मनरेगा पर क्यों नहीं बन पा रही बीजेपी और चंद्रबाबू नायडू के TDP के बीच बात? इस बदलाव पर क्यों हो रहा खूब हंगामा
MGNREGA name change: मनरेगा के नाम और फंडिंग सिस्टम में प्रस्तावित बदलाव को लेकर बीजेपी और उसकी सहयोगी टीडीपी आमने-सामने आ गई हैं. जहां मोदी सरकार मनरेगा को 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण' में बदलने की तैयारी में है, वहीं चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी राज्यों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर सवाल उठा रही है. जानिए पूरा मामला.
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देश की राजनीति में अक्सर कुछ-ना-कुछ ऐसा होते रहता है, जिससे की पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होते है. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि पक्ष के सहयोगी दल ही उनके फैसलों पर सवाल उठा देते है. ऐसा ही कुछ मनरेगा का नाम बदलने को लेकर हुआ है. 2004 में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे और सरकार से बाहर रहकर सोनिया गांधी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद NAC की चेयरपर्सन बनी थी. उसी दौर में गांवों में बेरोजगारी की समस्या खत्म करने के लिए मनरेगा का जन्म हुआ. MGNREGA यानी Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act को लाने के पीछे की वजह गारंटी के साथ रोजगार दिलाने के लिए थी. यह योजना मनमोहन सरकार की थी, लेकिन ब्रेन चाइल्ड सोनिया गांधी का माना गया. 2004 से 2009 तक उथल-पुथल वाली यूपीए की गठबंधन सरकार चलाने के बाद भी 2009 में जब कांग्रेस दोबारा सत्ता में आई तो क्रेडिट मनरेगा को गया जिसने गांवों में रोजी-रोजगार की समस्या पर काबू पाया.