ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर कांग्रेस पार्टी ने जारी किया बयान, बोली-'दुख की घड़ी में परिवार के साथ', जानें और क्या कहा
मल्लिकार्जुन खरगे ने अली हुसैनी खामेनेई की मौत पर गहरा दुख जताते हुए सैन्य कार्रवाई की निंदा की. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और वैश्विक शांति, संप्रभुता व कूटनीतिक समाधान की वकालत की.

Congress reaction Iran attack: ईरान के सुप्रीम लीडर अली हुसैनी खामेनेई की सैन्य हमले में हुई मौत के बाद कांग्रेस पार्टी ने बयान समाने आया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर इस घटना पर दुख जताया. खरगे ने कहा, "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस युद्ध की औपचारिक घोषणा के बिना किए गए सैन्य हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली हुसैनी खामेनेई की टारगेटेड हत्या की निंदा करती है." उन्होंने आगे कहा, "कांग्रेस इस गहरे दुख की घड़ी में सुप्रीम लीडर के परिवार, ईरान के लोगों और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करती है."
अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान में इस सैन्य कार्रवाई को वैश्विक नियमों के खिलाफ बताया. खरगे ने कहा, " ईरान में हो या वेनेजुएला किसी भी सॉवरेन देश की सरकार की लीडरशिप और जबरन सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने के लिए सैन्य बल का टारगेटेड उपयोग एक बार फिर से वही पुरानी और खतरनाक regime-change सोच के लौटने जैसा है." उन्होंने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) और 2(7) का भी उल्लंघन है, जो किसी भी राज्य की राजनीतिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप या बल के प्रयोग को रोकता है.
भारत के संवैधानिक मूल्यों का दिया हवाला
कांग्रेस अध्यक्ष ने इस संकट के समय में भारत की विदेश नीति और संवैधानिक आदर्शों की याद दिलाई. खरगे ने कहा, "भारत की विदेश नीति विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के प्रति प्रतिबद्धता पर टिकी है, जैसा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 51 में जरूरी है." उन्होंने कहा कि संप्रभु समानता और शांति को बढ़ावा देना भारत के सभ्यतागत मूल्यों के लिए मौलिक है और पश्चिम एशिया में यह संघर्ष वसुधैव कुटुंबकम (दुनिया एक परिवार है), महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत, प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नॉन-अलाइमेंट की नीति के सिद्धांत के पूरी तरह विपरीत है.
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कार्रवाइयों को 'साम्राज्यवाद' करार दिया
बयान के अंत में मल्लिकार्जुन खरगे ने बाहरी ताकतों द्वारा किसी देश की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिशों की आलोचना की. खरगे ने कहा, "INC दोहराती है कि हर देश के नागरिकों का अपना राजनीतिक भविष्य खुद तय करने का अधिकार है, जिसे छीना नहीं जा सकता. . किसी भी बाहरी ताकत के पास सरकार बदलने या किसी दूसरे देश के नेतृत्व को हुक्म चलाने का अधिकार नहीं है." उन्होंने इस तरह की कार्रवाइयों को 'साम्राज्यवाद' करार दिया और कहा कि इस तरह की कर्रवाईयां असल में नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के साथ बिल्कुल मेल नहीं खाते.










