Shesh Bharat: आंध्र में चंद्रबाबू नायडू की आंधी, जगन रेड्डी अपने पिता का किला भी नहीं बचा पाए

आंध्र प्रदेश के निकाय चुनावों में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाले कुटमी गठबंधन ने बड़ी जीत दर्ज की है. टीडीपी, जनसेना और बीजेपी ने अधिकांश शहरी निकायों पर कब्जा जमाया. जगन रेड्डी की YSRCP को करारी हार मिली. उनके पारंपरिक गढ़ पुलिवेंदुला में भी पहली बार टीडीपी जीत गई.

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क्या किसी ने सोचा था कि आंध्र प्रदेश की राजनीति से वाईएस जगन मोहन रेड्डी का दौर इतनी जल्दी खत्म होने की कगार पर पहुंच जाएगा या यह मौका जगन रेड्डी की जोरदार वापसी का है? आंध्र प्रदेश के निकाय चुनावों के नतीजे आए हैं और उन नतीजों ने साबित कर दिया कि राज्य में अब असली और इकलौते किंग चंद्रबाबू नायडू ही हैं. 5 साल पहले जिस जगन रेड्डी ने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया था, आज वो अर्श से सीधे शून्य पर आ गिरे हैं. चंद्रबाबू नायडू ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब वो पलटवार करते हैं, तो विरोधियों की जमीन फाड़कर वापसी करते हैं.

जीरो से सत्ता तक पहुंचे जगन, अब फिर शून्य पर

आंध्र प्रदेश निकाय चुनावों के नतीजों से निकली कहानी राजनीति के उस क्रूर चक्र की है, जिसने चंद सालों में राजा को रंक बना दिया. साल 2011 में कांग्रेस से बगावत करके अपनी खुद की पार्टी YSRCP बनाने के बाद, वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अपनी बेमिसाल पदयात्रा के दम पर महज 5 साल में 2014 से 2019 तक अपनी पार्टी को जीरो से उठाकर सत्ता तक पहुंचा दिया. 2019 के विधानसभा चुनाव में 151 सीटें जीतकर उन्होंने चंद्रबाबू नायडू को नेस्तनाबूद कर दिया था. लेकिन राजनीति का पहिया ऐसा घूमा है कि 2024 से जगन के सारे अभेद्य किले पूरी तरह ढह रहे हैं. पहले 2024 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी महज 11 सीटों पर सिमट गई, लोकसभा चुनाव में भारी झटका लगा. और अब इन निकाय चुनावों के नतीजों ने उनकी बची-कुची जमीन को भी शून्य पर लाकर खड़ा कर दिया है.

TDP-JSP-BJP गठबंधन ने 90 फीसदी शहरी निकायों पर जमाया कब्जा

आंध्र प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों ने वाईएस जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा झटका दिया है. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाले TDP-JSP-BJP के कुटमी गठबंधन ने राज्य के करीब 90 फीसदी से अधिक शहरी निकायों और म्यूनिसिपल चेयरपर्सन पदों पर एकतरफा कब्जा जमा लिया है. कुटमी को 13 नगर निगमों में 9 और 86 में से 75 नगरपालिकाओं में जीत मिली. जगन मोहन रेड्डी को सबसे दर्दनाक और करारा झटका उनके अपने ही सबसे मजबूत गढ़ पुलिवेंदुला में लगा है.

पुलिवेंदुला में पहली बार TDP की जीत, जगन को बड़ा झटका

टीडीपी ने पहली बार पुलिवेंदुला नगरपालिका सीट जीती है. कडप्पा जिले से ही वाईएसआर परिवार आंध्र की राजनीति में छाया. पुलिवेंदुला दशकों से वाईएस परिवार का गढ़ रहा है. जगन रेड्डी जिस इलाके से चुनाव लड़कर सीएम और विधायक बनते रहे, वह किला भी अब टीडीपी के पास चला गया. जगन पूरे राज्य की हार भले भूल सकते हैं, लेकिन पुलिवेंदुला में जो हुआ, उसे भुला पाना असंभव जैसा है. कडप्पा जिले में भी पूरी पार्टी का सफाया हो गया.

पुलिवेंदुला के 20 वार्डों में सिर्फ 3 पर सिमटी YSRCP

पुलिवेंदुला के कुल 20 वार्डों में से जगन की पार्टी महज 3 वार्डों पर सिमट गई, जिसने यह साफ कर दिया कि रेड्डी परिवार का अपना पारंपरिक वोट बैंक और विश्वास दोनों खिसक चुके हैं. विशाखापत्तनम, कडप्पा, चित्तूर, गुंटूर और तिरुपति जैसे बड़े इलाकों में वाईएसआरसीपी का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया, जबकि 2021 के निकाय चुनावों में यहां वाईएसआरसीपी का एकछत्र राज था. 2026 के इन नतीजों ने जगन रेड्डी की पार्टी को शहरों की राजनीति में पूरी तरह पीछे धकेल दिया है.

जगन रेड्डी ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल

यह संभव है कि जगन को ऐसे ही किसी नतीजे की आशंका थी. शुरू से उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए. आरोप लगाए कि पार्टी के उम्मीदवारों को नामांकन तक भरने नहीं दिया जा रहा. वैसे भी पूरा चुनाव मारपीट और हिंसा के कारण लगातार विवादों में रहा. वोटिंग के दिन कई पोलिंग बूथों पर बवाल हुआ. खुद जगन रेड्डी को अपने एजेंटों को रोकने के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ा. जगन ने आरोप लगाया कि यह 'इलेक्शन नहीं बल्कि रूलिंग अलायंस का सिलेक्शन' था.

