अरविंद केजरीवाल इस लीगल पेंच से राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों को दे सकते हैं झटका, कपिल सिब्बल ने समझाया पूरा गणित

Anti-defection law India: आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के BJP में जाने के दावे ने सियासत गरमा दी है. क्या सिर्फ दो-तिहाई संख्या से मर्जर वैध हो जाता है या इसके लिए पार्टी स्तर पर फैसला जरूरी है? 10वीं अनुसूची के नियम अब इस पूरे विवाद के केंद्र में आ गए हैं.

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कपिल सिब्बल ने बताए 10वीं अनुसूची का नियम
कपिल सिब्बल ने बताया 10वीं अनुसूची का नियम
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AAP BJP Merger 10th Schedule of Constitution: आम आदमी पार्टी में एक बड़ी राजनीतिक बगावत सामने आई है. राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा सहित 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं. इसके साथ ही उन्होंने दावा किया है कि पार्टी के दो-तिहाई सांसद यानी कुल 10 में से 7 सांसद उनके साथ हैं. उनके इस कदम ने न सिर्फ AAP के भीतर हलचल मचा दी है, बल्कि दल-बदल कानून को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है. ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि संविधान के मुताबिक मर्जर यानी विलय की प्रक्रिया क्या है और क्या यह कदम वास्तव में कानूनी रूप से वैध है या महज एक राजनीतिक रणनीति. ऐसे में आइए समझते हैं कि यह कानून क्या कहता है और इस पूरे मामले पर कानून के जानकार कपिल सिब्बल की क्या राय है.