आंध्र की राजनीति में आर-पार की लड़ाई, क्या जगन रेड्डी का सियासी आधार बचा पाएगी YSRCP?
आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू और जगन रेड्डी के बीच सियासी जंग तेज हो गई है. स्थानीय निकाय चुनाव दोनों नेताओं के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गए हैं. YSRCP को 2024 में 39 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे. पार्टी ने नामांकन में बाधा के आरोप लगाकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
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राजनीति और चुनावों में हार-जीत चलती रहती है. जीतने वाला सरकार चलाने में बिजी हो जाता है. हारने वाला विपक्ष हार के शोक में डूब जाता है. आंध्र प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है, जहां सब पलटने के बाद भी चंद्रबाबू नायडू और जगन रेड्डी की जंग जरा भी नहीं थमी. बड़ी वजह यह है कि एक साथ लोकसभा-विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद भी जगन रेड्डी की पार्टी YSRCP का जनाधार खत्म नहीं हुआ. सारे राज्यों को मिला दें तो सिर्फ 11 विधायकों की पार्टी के नेता जगन रेड्डी सबसे जोरदार विपक्ष के नेता बनकर चंद्रबाबू नायडू की सरकार से भिड़े हुए हैं.
2024 के बाद और तेज हुई दोनों नेताओं की राजनीतिक दुश्मनी
2024 के बाद दोनों दिग्गजों के बीच की दुश्मनी शांत होने के बजाय आग की लपटों की तरह और भड़कती जा रही है. सत्ता में आते ही नायडू सरकार ने तिरुपति लड्डू प्रसादम विवाद से लेकर टीडीपी दफ्तरों पर हुए पुराने हमलों की फाइलें खोलकर जगन को चौतरफा घेर लिया. पलटवार में जगन ने आंध्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर डाली. इसी महीने होने जा रहे स्थानीय निकाय चुनाव भड़की हुई राजनीतिक आग में घी का काम कर रहे हैं.
जगन रेड्डी के यू-टर्न से बीजेपी के खिलाफ बढ़ी सियासी तल्खी
वो राजनीति ही क्या, जिसमें दोस्त और दुश्मन परमानेंट होने लगें. जो जगन मोहन रेड्डी कभी दिल्ली में बीजेपी के सबसे भरोसेमंद 'संकटमोचक' हुआ करते थे, वो अचानक मोदी सरकार के खिलाफ बागी हो गए हैं. अब ये खबर सबको पता चल चुकी है. जगन रेड्डी ऐसे बागी हुए कि कह गए कि 2023 में चुनाव आयोग वाला बिल सपोर्ट करके भारी मिस्टेक कर दी थी. जगन ने यू-टर्न लिया तो बीजेपी ने तो रिएक्ट नहीं किया, लेकिन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भड़क गए हैं.
जगन रेड्डी पर चंद्रबाबू नायडू ने लगाए गंभीर आरोप
चंद्रबाबू नायडू टीडीपी चीफ होने के साथ-साथ आंध्र के सीएम भी हैं. पॉलिटिकल प्रेस कॉन्फ्रेंस बहुत कम करते हैं, लेकिन जब जगन रेड्डी ने पलटी मारकर बीजेपी पर निशाना साधा तो उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि आज जब आप राज्य में चुनाव हार रहे हैं, तो खुद को पीड़ित दिखाने के लिए यू-टर्न ले रहे हैं. यह घोर राजनीतिक अवसरवादिता है. नायडू ने आरोप लगाया कि जगन मोहन रेड्डी Gen Z की भावनाओं और उनकी आकांक्षाओं का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग कर रहे हैं. युवाओं को अपराध की राह पर धकेलकर उनका भविष्य खतरे में डाल रहे हैं.
2019 में YSRCP ने निकाय चुनावों में किया था क्लीन स्वीप
2019 में जगन रेड्डी ने रॉकेट की तरह अपनी पॉलिटिकल लॉन्चिंग नहीं की. उन्होंने ताबड़तोड़ तीन-तीन चुनाव जीते थे. लोकसभा और विधानसभा चुनावों में सिक्का जमाने के बाद 2021 के लोकल बॉडीज यानी निकाय चुनावों में भी तीर मारे थे. YSRCP ने सत्ता की ताकत और कल्याणकारी योजनाओं के दम पर एकतरफा और ऐतिहासिक 'क्लीन स्वीप' किया था. टीडीपी 2019 की हार के सदमे में डूबी रही. जगन की पार्टी ने राज्य के सभी 12 नगर निगमों और 75 में से 73 नगरपालिकाओं पर अपना कब्जा जमा लिया था. जगन रेड्डी का ऐसा जलवा था कि 10,500 से अधिक ग्राम पंचायतों में वाईएसआरसीपी समर्थित सरपंच जीते थे.
