चंबल में गूंजी किलकारियां: करीब 4500 घड़ियाल और बाटागुर कछुओं के बच्चों ने लिया जन्म, अंडे से निकल रहे बच्चों का अद्भुत Video सामने आया

धौलपुर और मुरैना की चंबल नदी में संकटग्रस्त बाटागुर कछुआ और घड़ियाल के करीब 4500 नन्हें बच्चों का जन्म हुआ है. देवरी घड़ियाल पालन केंद्र और चंबल के घाटों पर वन विभाग की सुरक्षा में अंडों से निकले शावकों को सुरक्षित नदी में छोड़ा जा रहा है.

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अंडो से बाहर निकले घड़ियाल और बाटागुर कछुए.
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Dholpur news. राजस्थान के धौलपुर और मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की सीमा से होकर गुजर रही चंबल नदी इन दिनों संकटग्रस्त बाटागुर कछुआ और घड़ियालों के नन्हे-मुन्ने राजकुमारों की किलकारियों से चहक उठी है. राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य क्षेत्र इस समय इन नन्हें शावकों की 'चीं-चीं' की आवाज से गुंजायमान है. चंबल नदी के मुहानों पर करीब डेढ़ हजार नन्हें घड़ियालों ने अंडों से प्राकृतिक रूप से जन्म लिया है. इसके साथ ही विभिन्न नेस्टिंग साइटों से करीब ढाई से तीन हजार दुर्लभ बाटागुर कछुआ के नन्हे शावक भी अंडों से बाहर आ चुके हैं. नदी के घाटों के किनारे झुंडों में इनकी उछल-कूद का बेहद खूबसूरत नजारा दिखाई दे रहा है.