Raihan Vadra: राहुल मामा के अंदाज में सीधे सरकार से टकरा गए भांजे रेहान वाड्रा !
Charchit Chehra: प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की दिल्ली के बीकानेर हाउस में होने वाली सोलो आर्ट एग्जीबिशन से राजनीतिक और छात्र आंदोलनों की तस्वीरें हटाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है. रेहान और कांग्रेस ने इसे सेंसरशिप करार दिया है.
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राजनैतिक परिवारों के बच्चे अक्सर विरासत की उसी राह पर चल पड़ते हैं, जहां सत्ता, प्रदर्शन, चुनावी रैलियां और तेवर उनका भविष्य तय करते हैं. भारत के सबसे रसूखदार राजनीतिक घरानों में से एक गांधी परिवार से भी दुनिया को भी यही उम्मीद रहती है. पहले पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी, फिर इनके बेटे राजीव और संजय गांधी. अब राहुल और प्रियंका और वरूण गांधी सियासी मैदान में हैं. इसी बीच प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की चर्चा भी जोरों पर होने लगी है. कभी-कभार मामा राहुल गांधी के साथ दिखाई देने वाले रेहान तो इस बार मामा के अंदाज में ही आ गए.
अब चूंकि गांधी परिवार की राजनैतिक विरासत को आगे बढ़ाने की बात आती है तो प्रियंका गांधी के बेटे रेहान और बेटी मिराया के नाम की चर्चा होने लगती है. रेहान और मिराया दोनों 'जेन ज़ी' हैं. रेहान जहां 26 साल के हैं, वहीं मिराया 24 की हैं.
फोटोग्राफर रेहान की इतनी चर्चा क्यों होने लगी ?
रेहान ने सियासत की चकाचौंध से दूर कला की दुनिया को चुना है और वे पेशे से एक विजुअल आर्टिस्ट व फोटोग्राफर हैं. लेकिन आज जब दिल्ली की एक आर्ट गैलरी में उनकी सोलो एग्जिबिशन से ठीक पहले उनकी खींची गई तस्वीरों को सेंसर कर दिया गया, तो रेहान का खून खौल गया. मां प्रियंका गांधी से लेकर पूरी कांग्रेस पार्टी दिल्ली प्रोटेस्ट से जुड़ी रेहान की फोटोज हटाए जाने को लेकर आक्रोशित है. इसीलिए रेहान वाड्रा की चर्चा जोरों पर है.
दिल्ली के बीकानेर हाउस में क्या हो गया ?
रेहान दिल्ली के बीकानेर हाउस में "No Idea Is Final" नाम से अपनी सोलो Exhibition 22 अक्तूबर को करने वाले थे. इसमें वाइल्डलाइफ, एब्सट्रैक्ट आर्ट और पिछले 6 महीनों में दिल्ली में हुए छात्र-युवा आंदोलनों व विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें शामिल थीं, जैसे धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नीट प्रोटेस्ट. रेहान के मुताबिक, उन्होंने हफ्ते भर पहले ही इसका पूरा लेआउट और पीडीएफ फाइल मैनेजमेंट को सौंप दी थी, जिसे मंजूरी मिल चुकी थी. रेहान का आरोप है कि Exhibition शुरू होने से ठीक कुछ घंटे पहले ही, बीकानेर हाउस मैनेजमेंट ने उन पर दबाव बनाया कि वे शाम 5 बजे तक विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी तस्वीरों को हटा लें, वरना शो को कैंसिल कर दिया जाएगा.
रेहान की कुल 105 तस्वीरों में से लगभग 74 तस्वीरों को जबरन हटाने को कहा गया. रेहान के मुताबिक, मैनेजमेंट का तर्क था कि देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए पॉलिटिकल नेचर वाली ऐसी तस्वीरें दिखाने का यह सही समय नहीं है. मैनेजमेंट ने आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा लहराए जा रहे तिरंगे की दो तस्वीरों को भी हटाने का निर्देश दिया. रेहान के मुताबिक, जब वे वेन्यू से कुछ देर के लिए बाहर गए, तो स्टाफ ने उनमें से एक तिरंगे वाली तस्वीर को खुद ही दीवार से उतार दिया.