2026 के स्थानीय निकाय चुनाव में टीडीपी के सामने है हैट्रिक का मौका
2024 में डबल विक्ट्री के बाद टीडीपी के लिए मौका है कि वह लोकल चुनाव जीतकर हैट्रिक दोहराए. बैलेट पेपर से होने जा रहे चुनाव इस महीने से शुरू होकर दिसंबर तक चलेंगे. Urban Local Bodies के तहत 13 नगर निगमों, 77 नगरपालिकाओं और 10 नगर पंचायतों के लिए 28 अक्टूबर को वोटिंग होगी. 30 अक्टूबर को नतीजे आएंगे. जनता अपने-अपने मेयर का चुनाव करेगी.
नवंबर और दिसंबर में होंगे ग्रामीण निकायों के चुनाव
आगे ग्रामीण निकायों (Rural Bodies) का दंगल शुरू होगा, जिसमें 3 नवंबर को जिला और मंडल परिषदों (ZPTC/MPTC) के लिए वोट डाले जाएंगे, जबकि 26 नवंबर, 29 नवंबर और 2 दिसंबर 2026 को तीन चरणों में ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड सदस्यों को चुनने के लिए जनता बैलेट बॉक्स में अपनी किस्मत का फैसला बंद करेगी.
नामांकन में बाधा के आरोप लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची YSRCP
लोकल चुनावों की लड़ाई शहरों, गांवों और कस्बों में होनी थी, लेकिन पहुंच गई सुप्रीम कोर्ट. जगन रेड्डी की पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से शिकायत की है कि उनके उम्मीदवारों को नामांकन ही भरने नहीं दिया जा रहा है. पर्चे छीने जा रहे हैं. मारपीट की जा रही है. सारे आरोप चंद्रबाबू प्रशासन और पुलिस पर हैं. वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से मांग की थी कि हिंसा को देखते हुए नामांकन की आखिरी तारीख बढ़ाई जाए, लेकिन हाईकोर्ट ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि दखल देने से चुनाव प्रक्रिया बाधित होगी. तब जाकर YSRCP ने सुप्रीम कोर्ट की हॉलिडे बेंच में तत्काल सुनवाई की याचिका लगाई.
चंद्रबाबू नायडू और जगन रेड्डी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बने चुनाव
आंध्र प्रदेश के लोकल चुनाव महज मेयर, प्रधान या पार्षद चुनने तक सीमित नहीं रह गए हैं. बदले समीकरणों से लेकर आंध्र की अदालतों और जमीनी हिंसा के बीच यह चंद्रबाबू और जगन के अस्तित्व की आर-पार की लड़ाई बन चुकी है. भले ही विधानसभा चुनाव में सीटों के लिहाज से जगन की करारी हार हुई हो, लेकिन नंबर गेम वापसी की उम्मीदों को जिंदा रखता है.
39 फीसदी वोट शेयर के सहारे वापसी की उम्मीद में जगन रेड्डी
2024 के चुनाव में YSRCP को करारी शिकस्त के बावजूद 39 फीसदी से ज्यादा का भारी-भरकम वोट शेयर मिला था. जगन को अच्छी तरह पता है कि उनकी सीटें कम हुई हैं, लेकिन उनका कैडर और जमीनी जनाधार अभी मरा नहीं है. उनके लिए यह स्थानीय चुनाव अपने इस 39% कैडर को टूटने से बचाने और जमीनी कार्यकर्ताओं में दोबारा जान फूंकने के लिए 'करो या मरो' की लड़ाई बन चुके हैं.
चंद्रबाबू नायडू के लिए भी बड़ा लिटमस टेस्ट
निकाय चुनाव मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के लिए उनकी नई सरकार का पहला और सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट बन चुके हैं. नायडू के पास यह साबित करने का मौका है कि 2024 की जीत कोई इत्तेफाक या अस्थायी लहर नहीं थी. अगर टीडीपी-जेएसपी गठबंधन इस बार भी शहरी और ग्रामीण निकायों पर कब्जा कर लेता है, तो वह जगन रेड्डी के बचे-खुचे 39% राजनीतिक वजूद को भी हमेशा के लिए मलबे में तब्दील कर सकता है.
