Bagalkot By election 2026 exit poll: बागलकोट उपचुनाव में कांग्रेस मार सकती है बाजी? 'रुद्र रिसर्च' के नतीजों ने चौंकाया
रुद्र रिसर्च के एग्जिट पोल की मानें तो कर्नाटक की बागलकोट विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार उमेश मेटी खेल कर सकते हैं. जानें शहर और ग्रामीण क्षेत्रों का पूरा चुनावी समीकरण.
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कर्नाटक के बागलकोट विधानसभा उपचुनाव पर सबकी नजरे हैं. 4 मई को साफ हो जाएगा कि कांग्रेस विधायक के निधन से खाली हुई ये सीट अब किसकी होगी? इससे पहले ही 'रुद्र रिसर्च' एग्जिट पोल के नतीजों ने बागलकोट की जनता को एक इशारा दे दिया और संभावना जताई है कि यहां कांग्रेस पार्टी एक बार फिर बाजी मारने जा रही है. 'रुद्र रिसर्च' की मानें तो जीत-हार कर अंतर 15 हजार मतों के आसपास हो सकता है. कर्नाटक में 2028 में होने वाले आगामी चुनाव से पहले इस सीट का नतीजा एक रिहर्सल के तौर पर देखा जा रहा है.
दरअसल साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में बागलकोट सीट पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता 79 वर्षीय एच. वाय. मेटी ने जीत दर्ज की थी. सिद्धारमैया सरकार में आबकारी मंत्री रह चुके एच. वाय. मेटी का निधन लंबी उम्र की बीमारियों की वजह से नवंबर 2025 में हो गया. इसके बाद से ये सीट खाली थी. इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा हुई जिसमें कांग्रेस ने एच. वाय. मेटी के बेटे उमेश मेटी को मैदान में उतारा. वहीं बीजेपी ने पूर्व विधायक वीरभद्र (वीरण्णा) चरंतीमठ को अपना प्रत्याशी बनाया.
‘रुद्र रिसर्च’ एग्जिट पोल के नतीजे
बागलकोट क्षेत्र के उपचुनाव के बाद रुद्र रिसर्च संस्था द्वारा मतदाताओं की राय जानने पर यह सामने आया कि कांग्रेस के उम्मीदवार उमेश मेटी को 94860 (53%) और भाजपा के उम्मीदवार वीरभद्र उर्फ वीरण्णा चरंतीमठ को 79848 (45%) मतदाताओं का समर्थन मिलते हुए दिख रहा है. एग्जिट पोल के अनुसार कांग्रेस के उम्मीदवार उमेश मेटी 15012 (11%) मतों के अंतर से जीतते हुए दिखाई दे रहे हैं.
रुद्र रिसर्च की टीम ने मतदान के बाद जनता की नब्ज टटोली और इस नतीजे पर पहुंचा कि कांग्रेस के उम्मीदवार उमेश मेटी को बागलकोट शहर से 32118 (45%) और ग्रामीण क्षेत्रों से 62742 (59%) मतदाताओं का समर्थन मिलता हुआ दिख रहा है. वहीं भाजपा के उम्मीदवार वीरभद्र उर्फ वीरण्णा चरंतीमठ को बागलकोट शहर से 37828 (53%) तथा ग्रामीण क्षेत्रों से 42020 (39%) मतदाताओं का समर्थन मिलता हुआ दिखाई दे रहा है.
अब सवाल ये है कि कांग्रेस प्रत्याशी को ये समर्थन क्यों मिलता दिख रहा है? रुद्र रिसर्च की मानें तो कर्नाटक में कांग्रेस द्वारा लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर साफ से दिखाई दे रहा है. साथ ही कुरबा समाज के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में भी पार्टी बहुत हद तक सफल रही है. मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने बागलकोट उपचुनाव को प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाते हुए खुद क्षेत्र में प्रचार की कमान संभाली. जनसभाओं, रैलियों तथा कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से संवाद के माध्यम से उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में माहौल तैयार किया.
भावनात्मक लहर और दिग्गजों की रैलियां
चूंकि विधायक एच. वाय. मेटी के निधन के बाद जब उनके बेटे को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया तो कहीं न कहीं सहानुभूति की लहर भी देखने को मिली. इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता जैसे राज्य के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, मंत्री सतीश जारकीहोळी, मंत्री एम. डी. पाटील, मंत्री शिवानंद पाटील, मंत्री आर. बी. तिमापूर, मंत्री विजयानंद काश्यपनवर, मंत्री सुरेश बैराठी, मंत्री बी. ज़ेड. ज़मीर अहमद खान, विधानसभा के उपाध्यक्ष रुद्रप्पा लंबानी, संयुक्ता पाटील, कांग्रेस की पूर्व महिला अध्यक्ष रक्षिता इटे, यतेंद्र सिद्धारमय्या आदि प्रमुख नेताओं ने कांग्रेस उम्मीदवार उमेश मेटी के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाया.
माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी को इसका फायदा होता दिख रहा है. हालांकि चुनाव के नतीजे अभी बाकी हैं. 4 मई को पता चलेगा कि बागलकोट की जनता ने सहानुभूति और कांग्रेस पार्टी की कल्याणकारी योजनाओं के साथ खड़ी है या उसने बदलाव का मन बना लिया है.
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