काउंटिंग के दिन थी 99 सीट फिर कांग्रेस के पास कहां से आईं 100? जवाब सांगली के इस लाल में छिपा है

रूपक प्रियदर्शी

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Congress: लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार तो नहीं बना रही लेकिन राहुल गांधी की मेहनत और कांग्रेस की कामयाबी की बहुत चर्चा है. जिसे डूबता जहाज कहा जा रहा था उसने तूफान का डटकर सामना किया. पतवार भी बचा ली और जहाज को भी सुरक्षित किनारे पर खड़ा कर दिया. 10 साल से 44 और 52 सीटों के कारण कांग्रेस का मजाक उड़ता रहा लेकिन 99 सीटें जीतकर कांग्रेस ने बीजेपी का बहुमत रोकने का धमाका किया. अब अच्छी खबर ये है कि कांग्रेस की पूरी हो गई है सेंचुरी.
 
सांगली से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले सांसद विशाल पाटिल ने साथ आकर कांग्रेस की सेंचुरी पूरी करा दी. चुनाव जीतते ही विशाल पाटिल सांगली से दिल्ली आए. सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे से मिले. लिखकर दे दिया कि निर्दलीय विशाल पाटिल को कांग्रेस अपना ही सांसद समझे. विशाल पाटिल का आना कांग्रेस और कांग्रेस की विचारधारा की जीत है जिसका अक्सर जिक्र करते हैं राहुल गांधी. 

सांगली के लिए कांग्रेस से की थी बगावत

विशाल पाटिल कांग्रेसी थे और कांग्रेस ही रहेंगे. महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के दौरान सांगली लोकसभा सीट को लेकर काफी हल्ला मचा. इंडिया गठबंधन के पार्टनर उद्धव ठाकरे अड़ गए कि सांगली सीट उनकी शिवसेना ही लड़ेगी. कांग्रेस ने एक सीट के लिए ज्यादा मच-मच नहीं की. सांगली सीट उद्धव शिवसेना को दे दी. कांग्रेस हाईकमान का फैसला विशाल पाटिल ने मंजूर नहीं किया. उनको निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा. हालांकि कांग्रेस ने विशाल पाटिल की बगावत को बगावत नहीं माना. कांग्रेस के स्थानीय विधायकों-नेताओं ने विशाल पाटिल के लिए काम करके सीट जिता दी.
 

विशाल पाटिल ने बीजेपी के संजय पाटिल को 1 लाख 53 वोटों से हराकर सांगली की सीट फिर से कांग्रेस की झोली में डाल दी. अब साबित हो गया कि सांगली पर उद्धव ठाकरे का अड़ना गलती थी. बागी विशाल पाटिल 5 लाख 71 हजार से ज्यादा वोट हासिल करके जीते. उद्धव ठाकरे का उम्मीदवार मुश्किल से 60 हजार वोट हासिल कर सका.

पाटिलों का गढ़ रही है सांगली सीट

विशाल पाटिल के पिता प्रकाशबापू वसंतदादा पाटिल जब तक जीवित रहे, महाराष्ट्र कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे. प्रकाशबापू के पिता वसंत दादा पाटिल उनसे भी बड़े नेता थे. 1967 में पद्म भूषण सम्मान मिला. दो-दो बार कांग्रेस सरकार के सीएम बने. वसंत दादा की राजनीतिक विरासत प्रकाश बापू ने संभालते हुए कांग्रेस के लिए सांगली की लोकसभा सीट 5 बार दमखम के साथ जीती. 

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2005 में प्रकाशबापू के निधन के बाद हुए उपचुनाव में पाटिल परिवार ने उनके बेटे प्रतीक पाटिल को लड़ाया. प्रतीक पाटिल चुनाव जीतकर सांसद बन भी गए लेकिन उनका मन राजनीति में लगा नहीं. उन्होंने राजनीति छोड़ दी तो राजनीतिक विरासत दूसरे बेटे विशाल पाटिल को संभालनी पड़ी. 2019 में विशाल पाटिल सांगली का टिकट कांग्रेस से नहीं ले सके तो उन्होंने स्थानीय पार्टी स्वाभिमानी शेतकारी पार्टी के टिकट पर हार जाने वाला चुनाव लड़ा. 

निर्दलीय चुनाव लड़कर जीती सांगली सीट

2024 में फिर विशाल पाटिल कांग्रेस से टिकट नहीं ले पाए लेकिन निर्दलीय लड़कर उन्होंने सांगली में पाटिल परिवार की विरासत बचा ली. 1962 से कांग्रेस सांगली लोकसभा सीट जीतती रही. सिर्फ 2014-2019 में धोखा हुआ. वसंत दादा पाटिल के परिवार के छठे सदस्य हैं विशाल पाटिल जो सांगली से सांसद का चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं. विशाल पाटिल ने निर्दलीय सांसद होने के नाते कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का समर्थन किया. दोबारा कांग्रेस में शामिल नहीं हुए हैं. 

महाराष्ट्र में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं जिसमें कांग्रेस को बड़े फायदे की उम्मीद लगाई जा रही है. बीजेपी को एकनाथ शिंदे, अजित पवार से गठबंधन का भारी नुकसान हुआ. अपनी-अपनी पार्टियां गंवाकर भी शरद पवार और उद्धव ठाकरे ने न केवल अपनी बची-खुची पार्टी में प्राण फूंक दिए हैं बल्कि कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार के दावेदार भी माने जा रहे हैं. सांगली के विशाल पाटिल के कांग्रेस के साथ आने से इंडिया गठबंधन के हिस्से में महाराष्ट्र की 48 में से 31 सीटें आ गई हैं. बीजेपी का एनडीए 20 सीटों के नुकसान के साथ 17 पर अटक गया.  

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