लगातार हो रहे पेपर लीक्स, मोदी सरकार का 'एंटी पेपर लीक कानून' आखिर कर क्या रहा, ये है क्या?

अभिषेक गुप्ता

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Dharmendra Pradhan
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Anti-Paper Leak Law: देश में एक के बाद एक लगातर् पेपर लीक्स के मामले सामने आ रहे है. पहले NEET उसके बाद NET. फिलहाल इसमें कई खुलासे होने के बाद भी लीक की गुत्थी सुलझ नहीं सकी है. इस मामले में कई बड़े नाम भी संदिग्ध बताए जा रहे हैं. इन सब के बीच एक कानून की चर्चा हो रही है. वह कानून है 'एंटी-पेपर लीक कानून' जो इसी साल फरवरी में सामने आया था. सरकार ने इस कानून को लेकर बहुत हो-हल्ला मचाया था कि, 'मोदी सरकार ने ऐसा कानून लाया है जिससे अब कोई भी नकल माफिया बच नहीं पाएगा, अब कही पेपर लीक नहीं होगा.' खुद पीएम मोदी ने भी संसद में इसे लेकर भविष्य में पेपर लीक न होने की बात कही थी. हालांकि इस कानून के इतने हो-हल्ला के बाद भी देश में लगातार पेपर लीक हो रहा है और नकल माफिया खुलेआम घूम रहे है. आइए आपको बताते हैं आखिर क्या है ये कानून.  

पहले जानिए 'एंटी-पेपर लीक कानून' के बारे में 

फरवरी 2024 में संसद में पेपर लीक के खिलाफ 'एंटी-पेपर लीक कानून' बनाया गया. पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 2024 नाम से इस लॉ को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी थी. यह कानून लाने के पीछे मकसद जितने भी बड़े सार्वजनिक एग्जाम हो रहे हैं, उनमें ज्यादा पारदर्शिता बनाई जाए और परीक्षार्थी आश्वस्त रहें कि कोई गड़बड़ी नहीं होने पाएगी. 'एंटी-लीक लॉ' पब्लिक एग्जाम की बात करता है. यह वो परीक्षा है, जिसे पब्लिक एग्जामिनेशन अथॉरिटी आयोजित करवाती है, या फिर ऐसी अथॉरिटी जिसे केंद्र से मान्यता मिली हुई है. इसमें कई बड़ी परीक्षाएं शाामिल हैं, जैसे UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग रिक्रूटमेंट, और NTA की आयोजित सारे कंप्यूटर-बेस्ट एग्जाम शामिल है. 

हालांकि यह कानून आने के बाद हुई कई परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक की घटना देखी गई. इसका हालिया उदाहरण मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए होने वाली परीक्षा NEET और PHD में एडमिशन के लिए होने वाली परीक्षा NET है. 

अपराध साबित होने पर ये है सजा का प्रावधान 

- 'एंटी-पेपर लीक कानून' के तहत परीक्षाओं में अगर किसी व्यक्ति पर किसी प्रकार के हेर-फेर, लीक से जुड़ा कोई भी अपराध साबित होने पर न्यूनतम तीन से पांच साल की सजा और 10 लाख के जुर्माने का प्रावधान है. 

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- ऑर्गेनाइज्ड क्राइम होने पर दोषियों को पांच से दस साल की कैद और 1 करोड़ की पेनल्टी लग सकती है. 

- जांच कर रही एजेंसी के पास अधिकार होता है कि, वे दोषियों की प्रॉपर्टी जब्त और कुर्क कर सकें ताकि एग्जाम में हुए नुकसान की मॉनिटरी भरपाई हो सके. 

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- यह  कानून किसी भी ऐसे शख्स को एग्जामिनेशन सेंटर में आने से रोकता है, जिसे एग्जाम से जुड़ा काम नहीं सौंपा गया हो, या जो उम्मीदवार नहीं हो. 

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स्टूडेंट्स को कानून के दायरे से रखा गया है बाहर 

कंपीटिटिव एग्जाम में शामिल होने वाले बच्चों के लिए इस कानून में कोई बात नहीं. संसद में फरवरी में जब विधेयक पारित हुआ उस दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था कि, हमने बहुत ध्यान से उम्मीदवारों को कानून से बाहर रखा, चाहे वे नौकरी के लिए एग्जाम दे रहे हों, या फिर छात्र हों. इस लॉ का मकसद केवल ऐसे लोगों को रोकना है, जो धांधली करके बच्चों और देश के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं.

ऐसे ही कल जब मोदी 3.0 में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से जब 'एंटी-पेपर लीक कानून' को लेकर सवाल पूछा गया तब उन्होंने कहा कि, कानून का अभी मसौदा तैयार किया जा रहा है. यानी कानून का अभी पूरे तरीके से ड्राफ्ट ही नहीं बना है लेकिन सरकार और बीजेपी के लोगी ने लोकसभा चुनाव में इसका जमकर प्रचार किया. कुल मिलाकर ये साफ है कि, सरकार अभी भी पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर उतनी जागरूक नहीं दिख रही है जितना उसे होना चाहिए. 

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