C. Joseph Vijay : CM Vijay की सरकार किसे दे रहे 26-26 लाख रुपये की कारें?

तमिलनाडु सरकार ने विधायकों और विधानसभा पदाधिकारियों के लिए 15 लाख से 26 लाख रुपये तक की सरकारी कारें खरीदने के नियम तय किए हैं. योजना के तहत ईंधन व चालक के लिए मासिक भत्ते का भी प्रावधान है, लेकिन सार्वजनिक खर्च को लेकर विपक्ष और अन्य नेताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं.

ADVERTISEMENT

विजय थलापति
विजय थलापति
Google CTA

तमिलनाडु की सियासत में मंत्रियों और विधायकों के लिए गाड़ियों के ऐलान को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. राज्य सरकार ने विधानसभा यात्रा भत्ता नियम, 1955 में संशोधन करते हुए मंत्रियों, विधायकों और विधानसभा के प्रमुख पदाधिकारियों के लिए कार खरीदने की अधिकतम सीमा तय कर दी है [00:49]. नए नियमों के मुताबिक, सरकार अब 26-26 लाख रुपये तक की गाड़ियां सरकारी खर्च पर उपलब्ध कराएगी.

क्या है पूरा मामला?

मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने बीते 19 अगस्त को यह घोषणा की थी कि राज्य के सभी 234 विधायकों के लिए सरकारी खर्च पर गाड़ी और 1 लाख रुपये मासिक भत्ता दिया जाएगा. इसके बाद 1 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के तहत, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विपक्ष के नेता और मुख्य सचेतक के लिए कार खरीदने की अधिकतम सीमा 26 लाख रुपये तय की गई है, जबकि अन्य सभी विधायकों के लिए यह सीमा 15 लाख रुपये तक होगी.

इस तय सीमा में वाहन की एक्स-शोरूम कीमत, कार पंजीकरण शुल्क और मोटर वाहन बीमा प्रीमियम को भी शामिल किया गया है. इसके अलावा, सभी वाहनों को BSVI उत्सर्जन मानकों का पालन करना होगा और इन्हें सरकारी GeM पोर्टल के माध्यम से ही खरीदा जाना अनिवार्य है.

खर्च और भत्ते के नियम

  • रखरखाव और ईंधन: मंत्रियों के वाहनों के रखरखाव, मरम्मत, ईंधन और चालकों का खर्च सरकार खुद उठाएगी, जबकि विधानसभा सचिवालय चार वरिष्ठ पदाधिकारियों के लिए यह खर्च वहन करेगा. वहीं, अन्य विधायकों को इन खर्चों का वहन स्वयं करना होगा.
  • वापसी के निर्देश: नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मृत्यु, कार्यकाल की समाप्ति, बर्खास्तगी, इस्तीफे या अयोग्यता के कारण पद छोड़ने पर विधायकों को वाहन संबंधित अधिकारियों को वापस सौंपने होंगे.
  • मासिक भत्ता: मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, ईंधन, रखरखाव और चालक के खर्च के लिए 75,000 रुपये तथा सहायक के लिए 25,000 रुपये का मासिक भत्ता दिए जाने का प्रावधान है.

राजनीतिक हलचल और विरोध

विधायकों को वाहन उपलब्ध कराने की यह मांग वीसी के विधायक एलई ज्योतिमणि द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्रों में यात्रा के दौरान आने वाली कठिनाइयों को उजागर करने के बाद उठी थी. हालांकि, इस प्रस्ताव से सार्वजनिक खर्च को लेकर राजनीतिक बहस भी छिड़ गई. 21 अगस्त को डीएमके ने घोषणा की थी कि राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए उसके 59 विधायक सरकारी वाहन लेने से इनकार कर रहे हैं, जबकि अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस योजना की आवश्यकता पर सवाल उठाए हैं.

इस पूरी योजना और नए संशोधनों को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

ये भी पढ़ें:  CJP का कभी समर्थन नहीं करूंगा, अन्नामलाई ने साफ किया स्टैंड, मोदी सरकार पर भी उठाए सवाल