रेहान झुकने को तैयार नहीं हैं
हालांकि रेहान अपनी बात से न पीछे हटने को तैयार हैं, न झुकने को तैयार हैं. रेहान ने कहा कि उन्हें तिरंगे की तस्वीरें हटाने को कहा गया, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया. कहा कि, मैं भारत के राष्ट्रध्वज की तस्वीर को अपनी गैलरी से कभी नहीं हटाऊंगा. रेहान अपनी बची हुई फोटोज के साथ शो करने पर डटे रहे और जिन दीवारों से तस्वीरें हटाई गई थीं, उन्हें खाली छोड़ दिया. रेहान ने कहा कि ये खाली दीवारें अब खुद में एक Art हैं और यही मेरा सबसे बड़ा Silent Protest हैं" जो देखने वालों को खुद ब खुद व्यवस्था की तानाशाही की कहानी बयां कर रही हैं. रेहान ने कहा कि वो सारी फोटोज को जल्द ही दिल्ली और बेंगलुरु में किसी अन्य वेन्यू पर इन सभी सेंसर की गई तस्वीरों को पूरा डिस्प्ले करेंगे.
बेटे के साथ ये सब होता देख प्रियंका भी हुईं आहत
रेहान के साथ जो हुआ उसे देखकर मां प्रियंका बड़ी आहत दिखाई दी. प्रियंका ने कहा, "जब सत्ता में बैठा कोई व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो उसे पता नहीं होता, लेकिन वह उसी सत्ता को खो चुका होता है जिसे वह बचाने की कोशिश कर रहा है. रेहान के पिता रॉबर्ट वाड्रा ने भी सवाल उठाया कि जब प्रशासन के पास एक हफ्ते पहले ही सारी डिटेल्स थीं, तो ऐन वक्त पर किसके दबाव में यह फैसला बदला गया? उन्होंने कहा कि बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार (बीजेपी) के अधीन आता है और लोकतंत्र में रचनात्मक कला के साथ राजनीति को नहीं मिलाया जाना चाहिए. रेहान को सोशल मीडिया पर भरपूर सपोर्ट मिला.
तो क्या मामा राहुल गांधी की राह पर चल पड़े हैं रेहान ?
रेहान के तेवरों से लगता है कि वो मामा राहुल गांधी की राह पर चल पड़े है जो सीधे सरकार से टकराने को तैयार हैं. रेहान Gen Z के उस मिजाज को री-प्रजेंट करते हैं जो सत्ता या सिस्टम के सामने आसानी से घुटने नहीं टेकता. रेहान अपनी शर्तों पर जीने और अपनी बात पर अड़े रहने वाले युवा हैं. इस घटना के बाद उन्होंने हिम्मत हारने या हताश होने के बजाय तुरंत दिल्ली और बेंगलुरु में अपनी अगली प्रदर्शनी का ऐलान कर दिया. यह उनके रेजिलिएंट और 'फ्यूचर-ओरिएंटेड' एट्टिट्यूड को दिखाता है. वे इस बैन को एक अंत की तरह नहीं, बल्कि अपनी कला के एक नए अध्याय की शुरुआत की तरह देख रहे हैं.
गांधी-नेहरू परिवार की नई पीढ़ी के सदस्य होने के कारण, रेहान वाड्रा के सक्रिय राजनीति में आने की अटकलें और चर्चाएं समय-समय पर लगती रही हैं. हालांकि वे खुद को एक विजुअल आर्टिस्ट और फोटोग्राफर बताते हैं, लेकिन जब भी वे सार्वजनिक या राजनीतिक मंचों पर दिखे हैं, मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके राजनीतिक डेब्यू के कयास लगाने शुरू कर दिए.
'भारत जोड़ो यात्रा' में भी शामिल हुए थे रेहान
राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी पैदल यात्रा 'भारत जोड़ो यात्रा' जब मध्य प्रदेश से गुजर रही थी, तब रेहान वाड्रा अपनी मां प्रियंका गांधी और पिता रॉबर्ट वाड्रा के साथ यात्रा में शामिल हुए. रेहान को राहुल गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते और यात्रा के दौरान आम लोगों व कांग्रेस समर्थकों से हाथ मिलाते देखा गया. इस दौरान मीडिया में यह चर्चा बेहद आम हो गई थी कि क्या गांधी परिवार की यह नई 'जेन ज़ी' पीढ़ी अब कांग्रेस के बड़े राजनीतिक आंदोलनों का हिस्सा बनकर मुख्यधारा की राजनीति में एंट्री करने का मन बना रही है.
नवंबर 2024 में लोकसभा चुनाव के कुछ महीनों बाद, राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो साझा किया था. इस वीडियो में वे दिवाली के मौके पर पेंटर्स और कुम्हारों के साथ काम कर रहे थे और उनके साथ रेहान वाड्रा भी मजदूरों की मदद कर रहे थे.
