10 अक्टूबर को क्या पलट सकता है पश्चिम बंगाल का पावर गेम? सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन ने बढ़ाई हलचल
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में TMC के 10 बागी विधायकों की सदस्यता पर सुप्रीम कोर्ट की तय समयसीमा 10 अक्टूबर को खत्म हो रही है. स्पीकर रथिन बोस को अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करना है. जानिए बागी गुट का गणित, दलबदल कानून और इस फैसले के संभावित राजनीतिक असर की पूरी कहानी.
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बगावत, बंगाल और अदालत! सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक दंगल में एक ऐसी 'डेडलाइन' खींच दी है, जिसने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि बंगाल विधानसभा के स्पीकर रथिन बोस के पास ममता बनर्जी गुट से बगावत करने वाले 10 विधायकों की किस्मत का फैसला करने के लिए सिर्फ 10 अक्टूबर तक का वक्त है. लेकिन असली रोमांच इस तारीख में नहीं, बल्कि संविधान के उस पर्दे के पीछे है जहां देश की न्यायपालिका यानी कोर्ट और विधायिका यानी स्पीकर के बीच शक्तियों की एक अदृश्य जंग चल रही है. आखिर क्यों देश की सर्वोच्च अदालत इस पूरे विवाद की कमान खुद अपने हाथ में लेने से बच रही है? क्या है स्पीकर की कुर्सी की वो 'सुपरपावर' जिसके आगे सुप्रीम कोर्ट भी सीधे दखल देने से हिचकिचाता है? और क्यों विधायकों की बगावत की ये कहानी, टीएमसी के ही बागी सांसदों के मामले से बिल्कुल जुदा है?
