Shesh Bharat: त्रिपुरा के महाराजा प्रद्योत देबबर्मा की सियासत से विदाई, क्या BJP को मिलेगा आदिवासी वोट बैंक का फायदा?

त्रिपुरा के महाराजा प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया है. उन्होंने स्वास्थ्य, परिवार और मानसिक शांति को फैसले की वजह बताया. टिपरा मोथा के संस्थापक प्रद्योत अब राजनीतिक पद के बिना आदिवासियों के अधिकारों और तिप्रासा समझौते को लागू कराने की लड़ाई जारी रखने की बात कह रहे हैं.

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pradyot debbarma
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भारत का एक ऐसा राज्य त्रिपुरा जहां लोकतंत्र आने के बाद भी राजा का राज चलता है. एक ऐसा राज्य, जहां जनता चुनावी नेताओं को नहीं, बल्कि अपने 'बुबाग्रा' यानी राजा के एक इशारे पर पूरा वोट बैंक पलट देती है. त्रिपुरा से आई एक खबर ने सबको चौंका दिया है. त्रिपुरा के महाराजा प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने हमेशा के लिए सक्रिय राजनीति छोड़ दी है. उन्होंने अपनी गिरती सेहत, परिवार और मानसिक शांति का हवाला देते हुए चुनावी व सक्रिय राजनीति को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है.