जगन ने चुनाव को हाईजैक करने का लगाया आरोप

नतीजे आने पर जगन ने आरोप लगाया कि चुनाव को एनसीबीएन टीम ने हाईजैक कर लिया था. सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक पोस्ट में उन्होंने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की टीम, पुलिस और राज्य चुनाव आयोग को चुनाव जीतने का तरीका दिखाने के लिए बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया गया कि विपक्ष को लड़ाई करने का मौका ही न मिले.

चंद्रबाबू नायडू ने फिर दिखाई अपनी सियासी ताकत

आंध्र में एन. चंद्रबाबू नायडू को 'चाणक्य' क्यों कहा जाता है, उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है. नायडू के पास ढहते हुए साम्राज्य को वापस खड़ा करने और सही वक्त पर सही गठबंधन (TDP-JSP-BJP) करने की वो अद्भुत कला है, जिससे वो सीधे विरोधियों के गढ़ पर वार करते हैं. जब 2019 में वे बुरी तरह हारे थे, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वे इस तरह बाउंस बैक करेंगे. चंद्रबाबू ने न सिर्फ अपनी पार्टी को पुनर्जीवित किया, बल्कि जगन रेड्डी के उस 'वोट बैंक' में ऐसी सेंध लगाई कि आज वाईएसआर कांग्रेस के नेता अपनी साख बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

पवन कल्याण की जनसेना का 100 फीसदी स्ट्राइक रेट

चुनाव में एक धमाका डिप्टी सीएम पवन कल्याण की जनसेना पार्टी ने भी किया. जनसेना ने विधानसभा चुनाव के अपने इतिहास को दोहराते हुए स्थानीय निकाय चुनाव में भी 100 फीसदी का स्ट्राइक रेट हासिल किया. जनसेना ने गठबंधन के तहत जिन भी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अपने उम्मीदवार उतारे, उन सभी सीटों पर जीत दर्ज की, जिसमें अकेले 17 चेयरपर्सन पद शामिल हैं.

कुटमी गठबंधन की जीत, TDP सबसे बड़ी पार्टी

आंध्र प्रदेश में बीजेपी तीसरे नंबर की पार्टी है, जो टीडीपी और जनसेना पार्टी के साथ एनडीए को कंट्रोल करती है, लेकिन चंद्रबाबू ने निकाय चुनाव में एनडीए अलायंस की नई ब्रैंडिंग की. उन्होंने कुटमी नाम का अलायंस बनाया, जिसमें पवन कल्याण के साथ बीजेपी भी शामिल हुई. जीत कुटमी अलायंस की हुई. 13 नगर निगमों में से कुटमी अलायंस ने 9 पर जीत हासिल की. कोर्ट केस के कारण दो जगह चुनाव नहीं हुए. टीडीपी ने विशाखापत्तनम (GVMC), तिरुपति, गुंटूर, चित्तूर, कडप्पा, मछलीपट्टनम, नेल्लूर और कर्नूल में जीत हासिल की. जगन मोहन रेड्डी की पार्टी, जिसने 2021 के पिछले चुनाव में सभी 13 नगर निगमों पर क्लीन स्वीप किया था, इस बार बुरी तरह बिखर गई और महज 1 सीट अनंतपुर पर ही अपनी लाज बचा पाई.

87 नगर पालिकाओं में कुटमी गठबंधन का दबदबा

87 नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में से 17 सीटें पहले ही एनडीए के खाते में निर्विरोध चली गई थीं, जिसमें टीडीपी को 15, जनसेना को 1 और बीजेपी को 1 सीट मिली. कुटमी अलायंस ने करीब 90 फीसदी शहरी निकायों में क्लीन स्वीप करते हुए जीत का परचम लहराया. टीडीपी ने 57 नगर पालिकाओं में, जनसेना ने 100 फीसदी स्ट्राइक रेट के साथ अपने सभी 17 चेयरपर्सन पदों पर और बीजेपी ने 4 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल कर जगन रेड्डी की वाईएसआरसीपी को सिर्फ 4 म्यूनिसिपैलिटीज पर समेट दिया.

जगन की बहन शर्मिला ने भी चुनाव पर उठाए सवाल

आंध्र की राजनीति में कांटे की टक्कर के बीच एक जंग परिवार के बीच भी चल रही है. सगे भाई-बहन जगन रेड्डी और वाईएस शर्मिला के बीच न केवल राजनीतिक रंजिश है, बल्कि व्यक्तिगत और पारिवारिक रिश्ते भी हद से ज्यादा खराब हैं. इसी खराब रिश्ते के कारण जगन ने बहन की बेटी की शादी के लिए पिता का घर देने से मना कर दिया. अब तक शर्मिला ने जगन रेड्डी की हार का कभी शोक नहीं मनाया. शोक तो आज भी नहीं मना रहीं, लेकिन निकाय चुनावों को लेकर उन्होंने चंद्रबाबू नायडू और टीडीपी को खूब सुनाया है. शर्मिला ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के दौरान व्यापक स्तर पर धांधली, बूथ कैप्चरिंग, फर्जी वोटिंग और विपक्ष के उम्मीदवारों को नामांकन करने से रोकने के लिए पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग किया गया.

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