को संभाल लें. मुकेश अंबानी के लिए ये वही दिन था जब आंखों से निकल पड़े खुशी के आंसू. आकाश, अनंत और ईशा ने पोडियम से इतना कुछ कहा कि मुकेश अंबानी जज्बात काबू में नहीं रख पाए. 

धीरू भाई अंबानी की रिलायंस की विरासत मुकेश और अनिल अंबानी को मिली थी. बंटवारे के बाद अनिल अलग होकर बर्बाद भी हो गए लेकिन मुकेश अंबानी पहले अकेले, फिर बच्चों के साथ रिलायंस का विस्तार करते रहे. समझदार पिता की तरह बच्चों को बिजनेस एंपायर संभालने के लिए तैयार किया लेकिन आज तक वो बड़ा फैसला नहीं किया जिसे आज नहीं तो करना पड़ेगा.

उत्तराधिकार को लेकर खींचतान बहुत कॉमन

बड़े बिजनेस घरानों में उत्तराधिकार को लेकर खींचतान बहुत कॉमन है लेकिन अंबानी परिवार की इस तीसरी पीढ़ी ने दुनिया को हैरान कर दिया. जियो की लिस्टिंग के ऐतिहासिक मौके पर अनंत अंबानी ने मंच से एक ऐसी बात कही, जिसने पिता मुकेश अंबानी को वो बड़ा फैसला करने से रोका हुआ है. 

बिजनेस की दुनिया का एक रूल है फर्स्ट मूवर एडवांटेज यानी जो पहले आएगा, वही बाजार पर राज करेगा. लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस रूल को पूरी तरह बदल दिया. एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया, आर कॉम टेलीकॉम मार्केट पर सालों से राज कर रही थीं, तब मुकेश अंबानी के रिलायंस की रेस में कोई मौजूदगी नहीं थी. रिलायंस मार्केट में बहुत देर से घुसा, लेकिन जब घुसा तो उसने पूरे बाजार को बदल दिया. उस देरी की वजह थी नो-कंपीट एग्रीमेंट. 

2005 में जब अंबानी परिवार का बंटवारा हुआ, तो टेलीकॉम बिजनेस रिलायंस इंफोकॉम अनिल अंबानी के हिस्से में गया. मुकेश और अनिल के बीच एक समझौता था कि मुकेश अंबानी टेलीकॉम सेक्टर में कदम नहीं रखेंगे. 2010 में जब ये समझौता खत्म हुआ तो तब मुकेश अंबानी टेलीकॉम में घुसे लेकिन कतई हड़बड़ी नहीं की. 

जब 5 सितंबर 2016 को जियो लॉन्च हुआ, तो उसने 'फ्री कॉलिंग और कौड़ियों के दाम पर डेटा' देकर पूरी इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया. जो कंपनियां सालों से 1GB डेटा के लिए 250 रुपये वसूल रही थीं, वे रिलायंस की इस सुनामी में टिक नहीं पाईं. एयरटेल को छोड़कर बाकी दर्जनों कंपनियां या तो बंद हो गईं या उनका वजूद खत्म हो गया.

सबसे बड़े ईशा और अनंत TWINS हुए

मुकेश और नीता अंबानी के तीन बच्चे हुए. सबसे बड़े ईशा और अनंत TWINS हुए. जियो नाम की क्रांति इन्हीं दो TWINS ने की. ऐसी एक कहानी है कि 2009-10 के आसपास अमेरिका में पढ़ते हुए छुट्टियों में मुंबई अपने घर आए थे ईशा और अनंत. ईशा को कॉलेज का जरूरी असाइनमेंट ऑनलाइन सबमिट करना था. लेकिन  घर का इंटरनेट इतना धीमा था कि अपलोड नहीं हो रहा था. ईशा ने पापा से शिकायत की. उस शिकायत में आकाश अंबानी भविष्य का बिजनेस देखा. समझ लिया कि वॉयस कॉलिंग का दौर पुराना हो रहा है, आने वाला समय डेटा यानी इंटरनेट का है. 

बच्चों ने ऑयल किंग पिता को ब्रॉडबैंड इंटरनेट की समय से बहुत पहले आने वाली दुनिया की झलक दिखाई. बच्चों की जिद और विजन ने मुकेश अंबानी के भीतर सोए हुए टेलीकॉम किंग को दोबारा जगा दिया. फिर शुरू हुआ जियो का खेल जिसकी कमान संभाली आकाश अंबानी ने. जियो की लिस्टिंग पर बहन ईशा ने जब 13 साल के सफर और भाई अनंत की मेहनत की कहानी सुनाई तो मुकेश अंबानी खुद को रोक नहीं सके. 

शुरुआती पढ़ाई मुंबई के ही 'धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल से की

आकाश अंबानी का जन्म ईशा के साथ 23 अक्टूबर 1991 को मुंबई में हुआ. बच्चों ने शुरुआती पढ़ाई मुंबई के ही 'धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल से की. स्कूल के बाद आकाश अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने दुनिया की ब्राउन यूनिवर्सिटी (Brown University) से इकोनॉमिक्स (अर्थशास्त्र) में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.

 2014 में पढ़ाई पूरी करके लौटते ही आकाश सीधे रिलायंस जियो के ऑपरेशन्स से जुड़ गए. उन्होंने किसी बड़े बॉस की तरह नहीं, बल्कि एक ग्राउंड इंजीनियर और स्ट्रेटेजिस्ट की तरह काम शुरू किया. इस बिजनेस की सबसे अनोखी रणनीति यह थी कि रिलायंस ने हड़बड़ी में जियो को लॉन्च नहीं किया. 2010 में 'इन्फोटेल ब्रॉडबैंड' को खरीदने के बाद, आकाश अंबानी की देखरेख में रिलायंस ने पूरे 6 साल तक देश के कोने-कोने में खामोशी से लाखों किलोमीटर का ऑप्टिक फाइबर केबल नेटवर्क बिछाया.

