Shesh Bharat: 3 हजार महिलाओं के साथ धनुष की सीक्रेट मीटिंग, क्या तमिलनाडु में होने वाला है बड़ा खेल?

सुपरस्टार धनुष की चेन्नई में महिला प्रशंसकों के साथ हुई एक बड़ी मीटिंग ने तमिलनाडु की राजनीति में चर्चाएं तेज कर दी हैं. महिलाओं को चांदी के दीये बांटने और उन पर कमल की नक्काशी होने से बीजेपी के कथित 'ऑपरेशन D' को लेकर सवाल उठे हैं. हालांकि, धनुष ने राजनीति में आने पर कुछ नहीं कहा है.

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सिल्वर स्क्रीन से लेकर सियासी गलियारों तक, जब-जब साउथ सिनेमा का कोई थंडर गरजता है, तो चेन्नई की राजनीति में हलचल मच जाती है. इस वक्त तमिलनाडु और सोशल मीडिया पर सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा है- सुपरस्टार धनुष! 'कोलावेरी डी' फेम धनुष ने चेन्नई के बाहरी इलाके शोलिंगनल्लूर में भारी बारिश के बीच 3 हजार से ज्यादा महिला फैंस के साथ गुप्त और मेगा मीटिंग की है. मंच से 'थलाइवर' के नारे लगे, तो सबके कान खड़े हो गए. क्या थलपति विजय के बाद अब धनुष भी तमिलनाडु की राजनीति पर नजर गड़ाए बैठे हैं? या बीजेपी धनुष के जरिए कोई खेल खेलने जा रही है, जिसे समय से पहले कांग्रेस ने डिकोड कर लिया है?

फैन क्लब का नाम बदलकर शुरू की नई गतिविधियां

तमिल फिल्मों में हर बड़े स्टार का फैन क्लब होता है. इसी फैन क्लब से विजय ने अपनी पॉलिटिकल पार्टी बना ली. धनुष भी कोई छोटे-मोटे नेता नहीं हैं. उनका भी एक फैन क्लब, धनुष नर्पानी मंद्रम, हुआ करता था, जिसका नाम धनुष ने बदलकर 'धनुष नर्पानी इयक्कम' यानी 'धनुष कल्याण आंदोलन' (Dhanush Welfare Movement) कर दिया है.

फैन क्लब की रीब्रैंडिंग के तुरंत बाद धनुष ने ताबड़तोड़ कई एक्शन कर दिए. उन्होंने तमिलनाडु के अलग-अलग जिलों से आईं हजारों महिला प्रशंसकों के लिए चेन्नई में शानदार बिरयानी भोज रखा. धनुष खुद पारंपरिक सफेद धोती-कुर्ता पहनकर पहुंचे, सबके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और सभी महिलाओं को दीपावली के तोहफे में चांदी के दीप यानी कामाक्षी विलक्कु बांटे. हालांकि, जब मीडिया ने उनसे राजनीति में आने पर सवाल पूछा, तो उन्होंने सिर्फ 'हैप्पी दिवाली' कहकर रहस्य और गहरा कर दिया.

चांदी के दीयों पर कमल की नक्काशी से उठा सवाल

धनुष की इस मेगा मीटिंग से राजनीति, समाज और एंटरटेनमेंट के लिहाज से कई बेहद दिलचस्प और सनसनीखेज एंगल निकल रहे हैं. मीटिंग का सबसे विवादित और चौंकाने वाला एंगल यह है कि धनुष ने महिलाओं को जो चांदी के कामाक्षी दीये गिफ्ट किए, उन पर लोटस यानी कमल के फूल की नक्काशी बनी हुई थी. कमल का फूल बीजेपी का चुनाव चिह्न है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मणिक्कम टैगोर को शक हो गया कि धनुष के जरिए बीजेपी ऑपरेशन D चला रही है. बीजेपी अब बैकडोर से धनुष को एक बड़े चेहरे के रूप में प्रमोट कर रही है.

महिला वोटर्स पर फोकस, क्या राजनीति में उतरने की तैयारी?

धनुष ने किसी आम फैन मीट के बजाय सिर्फ महिला विंग के साथ बिरयानी पार्टी की. चांदी के दीये बांटे और पैर छूकर आशीर्वाद लिया. तमिलनाडु की राजनीति का इतिहास गवाह है कि जिसने महिला वोटर्स को साध लिया, सत्ता उसकी मुट्ठी में होती है, जैसा एमजीआर और जयललिता के दौर में हुआ था. धनुष ने सीधे तौर पर महिलाओं और युवाओं को टारगेट किया है, जो किसी भी चुनाव में सबसे बड़ा 'साइलेंट टर्निंग पॉइंट' साबित हो सकते हैं.

मद्रास में जन्म, शेफ बनने का था सपना

धनुष हमेशा से धनुष नहीं थे. 28 जुलाई 1983 को मद्रास में जन्मे वेंकटेश प्रभु कस्तूरी राजा मशहूर होकर धनुष कहलाए. उनके पिता कस्तूरी राजा तमिल फिल्मों के छोटे डायरेक्टर और प्रोड्यूसर थे. धनुष का बचपन आर्थिक तंगहाली में भी गुजरा. सेंट जॉन्स स्कूल से पढ़ाई करने वाले धनुष कभी एक्टर नहीं बनना चाहते थे. उनका सपना शेफ बनने या मरीन इंजीनियरिंग करने का था.

लेकिन परिवार पर कर्ज का भारी बोझ था और पिता व बड़े भाई, डायरेक्टर सेल्वाराघवन के दबाव में आकर उन्होंने महज 19 साल की उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू कर लिया. साल 2002 में आई उनकी पहली फिल्म 'थुल्लुवादो इलमई' थी, जिसे उनके पिता ने ही डायरेक्ट किया था.

