5 साल में 1516 करोड़ बढ़ी इनकम...कांग्रेस के संकटमोचक अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनावी एफिडेविट में संपत्ति जानकर रह जाएंगे हैरान
Abhishek Manu Singhvi Property: राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल हलफनामे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की संपत्ति का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. सिंघवी और उनकी पत्नी की कुल संपत्ति करीब ₹2869 करोड़ बताई गई है. पिछले पांच सालों में उनकी इनकम में तेजी से उछाल आया है, जिससे वे देश के सबसे अमीर नेताओं में शामिल हो गए हैं.

Abhishek Manu Singhvi Net Worth: देश की राजनीति और कानून की दुनिया में एक बड़ा नाम और कांग्रेस के संकट मोचक कहे जाने वाले अभिषेक मनु सिंघवी एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह उनकी राजनीति नहीं बल्कि उनकी संपत्ति का खुलासा है. राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए एफिडेविट में उन्होंने अपनी और अपनी पत्नी की संयुक्त संपत्ति का जो ब्यौरा दिया है उसने लोगों को हैरान कर दिया है. एफिडेविट के मुताबिक, अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी और पत्नी की कुल संपत्ति करीब ₹2869 करोड़ घोषित की है. इतनी बड़ी संपत्ति के साथ वो देश के सबसे अमीर नेताओं में गिने जाते हैं.
बीते 5 सालों में कमाई में जबरदस्त उछाल
अगर उनकी इनकम पर नजर डालें तो पिछले 5 सालों में उनकी कमाई में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है. एफिडेविट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में ₹359 करोड़ और वित्त वर्ष 2021-22 में ₹290 करोड़ रही. वहीं वित्त वर्ष 2020-21 में 158 करोड़ की आय उन्होंने घोषित की. इस तरह पिछले 5 सालों में उनकी कुल आय ₹1516 करोड़ से ज्यादा रही. खास बात ये है कि एफिडेविट में सिंघवी ने अपने घर और ऑफिस में इस्तेमाल होने वाले सामान की कीमत तक का जिक्र किया है. आमतौर पर चुनावी एफिडेविट में ऐसी चीजें डिटेल के साथ नहीं लिखी जातीं. यहां तक कि सिंघवी ने अपने मौजूदा कंप्यूटर की कीमत ₹163 भी बताई है, जबकि 2024 में बताया कि उसकी कीमत ₹454 थी. सिंघवी ने अपने एफिडेविट में ये भी बताया कि उनके पास मौजूद आर्ट वर्क और पेंटिंग्स की कीमत ₹25 करोड़ से ज्यादा है.
निर्विरोध चुने गए राज्यसभा सांसद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य सिंघवी ने अपने एफिडेविट में किसी भी तरह का कर्ज होने की जानकारी नहीं दी है. राज्यसभा चुनाव में उनके साथ एक और उम्मीदवार वैन नरेंद्र रेड्डी भी मैदान में रहे और उन्होंने अपने हलफनामे में करीब ₹41 करोड़ की पारिवारिक संपत्ति घोषित की. इस चुनाव में एक दूसरे कैंडिडेट इंडिपेंडेंट थे जिनका नाम कांते सयानानी था, लेकिन जरूरी प्रस्तावकों की संख्या पूरी ना होने के कारण उनका नॉमिनेशन खारिज कर दिया गया. इसके बाद अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी दोनों ही बिना किसी मुकाबले के राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए.
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गांधी परिवार के लिए बने संकट मोचक
सिंघवी की कांग्रेस के साथ वफादारी की बात करें तो मोदी सरनेम केस में सुप्रीम कोर्ट से राहुल का राजनीतिक करियर बचाने से पहले सिंघवी नेशनल हेराल्ड केस में भी राहुल गांधी और सोनिया गांधी को जमानत दिला चुके हैं. बीजेपी ने जब-जब राहुल को कानूनी पचड़ों में फंसाया, सिंघवी दूत बनकर संकट से उबारने का काम आए. वह सिंघवी ही थे जब दिल्ली के शराब घोटाले में संजय सिंह को ईडी पकड़ कर ले गई और ऐन चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल को तिहाड़ जेल में डाला गया, तब भी सिंघवी सुप्रीम कोर्ट से केजरीवाल को रिहा करा लाए. सिंघवी एक वकील होने के साथ-साथ कांग्रेस नेता भी हैं और अब एक बार फिर वह राज्यसभा पहुंच रहे हैं.
पिता रहे बीजेपी से सांसद, सिंघवी ने चुनी कांग्रेस
अभिषेक मनु सिंघवी खानदानी वकील हैं. उनके पिता लक्ष्मीमल सिंघवी भी देश के जाने-माने कानूनविद और ब्रिटेन में भारत के हाई कमिश्नर रहे. लक्ष्मीमल सिंघवी ने बीजेपी जॉइन की थी और वह 1998 से 2004 तक बीजेपी के राज्यसभा सांसद रहे. अभिषेक मनु सिंघवी ने भी पिता की तरह लॉ को करियर बनाया, लेकिन राजनीति में कांग्रेस पार्टी चुनी. उनके पिता बीजेपी के सांसद होते थे और अभिषेक मनु सिंघवी कांग्रेस के प्रवक्ता. 25 से ज्यादा साल हो गए लेकिन कांग्रेस और गांधी परिवार के प्रति सिंघवी की निष्ठा कभी डगमगाई नहीं. 2012 में सेक्स टेप कांड में फंसने के बाद सिंघवी की राजनीति और वकालत दोनों फंसी, लेकिन उन्होंने जोरदार वापसी करके खुद को साबित किया और अब एक बार फिर राज्यसभा पहुंचे हैं.
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