पूर्व नौसेना चीफ बोले- सेना की क्षमता को प्रभावित करेगी अग्निवीर स्कीम, एक्सपर्ट्स क्या सोच रहे?

अभिषेक गुप्ता

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Agniveer Scheme: देश में अग्निवीर स्कीम को लेकर चल रहे विवाद से आप सभी रूबरू ही होंगे. विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सेना में भर्ती की इस योजना को रद्द करने की बात तक कही हैं. इस स्कीम को आधार बनाकर वो लगातार सरकार को टारगेट करते नजर आए है. इन सब के बीच अब इस विवाद में नौसेना  के पूर्व प्रमुख की इंट्री हो गई है. भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने पिछले दिनों सेना में नई भर्ती योजना अग्निवीर को लेकर एक बड़ी बात कही हैं. उन्होंने कहा, यह योजना सेना की युद्ध प्रभावशीलता को कम कर देगी और इस योजना को चलाने वाली एकमात्र प्रेरणा पेंशन बिल को कम करना था. करमबीर सिंह ने ये बात सेवानिवृत्त नौसेना प्रमुख अरुण प्रकाश के एक ट्वीट का जवाब देते हुए कही. 

दरअसल अरुण प्रकाश ने हाल ही में अग्निवीर स्कीम पर एक कॉलम लिखा था और कहा था कि, सेना में किसी भी बदलाव या सुधार के लिए एकमात्र लिटमस टेस्ट यह होना चाहिए कि, 'युद्ध में देश की प्रभावशीलता बढ़ती है या कम होती है. प्रकाश ने अपने कॉलम में यह भी लिखा है कि, 'अर्थशास्त्र राष्ट्रीय सुरक्षा को पीछे ले जाता है.'

अग्निवीर स्कीम पर क्या लिखा था अरुण प्रकाश ने?

पिछले महीने द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख में, पूर्व नौसेना अधिकारी अरुण प्रकाश ने लिखा था कि, युद्ध की बदली हुई प्रकृति को देखते हुए, स्मार्ट तकनीक और नवीन रणनीति के साथ जनशक्ति को प्रतिस्थापित करके भारतीय सेना का आकार कम करना एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है. उन्होंने लिखा कि, 'इस पृष्ठभूमि में अग्निपथ की तर्ज पर उचित रूप से गठित और 'बचत को प्रभावित करने' या 'रोजगार पैदा करने' के बजाय 'युद्ध प्रभावशीलता' को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने वाली एक योजना एक सुधारात्मक प्रक्रिया शुरू कर सकती थी. 

प्रकाश ने आगे लिखा कि ऐसी योजना, अपने वर्तमान स्वरूप में, केवल सेना के लिए उपयुक्त थी, जिसके बड़े पैदल सेना घटक पर प्रौद्योगिकी का अत्यधिक बोझ नहीं था.  नौसेना और वायु सेना के मामले में उन्होंने कहा, 'यह माना जाना चाहिए कि एक नए सैनिक को घातक हथियार प्रणालियों के संचालन या रखरखाव के लिए पर्याप्त व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने से पहले कम से कम 5-6 साल की आवश्यकता होती है. पूर्व नौसेना प्रमुख अरुण प्रकाश ने इसे 'कट्टरपंथी' सुधार कहा. उन्होंने लिखा इसे लागू करने से पहले एक पायलट परियोजना होनी चाहिए थी.

नौसेना के पूर्व एडमिरल करमबीर सिंह ने प्रकाश की बात से जताई सहमति 

अरुण प्रकाश ने अपना लेख ट्वीट किया था जिसपर करमबीर सिंह ने जवाब देते हुए कहा, 'सहमत हूं सर, अग्निपथ को चलाने वाली एकमात्र प्रेरणा सरकार के पेंशन बिल को कम करना है. यह तथ्य कि यह योजना युद्ध की देश की क्षमता को कम कर देगी, राष्ट्रीय सुरक्षा को समझने वाले सभी लोग इस बात को जानते हैं.

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अब ये भी जान लीजिए क्या है अग्निपथ योजना?

अग्निपथ योजना को जून 2022 में शुरू किया गया था. इसमें युवाओं को चार साल तक सशस्त्र बलों में सेवा का मौका मिलता है. चार साल की सेवा के बाद, 25 फीसदी सैनिकों को बरकरार रखा जाता है और बाकी 75 फीसदी सैनिक बाहर कर दिए जाते है. इनको ग्रेच्युटी और पेंशन लाभ का कोई अधिकार नहीं होगा. सरकार का इस योजना के पीछे तर्क ये है कि, युवाओं को देना में काम करने का मौका मिलेगा और फिर उन्हें एकमुश्त राशि मिलेगी जिससे वो कुछ और काम कर सकते है. इसके साथ ही इन 75 फीसदी सैनिकों को राज्य सरकार और अन्य कई नौकरियों में वेटेज दिया जाएगा. 

इस योजना के पीछे कई लोगों का तर्क है कि, यह योजना सरकार के पेंशन बिलों को बचाने के लिए लाई गई है. अग्निपथ योजना में कोई पेंशन प्रावधान नहीं है.  हालांकि अग्निवीरों को 48 लाख रुपये का गैर-अंशदायी बीमा कवर प्रदान किया जाता है. 

विशेषज्ञ क्या सोचते है?

थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन(ORF) के सिक्युरिटी विश्लेषक और वरिष्ठ फेलो सुशांत सरीन ने कहा कि, अग्निपथ के साथ गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन भारत पेंशन पर बड़ी रकम खर्च नहीं कर सकता है. उन्होंने अरुण प्रकाश को जवाब देते हुए एक ट्वीट में कहा, 'अर्थशास्त्र को राष्ट्रीय सुरक्षा से पूरी तरह से अलग नहीं किया जा सकता है. 'एक संतुलन स्थापित करना होगा अन्यथा आप बिना अर्थव्यवस्था के रह जाएंगे और आपके पास सुरक्षित करने के लिए कोई राष्ट्र नहीं होगा. ये बात आप सोवियत से पूछें. अग्निपथ के साथ कुछ गंभीर मुद्दे हैं. इन्हें ठीक करने की जरूरत है लेकिन हम इस पर भारी मात्रा में खर्च नहीं कर सकते हैं. पेंशन राज्य को दिवालिया बना देगी. कृपया पाकिस्तान पर एक नजर डालें.'

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कुल मिलाकर अग्निवीर स्कीम पर पूर्व सैनिक, राजनेता, सरकार और विशेषज्ञों की अपनी अलग-अलग राय है. कोई इसे पूर्ण रूप से खत्म करने तो कोई इसमें रिफॉर्म करने की बात कह रहा है. हालांकि इन सब के बीच सबसे ज्यादा नुकसान देश के युवाओं का हो रहा है जो सेना में नौकरी की आस में रोज परिश्रम कर रहे है. उसके बाद भी 100 में से सिर्फ 25 को परमानेंट कर 75 को बाहर कर दिया जा रहा है. 

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