जब 2016 में जियो को लॉन्च किया गया, तो बाकी टेलीकॉम कंपनियां यह सोचकर हैरान रह गईं कि रिलायंस ने रातों-रात पूरे भारत में इतना बड़ा 4G नेटवर्क कैसे खड़ा कर दिया! वह कोई जादू नहीं, बल्कि बच्चों के एक आइडिया पर मुकेश अंबानी द्वारा बैकएंड में की गई 6 साल की गुप्त तपस्या थी.

भारत में 4G और 5G क्रांति को घर-घर पहुंचाने का श्रेय आकाश की युवा सोच को जाता है. उन्हीं की अगुवाई में आज जियो 53 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों के साथ भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन चुकी है. मुकेश अंबानी ने 2022 में आकाश अंबानी को रिलायंस जियो इन्फोकॉम (Reliance Jio Infocomm) का चेयरमैन बनाकर टेलीकॉम की पूरी कमान सौंप दी थी.

आकाश अंबानी की प्रेम कहानी स्कूल के दिनों की है

अक्सर बड़े अमीर घरानों की शादियां बिजनेस डील्स की तरह तय होती हैं, लेकिन आकाश अंबानी की प्रेम कहानी स्कूल के दिनों की है. आकाश की पत्नी श्लोका मेहता, दिग्गज हीरा कारोबारी रसेल मेहता की बेटी हैं. आकाश और श्लोका दोनों एक ही स्कूल धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल में क्लासमेट थे. स्कूल खत्म होने के बाद श्लोका अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स पढ़ने चली गईं, जबकि आकाश ब्राउन यूनिवर्सिटी चले गए. दूर होकर भी दोस्ती और प्यार कभी कम नहीं हुआ. प्यार को शादी तक पहुंचाने के लिए साल 2018 में गोवा के एक रिजॉर्ट में आकाश ने घुटनों के बल बैठकर श्लोका को प्रपोज किया था. मार्च 2019 में हुई दोनों की शादी हो गई. 

धीरूभाई अंबानी ने शून्य से रिलायंस का साम्राज्य खड़ा किया. पिता के तौर पर अटूट विश्वास था कि 
उनके जाने के बाद भी दोनों बेटे मुकेश और अनिल एकजुट रहकर काम संभालेंगे. उसी अटूट विश्वास के कारण, 2002 में धीरूभाई अंबानी बिना कोई वसीयत (Will) बनाए दुनिया से चले गए. उनकी वही एक चूक आगे चलकर देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट विवाद की वजह बन गई. 

पिता के निधन के बाद रिलायंस के मालिकाना हक और फैसलों को लेकर मुकेश और अनिल अंबानी के बीच वर्चस्व की कड़वी जंग छिड़ गई, जो अरसे तक मीडिया की हेडलाइंल और कोर्च कचहरी में सुनी-सुनाई गई. आखिरकार 2005 में मां कोकिलाबेन को हस्तक्षेप करके दोनों भाइयों के बीच रिलायंस का ऐतिहासिक बंटवारा करना पड़ा. अतीत के इसी कड़वे अनुभव और पिता की उस एक गलती से सबक लेते हुए, आज मुकेश अंबानी ने अपने जीवनकाल में ही जियो, रिटेल और न्यू एनर्जी की कमान तीनों बच्चों आकाश, ईशा और अनंत में बांट दी है, ताकि भविष्य में कभी वह इतिहास न दोहराया जा सके. आकाश अंबानी के पास टेलीकॉम यानी जियो है. ईशा अंबानी  रिलायंस का रिटेल और फैशन एम्पायर Reliance Retail संभालती हैं. अनंत अंबानी न्यू एनर्जी और रिन्यूएबल बिजनेस यानी Green Energy और वंतारा संभालते हैं. 

मुकेश अंबानी अभी तक केवल बिजनेस बांटा है

मुकेश अंबानी अभी तक केवल बिजनेस बांटा है ताकि ग्रुप के बिजनेस की ग्रोथ होती रही. आगे परीक्षा बाकी है जिसे उन्होंने टाला हुआ है. किसी एक को रिलायंस का सर्वेसर्वा या इकलौता उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है. वो चाहते  होंगे तीनों भाई-बहन रिलायंस इंडस्ट्रीज के बोर्ड में बराबर के साझीदार बनकर, 'एक आत्मा' की तरह फैसले लें लेकिन परिवार में जो हो चुका है उसे याद रखते हुए परिवार की एकता का पहला टेस्ट तब होगा जब ये फैसला कि रिलायंस इंडस्ट्रीज में मुकेश अंबानी वाली पोजिशन किसे मिलती है.

जियो टाइटल को लेकर दिलचस्प थ्योरी चर्चा में रही है. परिवार का मेन और सबसे पुराना बिजनेस ऑयल यानी पेट्रोकेमिकल्स का है. अगर यदि अंग्रेजी के शब्द OIL को Mirror में देखेंगे या उसे उल्टा करके लिखेंगे, तो वह हूबहू "JIO" दिखाई देगा. उसी से बना जियो. यह महज एक इत्तेफाक था या सोची-समझी रणनीति, लेकिन यह कहानी दिखाती है कि कैसे तेल (Oil) के साम्राज्य से निकलकर अंबानी परिवार ने डिजिटल डेटा (Jio) का महासाम्राज्य खड़ा कर दिया.

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