इसे विश्लेषकों ने 'सॉफ्ट पॉलिटिकल लॉन्च' के रूप में देखा
इस वीडियो को राष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने रेहान के एक 'सॉफ्ट पॉलिटिकल लॉन्च' के रूप में देखा. वीडियो में राहुल गांधी जिस तरह से रेहान को देश के आम नागरिकों, कारीगरों की समस्याओं और उनके हुनर के बारे में समझा रहे थे, उसने इन चर्चाओं को हवा दी कि राहुल अपने भांजे को जमीनी हकीकत से रूबरू कराकर राजनीति के लिए तैयार कर रहे हैं.
रेहान की पढ़ाई की बात करें को शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के श्रीराम स्कूल और फिर उत्तराखंड के देहरादून में स्थित दून स्कूल में हुई है. इससे पहले उनके नाना राजीव गांधी और मामा राहुल गांधी भी कभी इसी स्कूल में पढ़े थे. रेहान की आगे की पढ़ाई ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में हुई है. रेहान ने स्कूल ऑफ ओरियंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (एसओएस) से राजनीति की पढ़ाई की है.
दिसंबर 2025 में सगाई को लेकर हुई खूब चर्चा
दिसंबर 2025 में रेहान अपनी सगाई को लेकर भी चर्चा में आए थे. दिसंबर 2025 में अपनी लॉन्ग-टाइम पार्टनर अवीवा बेग से रेहान ने सगाई की घोषणा की थी. दोनों को करीब लाने वाली सबसे बड़ी वजह फोटोग्राफी और विजुअल आर्ट्स के प्रति उनका साझा जुनून रहा है, जिसके चलते आगे चलकर दोनों ने एक क्रिएटिव स्टूडियो 'Atelier 11' की सह-स्थापना भी की. अवीवा दिल्ली के बिजनेसमैन इमरान बेग और मशहूर इंटीरियर डिजाइनर नंदिता बेग की बेटी हैं.
दिलचस्प बात यह है कि रेहान की मां प्रियंका गांधी वाड्रा और अवीवा की मां नंदिता बेग सालों पुरानी बेहद करीबी सहेलियां हैं. नंदिता ने ही दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय 'इंदिरा गांधी भवन' के इंटीरियर को डिजाइन किया था, जहां से दोनों परिवारों के बीच गहरा जुड़ाव हुआ.
7 साल तक डेट करने के बाद रिश्ते को आगे बढ़ाया
रेहान और अवीवा बेग ने 7 साल तक डेट करने के बाद अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का फैसला किया, तो परिवारों ने बेहद खुशी-खुशी इसे मंजूरी दी. रेहान ने न्यू ईयर 2026 के जश्न के दौरान राजस्थान के रणथंभौर नेशनल पार्क स्थित एक बेहद खूबसूरत और प्राइवेट रिसॉर्ट में अवीवा को प्रपोज किया. अवीवा की बात करें तो वे न सिर्फ एक बेहतरीन प्रोफेशनल फोटोग्राफर और प्रोड्यूसर हैं, बल्कि पूर्व में नेशनल लेवल की फुटबॉल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं.
रेहान ने अपनी जिंदगी के एक नए पड़ाव की तो शुरुआत सगाई के साथ की, लेकिन क्या पॉलिटिकल इनिंग भी वो शुरू करेंगे ? क्या रेहान वाड्रा अपने मामा राहुल गांधी के पदचिन्हों पर चलते हुए फुल-टाइम राजनीति में आएंगे?
वे खुद को राजनीति से दूर सिर्फ एक आजाद विजुअल आर्टिस्ट और फोटोग्राफर के रूप में ही स्थापित करना चाहते हैं. उनके पिता रॉबर्ट वाड्रा भी साफ कह चुके हैं कि रेहान अभी बहुत छोटे हैं और वे अपनी कला की दुनिया में व्यस्त हैं. लेकिन सियासत का एक नियम है- यहां कुछ भी स्थायी नहीं होता. जिस तरह दिल्ली की प्रदर्शनी में उनके साथ हुए विवाद ने उन्हें रातों-रात देश के सबसे बड़े राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है, उसने यह साबित कर दिया है कि वे भले ही राजनीति से भागें, पर राजनीति उनका पीछा नहीं छोड़ने वाली.
राहुल गांधी के साथ जमीन पर मजदूरों के बीच बैठना हो या भारत जोड़ो यात्रा में कदम मिलाना- रेहान का 'जेन ज़ी' एट्टिट्यूड यह इशारा जरूर करता है कि अगर वे कभी राजनीति में आए भी, तो वे पारंपरिक ढर्रे वाले नेता नहीं बनेंगे. वे अपनी बात बेबाकी से रखने वाले और सिस्टम की आंख में आंख डालकर सच बोलने वाले एक नए मिजाज के राजनेता होंगे.
