लक्ष्यराज सिंह ने नामंजूर किया विश्वराज सिंह का महाराणा बनना, महाराणा प्रताप के वंशजों की लड़ाई सड़क पर आई

450 साल से चल रही परम्परा के हिसाब से खून से राजतिलक हुआ. गद्दी पर बिठाने की पगड़ी दस्तूर की रस्म हुई. 21 तोपों की सलामी दी गई. मेवाड़ के उत्तराधिकारी घोषित हुए, लेकिन उदयपुर सिटी पैलेस में दाखिल नहीं हो सके. कोई है जिसके लिए विश्वराज सिंह महाराणा के रूप में स्वीकार नहीं हैं. 

ADVERTISEMENT

NewsTak
तस्वीर: लक्ष्यराज मेवाड़ और रॉयल फैमिली के सोशल पेज से.
Google CTA

न्यूज़ हाइलाइट्स

point

उदयपुर में राजघराने ऐसा हाल, आपसी विवाद में राजमहल के दरवाजे बंद.

point

भयंकर बवाल, क्या है ये राजघराना विवाद का ये पूरा मामला?

राजतंत्र चला गया. राजशाही चली गई. राजमहल या तो लक्जरी होटल बन गए या खंडहर बन गए. तब भी राजा हैं. राजसी ठाठ-बाट है. राजतिलक की रस्में निभाई जा रही हैं. बदल चुके भारत में राजा बनना और राजतिलक कराना कितना मुश्किल है, ये बात उदयपुर में राजा विश्वराज सिंह को मेवाड़ राजपरिवार की गद्दी की विरासत संभालते समझ आ गई होगी.