Charchit Chehra: कौन हैं अभिजीत वंजारी? जिनकी नागपुर में ऐतिहासिक जीत से गदगद हुई कांग्रेस, बीजेपी के गढ़ में ढहाया किला
Charchit Chehra: कौन हैं अभिजीत वंजारी, जिन्होंने नागपुर स्नातक MLC चुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाई? जानिए उनका राजनीतिक सफर, परिवार, शिक्षा, NSUI से जुड़ाव और 2020 के बाद 2026 में दोबारा जीत दर्ज करने की पूरी कहानी.
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महाराष्ट्र के नागपुर में हुए विधान परिषद (MLC) स्नातक चुनाव के नतीजों ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गढ़ माने जाने वाले नागपुर में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने शानदार जीत दर्ज कर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है. वंजारी ने बीजेपी के उम्मीदवार सुधाकर कोहले को 3,271 मतों के अंतर से हराकर साबित कर दिया कि राजनीतिक रूप से कितना भी मजबूत गढ़ क्यों न हो, उसे जनता के समर्थन से ढहाया जा सकता है. ऐसे में चर्चाएं तेज है कि आखिर कौन हैं अभिजीत वंजारी, जिन्होंने इतना बड़ा कारनामा कर दिखाया है. चर्चित चेहरा में आज जानेंगे उनकी पूरी कहानी.
कौन हैं अभिजीत वंजारी?
अभिजीत गोविंदराव वंजारी महाराष्ट्र की राजनीति के एक जाने-माने और अनुभवी चेहरे हैं. उनका जन्म 10 मई 1973 को नागपुर में हुआ था. राजनीति और समाज सेवा उन्हें विरासत में मिली है. उनके पिता स्वर्गीय गोविंदराव मारोतराव वंजारी कांग्रेस के कद्दावर नेता थे, जिन्होंने 1955 में कांग्रेस जॉइन की थी और नागपुर दक्षिण सीट से दो बार विधायक भी चुने गए थे. घर के राजनीतिक माहौल के चलते अभिजीत ने छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रख दिया था. उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर कॉलेज ऑफ लॉ से एलएलबी की डिग्री हासिल की है. साल 1998 से 2002 के बीच वह कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई (NSUI) के प्रदेश महासचिव भी रहे हैं.
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान और दूसरा बड़ा करिश्मा
राजनीति के अलावा अभिजीत वंजारी शिक्षा जगत (Educationist) में भी एक बड़ा नाम हैं. वह 'अमर सेवा मंडल' संस्था के सचिव हैं, जिसके तहत नागपुर और विदर्भ क्षेत्र में इंजीनियरिंग, फार्मेसी, लॉ और मैनेजमेंट समेत करीब 10 शैक्षणिक संस्थान संचालित होते हैं. उनकी पत्नी डॉ. स्मिता वंजारी अंग्रेजी की लेक्चरर और नागपुर यूनिवर्सिटी की सीनेट मेंबर हैं.
खास बात यह है कि अभिजीत वंजारी ने साल 2020 में भी नागपुर स्नातक एमएलसी सीट पर जीत दर्ज कर आरएसएस-बीजेपी के वर्चस्व को तोड़ा था. अब 2026 में एक बार फिर इसी सीट पर दोबारा जीत हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया है कि वह केवल एक बार के तुक्के वाले नेता नहीं, बल्कि नागपुर में कांग्रेस के सबसे मजबूत स्तंभ हैं.
राजनीतिक मायने और बैलेट पेपर चुनाव पर बहस
यह जीत ऐसे समय में आई है जब देश के विभिन्न राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र) में विधान परिषद के चुनाव हुए हैं. हालांकि अन्य राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, लेकिन नागपुर की इस इकलौती और वीआईपी जीत ने कांग्रेस को बीजेपी पर पलटवार करने का बड़ा मौका दे दिया है. चूंकि यह चुनाव बैलेट पेपर के जरिए हुआ था, इसलिए कांग्रेस इस जीत का हवाला देकर बीजेपी के गढ़ों (जैसे नागपुर और वाराणसी) में सेंध लगाने को अपनी बड़ी वैचारिक और रणनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रही है. अभिजीत वंजारी की यह जीत राहुल गांधी की उस थ्योरी पर भी खरी उतरती है जिसमें वह जमीन पर चुपचाप पसीना बहाने वाले 'रेस के घोड़ों' को तरजीह देते हैं.
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