कौन हैं नागौर के अनिल नागौरी? भजन गायक से लेकर सियासत के मैदान तक का दिलचस्प सफर

16 साल की उम्र में पीएम नरेंद्र मोदी को भजन सुनाकर चर्चा में आए 23 वर्षीय भजन गायक अनिल नागौरी अब सुरों की दुनिया से राजनीति में कदम रख चुके हैं. बीजेपी ने उन्हें नागौर जिला परिषद के वार्ड नंबर 37 से अपना प्रत्याशी बनाया है, जहां वह अब गांवों की बुनियादी समस्याओं को दूर करने के वादों के साथ चुनावी मैदान में हैं.

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अनिल नागौरी
अनिल नागौरी
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राजस्थान के नागौर जिले में चल रहे पंचायती राज चुनाव के बीच सियासत के गलियारों में एक नए और युवा चेहरे की चर्चा जोरों पर है. हम बात कर रहे हैं महज 23 साल के युवा अनिल नागौरी की, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नागौर जिला परिषद के वार्ड नंबर 37 से अपना प्रत्याशी बनाया है. कभी अपनी सुरीली आवाज और भजनों से लोगों के दिलों पर राज करने वाले अनिल अब सुरों की दुनिया से निकलकर राजनीति के मैदान में जनता के बीच विकास के मुद्दों के साथ उतर चुके हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खास मुलाकात

अनिल नागौरी का संगीत और राजनीति से जुड़ाव काफी पुराना और दिलचस्प है. अनिल बताते हैं कि साल 2019 में जब वह महज 16 साल के थे, तब उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई थी. प्रधानमंत्री ने न सिर्फ उनका नाम और काम पूछा, बल्कि उनसे भजन भी सुने. अनिल ने उस दौरान पीएम मोदी पर आधारित अपना गीत 'भारत का सच्चा चौकीदार' भी सुनाया था, जो आज भी उनके जीवन का एक यादगार पल है.

राजनीतिक पृष्ठभूमि और वार्ड का दायरा

अनिल के पिता जसमंत सिंह इंदलिया लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उनके मार्गदर्शन ने ही अनिल को जनसेवा के इस रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. बीजेपी द्वारा उतारे गए वार्ड नंबर 37 के अंतर्गत श्री बालाजी, ब्रह्मपुरी, कर्मसोता, गोरेरा, सुरजाना, सेवड़ी, हनुमान नगर, सतेरण, पीमपासर और छीला समेत कई गांव शामिल हैं. बचपन से ही धार्मिक कार्यक्रमों और भजनों के जरिए लोगों के बीच रहे अनिल अब इसी जुड़ाव को जनसेवा में बदलना चाहते हैं.

विकास के मुद्दे और चुनाव प्रचार की चुनौतियां

चुनावी मैदान में उतरे अनिल नागौरी के सामने केवल पहचान बनाने की नहीं, बल्कि गांवों की बुनियादी समस्याओं को दूर करने की चुनौती है. उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं में निम्नलिखित मुद्दों को सबसे ऊपर रखा है:

  • बेहतर सड़कें: कई इलाकों में पक्की सड़कें न होने के कारण वाहनों को दूर छोड़कर रेत के टीलों से पैदल सफर करना पड़ता है.
  • शुद्ध पेयजल और शिक्षा: गांवों में शुद्ध पानी की आपूर्ति और शिक्षा के स्तर को सुधारना.
  • रोजगार के अवसर: युवाओं के लिए रोजगार के नए साधन जुटाना.
  • मोबाइल नेटवर्क की समस्या: लाडिया गांव जैसी जगहों पर नेटवर्क की गंभीर समस्या को दूर करने के लिए टावर लगवाने का प्रयास करना.

भजनों के जरिए लोगों का दिल जीतने वाले अनिल नागौरी के लिए अब राजनीति के इस नए मंच पर जनता का भरोसा जीतना एक बड़ी परीक्षा होगी. जिला परिषद चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे कि जनता उनके विकास के वादों पर कितना भरोसा करती है.

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