बॉडी शेमिंग से नेशनल अवॉर्ड तक का सफर

शुरुआती दिनों में धनुष को अपनी पतली काठी और रंग-रूप के कारण भयंकर 'बॉडी शेमिंग' का सामना करना पड़ा. लोग उन्हें ऑटो ड्राइवर तक कहकर चिढ़ाते थे. लेकिन इस 'अंडरडॉग' ने हार नहीं मानी. साल 2003 में आई फिल्म 'काढल कोंडेन' और 'पुधुपेट्टई' में अपनी साइको और इंटेंस एक्टिंग से उन्होंने आलोचकों के मुंह पर ताला लगा दिया.

साल 2011 में आई फिल्म 'आदुकलम' के लिए उन्हें सिर्फ 28 साल की उम्र में बेस्ट एक्टर का 'नेशनल फिल्म अवॉर्ड' मिला. इसके बाद साल 2011 में ही उनके गाए गाने 'व्हाई दिस कोलावेरी डी' ने यूट्यूब पर ग्लोबल रिकॉर्ड तोड़ दिया और वह देश के कोने-कोने में पहचाने जाने लगे. उन्होंने 'रांझणा' और 'अतरंगी रे' जैसी सुपरहिट हिंदी फिल्में भी कीं और हॉलीवुड फिल्म 'द ग्रे मैन' में भी अपना लोहा मनवाया.

ऐश्वर्या से शादी और फिर तलाक

धनुष की जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया, जब उनकी मुलाकात तमिल सिनेमा के भगवान कहे जाने वाले थलाइवा रजनीकांत की बड़ी बेटी ऐश्वर्या से हुई. 'काढल कोंडेन' फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान ऐश्वर्या धनुष की एक्टिंग से बेहद प्रभावित हुईं और उन्होंने धनुष को बुके भेजकर तारीफ की. यहीं से दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई.

साल 2004 में दोनों परिवारों की रजामंदी से धनुष और ऐश्वर्या की भव्य शादी हुई. दोनों के दो बेटे, यात्रा और लिंगा, भी हुए. शादी ने धनुष को रातों-रात तमिल सिनेमा के सबसे पावरफुल कबीले का हिस्सा बना दिया. लेकिन जनवरी 2022 में दोनों ने अचानक अलग होने का ऐलान कर सबको चौंका दिया और नवंबर 2024 में कानूनी तौर पर उनका तलाक हो गया. सुपरस्टार रजनीकांत का दामाद बनना धनुष के लिए एक ऐसी दोधारी तलवार साबित हुआ, जिसने उनके करियर को 'पंख' भी दिए और 'बेड़ियां' भी.

जमीन से जुड़े किरदारों ने बनाई अलग पहचान

धनुष की सबसे बड़ी यूएसपी उनका 'बॉय नेक्स्ट डोर' वाला लुक है. वह कभी भी बड़े-बड़े डायलॉग मारने वाले पारंपरिक हीरो नहीं रहे, बल्कि उन्होंने जमीन से जुड़े, शोषित और समाज के निचले तबके के किरदारों को पर्दे पर जिया है. 'असुरन', 'कर्णन', 'वादा चेन्नई' और 'रायन' जैसी फिल्मों में उन्होंने एंग्री यंग मैन और सामाजिक असमानता के खिलाफ लड़ने वाले किरदार निभाकर अपनी एक अलग लीग बनाई है. वह एक बेहतरीन एक्टर के साथ-साथ शानदार डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और नेशनल अवॉर्ड विनर लिरिसिस्ट भी हैं.

थलपति विजय से तुलना, क्या धनुष भी बनाएंगे पार्टी?

चेन्नई की इस हालिया मीटिंग के बाद धनुष की तुलना सीधे थलपति विजय से की जा रही है. विजय ने भी राजनीति में कदम रखने से पहले अपने फैन क्लब 'विजय मक्कल इयक्कम' को इसी तरह एक सामाजिक वेलफेयर मूवमेंट में बदला था. दिलचस्प बात यह है कि धनुष और विजय ने कभी भी किसी फिल्म में एक साथ स्क्रीन शेयर नहीं की है, लेकिन दोनों के बीच हमेशा से एक मूक और स्वस्थ कॉम्पिटिशन रहा है.

अब जब विजय की पार्टी ने राज्य में अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार कर ली है, तो लोगों में चर्चा है कि धनुष भी अपने युवा और महिला वोट बैंक के दम पर आने वाले सालों में अपनी पार्टी 'तमिलगा एझुची कझगम' का ऐलान कर सकते हैं.

समाज सेवा से राजनीति तक का रास्ता?

धनुष के फैन क्लब की कहानी बाकी स्टार्स से थोड़ी जुदा है. धनुष ने अपने प्रशंसकों से कहा हुआ है कि वे केवल सिनेमाघरों में कट-आउट्स पर दूध चढ़ाने या तालियां बजाने तक सीमित न रहें. अपनी एकजुटता को समाज सेवा में लगाएं, जैसे रक्तदान शिविर लगाना, गरीब परिवारों की मदद करना और मुफ्त लाइब्रेरी खोलना.

उनके फैन क्लब में महिलाओं की एक बहुत मजबूत विंग है, जिसे ग्राउंड लेवल पर मजबूत करने के लिए ही धनुष ने यह सीक्रेट मीटिंग की थी. रजनीकांत के दामाद का टैग हटने के बाद भी धनुष ने खुद को साबित किया और आज वह अपने दम पर तमिलनाडु की राजनीति में एक नया सस्पेंस बन चुके हैं. क्या 'कोलावेरी डी' का यह शोर अब चुनावी रैलियों में बदलेगा, यह तो वक्त ही बताएगा.